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शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

देश के प्रथम राष्ट्रपति लाल बहादुर शास्त्री की हत्या के जिम्मेदार जिन्हें कोई पहचाना नही .........

Photo: कुलदीप नैयर की आत्मकथा में कई अहम खुलासे

लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मौत के बारे में भी नैयर ने अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला है। वे लिखते हैं कि उस रात मैं लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु का सपना देख रहा था। तभी दरवाजे पर हुई दस्तक से मैं जागा। गलियारे में खड़ी एक महिला ने कहा, ‘आपके प्रधानमंत्री मर रहे हैं।’ मैं हड़बड़ी में एक भारतीय अधिकारी के साथ कुछ ही दूरी पर स्थित शास्त्री जी के कमरे की ओर दौरा। पता चला, शास्त्री नहीं रहे। शास्त्री जी का कमरा काफी बड़ा था। उनका बेड भी। उनके चप्पल कारपेट पर सही तरीके से रखे थे।

कमरे के एक कोने में ड्रेसिंग टेबल पर थर्मस लुढ़का पड़ा था। आधिकारिक फोटोग्राफर और मैंने शास्त्री के पार्थिव शरीर पर तिरंगा ओढ़ा दिया और श्रद्धांजलि के साथ कुछ फूल चढ़ाये। बाद में मैंने जो खबर जुटायी, उसके अनुसार, शास्त्री जी 10 बजे रात अपने कमरे में आये। इसके बाद उन्होंने अपने निजी सेवादार रामनाथ को भोजन लाने को कहा। उनका भोजन राजदूत टीएन कौल के घर से आता था, जिसे खानसामा जान मोहम्मद पकाता था। खाने के बाद शास्त्री ने रामनाथ से कहा कि काबुल जाने के लिए सुबह जल्दी उठना है।

ताशकंद के समयानुसार, रात 1.20 बजे शास्त्री के सहयोगी सामान बांधने में लगे थे। तभी जगन्नाथ सहाय (शास्त्री के निजी सचिव) के कमरे के दरवाजे तक जाकर परेशान हालत में शास्त्री ने पूछा,’डाक्टर साहब कहां हैं?’ तब सहयोगियों ने उन्हें पानी पिलाया और सहयोगियों के सहारे अपने कमरे के बेड पर लेट गये। इसके बाद उन्होंने अपनी छाती पर हाथ फेरा और अचेत हो गये।

पाकिस्तान के जनरल अयूब मौके पर चार बजे सुबह पहुंचे और शास्त्री की मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया। अयूब ने पाकिस्तान के विदेश सचिव अजीज अहमद को इसकी जानकारी जुल्फिकार अली भुट्टो को देने को कहा। भुट्टो ने मौत शब्द सुनते ही पूछा,’वह दो कमीने कौन!’।

ताशकंद से लौटने के बाद शास्त्री की पत्नी ललिता शास्त्री ने मुझसे पूछा कि उनका शरीर नीला क्यों पड़ गया था? मैंने जवाब दिया कि जब पार्थिव शरीर पर लेप लगाया जाता है, तो।। इसके बाद उन्होंने शास्त्री के शरीर पर कुछ कटे के निशान के बारे में पूछा। इसकी जानकारी मुझे नहीं थी। लेकिन ललिता की एक बात मुझे अचंभित कर गयी कि शास्त्री का पोस्टमार्टम न तो ताशकंद में हुआ था, न दिल्ली में।

इसके कुछ दिनों बाद ललिता के गुस्सा होने का पता चला। वे इसलिए गुस्से में थीं कि शास्त्री के दो सहयोगियों ने उनकी मौत के अप्राकृतिक होने की बातवाले बयान पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था। समय गुजरने के साथ ही शास्त्री के परिवार का यह विश्वास पुख्ता होता चला गया कि उन्हें जहर दिया गया था।

किसने जहर दिलवाया, ये अब पूरी दुनिया जानती है, परन्तु आज भी लोग कांग्रेस जैसी पार्टी को समर्थन देते हैं इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या हो सकती है?
कुलदीप नैयर की आत्मकथा में कई अहम खुलासे,
लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मौत के बारे में भी नैयर ने अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला है। वे लिखते हैं कि उस रात मैं लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु का सपना देख रहा था। तभी दरवाजे पर हुई दस्तक से मैं जागा। गलियारे में खड़ी एक महिला ने कहा, ‘आपके प्रधानमंत्री मर रहे हैं।’
मैं हड़बड़ी में एक भारतीय अधिकारी के साथ कुछ ही दूरी पर स्थित शास्त्री जी के कमरे की ओर दौरा। पता चला, शास्त्री नहीं रहे। शास्त्री जी का कमरा काफी बड़ा था। उनका बेड भी। उनके चप्पल कारपेट पर सही तरीके से रखे थे।
कमरे के एक कोने में ड्रेसिंग टेबल पर थर्मस लुढ़का पड़ा था। आधिकारिक फोटोग्राफर और मैंने शास्त्री के पार्थिव शरीर पर तिरंगा ओढ़ा दिया और श्रद्धांजलि के साथ कुछ फूल चढ़ाये। बाद में मैंने जो खबर जुटायी, उसके अनुसार, शास्त्री जी 10 बजे रात अपने कमरे में आये। इसके बाद उन्होंने अपने निजी सेवादार रामनाथ को भोजन लाने को कहा। उनका भोजन राजदूत टीएन कौल के घर से आता था, जिसे खानसामा जान मोहम्मद पकाता था। खाने के बाद शास्त्री ने रामनाथ से कहा कि काबुल जाने के लिए सुबह जल्दी उठना है।

ताशकंद के समयानुसार, रात 1.20 बजे शास्त्री के सहयोगी सामान बांधने में लगे थे। तभी जगन्नाथ सहाय (शास्त्री के निजी सचिव) के कमरे के दरवाजे तक जाकर परेशान हालत में शास्त्री ने पूछा,’डाक्टर साहब कहां हैं?’ तब सहयोगियों ने उन्हें पानी पिलाया और सहयोगियों के सहारे अपने कमरे के बेड पर लेट गये। इसके बाद उन्होंने अपनी छाती पर हाथ फेरा और अचेत हो गये।
पाकिस्तान के जनरल अयूब मौके पर चार बजे सुबह पहुंचे और शास्त्री की मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया। अयूब ने पाकिस्तान के विदेश सचिव अजीज अहमद को इसकी जानकारी जुल्फिकार अली भुट्टो को देने को कहा। भुट्टो ने मौत शब्द सुनते ही पूछा,’वह दो कमीने कौन!’।
ताशकंद से लौटने के बाद शास्त्री की पत्नी ललिता शास्त्री ने मुझसे पूछा कि उनका शरीर नीला क्यों पड़ गया था? मैंने जवाब दिया कि जब पार्थिव शरीर पर लेप लगाया जाता है, तो।। इसके बाद उन्होंने शास्त्री के शरीर पर कुछ कटे के निशान के बारे में पूछा। इसकी जानकारी मुझे नहीं थी। लेकिन ललिता की एक बात मुझे अचंभित कर गयी कि शास्त्री का पोस्टमार्टम न तो ताशकंद में हुआ था, न दिल्ली में।
इसके कुछ दिनों बाद ललिता के गुस्सा होने का पता चला। वे इसलिए गुस्से में थीं कि शास्त्री के दो सहयोगियों ने उनकी मौत के अप्राकृतिक होने की बातवाले बयान पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था। समय गुजरने के साथ ही शास्त्री के परिवार का यह विश्वास पुख्ता होता चला गया कि उन्हें जहर दिया गया था।

किसने जहर दिलवाया ? खुद उन्ही की पार्टी कांग्रेस ने, ये बात अब पूरी दुनिया जानती है, परन्तु आज भी लोग कांग्रेस जैसी पार्टी को समर्थन देते हैं इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या हो सकती है की देश के एक ईमानदार राष्ट्रपति   जिसे सारी दुनिया अपनी सादगी के लिए जानती थी, जिसने 1961 और 1965 के भारत -पाक युद्ध में पाक को घुटनों पर ला दिया था, उसे अपनी इस देश सेवा की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी, फिर भी आप और हम जेसे लोग इस देश को बर्बाद करने में लगी इस कांग्रेस को देते हें, 
इस बार पार्टी को नही ईमानदार प्रत्याशी को वोट कीजिये चाहे वो निर्दलीय ही क्यों ना हो .............







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