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सोमवार, 10 सितंबर 2012

देश का एकमात्र प्रधानमंत्री जो अमेरिका के सामने नही झुका, और दुश्मन ''पाक'' के लाहोर तक जा घुसा, बदले में कांग्रेस ने दिया उसे जहर.....

लाल बहादुर शास्त्री जी के शासन में आज ही के दिन तिरंगा फहराया  था, भारतीय रण बांकुरों ने लाहोर में ..
जानिए शास्त्री जी के बारे में कुछ अनमोल पहलू उनके जीवन के। माँ भारती के लाल स्वर्गीये 'श्री लाल बहादुर शास्त्री जी' के बारे मे कुछ तथ्य -

1.शास्त्री जी जातिवाद के खिलाफ थे इसलिए उन्होने उनके नाम के आगे श्रीवास्तव लिखना बंद कर दिया था ।
और हम आज भी जातिवाद ( आरक्षण ) की लड़ाई लड़ रहे हें कांग्रेस की बातो में आकर ..
2.जब 1965 मे पाकिस्तान से युद्ध हुआ था, तो शास्त्री जी ने भारतीय सेना का मनोबल इतना बड़ा दिया था, की भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना को गाजर मूली की तरह काटती चली गयी थी, और पाकिस्तान का बहुत बड़ा
हिस्सा जीत लिया था ।

3.जब भारत पाकिस्तान का युद्ध चल रहा था, तो अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाने के लिए कहा था की भारत युद्ध खत्म कर दे, नहीं तो अमेरिका भारत को खाने के लिए गेहू देना बंद कर देगा। तो इसके जवाब मे शास्त्री जी ने कहा की हम स्वाभिमान से भूखे रहना पसंद करेंगे, किसी के सामने भीख मांगने की जगह । और शास्त्री जी देशवासियों से निवेदन किया की जब तक अनाज की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक सब लोग सोमवार का व्रत रखना चालू कर दे और खाना कम खाया करे ।

4.जब शास्त्री जी ताशकंद समझोते के लिए जा रहे थे, तो उनकी पत्नी के कहा की अब तो इस पुरानी फटी धोती की जगह नई धोती खरीद लीजिये। तो शास्त्री जी ने कहा इस देश मे अभी भी ऐसे बहुत से किसान है जो फटी हुई धोती पहनते है, इसलिए मै अच्छे कपडे कैसे पहन सकता हु, क्योकि मै उन गरीबो का ही नेता हूँ ,अमीरों का नहीं, और शास्त्री जी उनकी फटी पुरानी धोती को अपने हाथ से सिलकर ताशकंद समझोते के लिए गए ।

5. जब पाकिस्तान से युद्ध चल रहा था, तो शास्त्री जी ने देशवासियों से कहा की युद्ध मे बहुत रूपये खर्च हो सकते है, इसलिए सभी लोग अपने फालतू के खर्च कम कर दे, और जितना हो सके सेना को धन राशि देकर सहयोग करें । और खर्च कम करने वाली बात शास्त्री जी ने उनके खुद के दैनिक जीवन मे भी उतारी । उन्होने उनके घर के सारे काम करने वाले नौकरो को हटा दिया था और वो खुद ही उनके कपड़े धोते थे, और खुद ही उनके घर की
साफ सफाई और झाड़ू पोंछा करते थे । और आपके नेहरु जी अपने कपडे धुलवाने लन्दन भेजा करते थे,

6. शास्त्री जी दिखने मे जरूर छोटे थे पर वो सच मे बहुत बहादुर और स्वाभिमानी थे।

7. जब शास्त्री जी की मृत्यु हुई तो कुछ नीच कांग्रेसियों ने उन पर इल्ज़ाम लगाया की शास्त्री जी भ्रस्टाचारी थे,पर जांच होने के बाद पता चला की शास्त्री जी के बैंक के खाते मे मात्र 365/- रूपये थे । इससे पता चलता है
की शास्त्री जी कितने ईमानदार थे ।

8. शास्त्री जी अभी तक के एक मात्र ऐसे प्रधान मंत्री रहे हैं जिन्होंने देश के बजट मे से 25 प्रतिशत सेना के ऊपर खर्च करने का फैसला लिया था । और बाद की सरकारों ने रक्षा बजट घटा के 25 % से 9 % कर दिया हे ,शास्त्री जी हमेशा कहते थे की देश का जवान और देश का किसान देश के सबसे महत्वपूर्ण इंसान हैं, इसलिए इन्हे कोई भी तकलीफ नहीं होना चाहिए तभी शास्त्री जी ने 'जय जवान जय किसान' का नारा दिया, और आज देश के जवान और किसान इस कांग्रेस के राज में रोज आत्महत्या कर रहे हें ।

9.जब शास्त्री जी ताशकंद गए थे, तो उन्हे जहर देकर मार दिया गया था और देश मे झूठी खबर फैला दी गयी थी की शास्त्री जी की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई । और खुद कांग्रेस सरकार ने इस बात पर आज तक पर्दा डाल रखा है । न जाने कितने देशभक्तों की मौत की जिम्मेदार इस सरकार को अब भी आप वापस वोट देकर फिर किसी देशभक्त को मरवाने का मोका देंगे ?

 धन्य हैं हम और धन्य हें देश का हिन्दू की हमारी भूमि पर ऐसे स्वाभिमानी और देश भक्त इंसान ने
जन्म लिया । यह बहुत गौरव की बात है की हमे शास्त्री जी जैसे प्रधान मंत्री मिले ।

जय जवान जय किसान !

 

बुधवार, 29 अगस्त 2012

नाचने-गाने पर 17 लोगों का सिर काटा डाला ..........


talibani farman: 17 beheaded for dancing and singing अफगानिस्तान के हेलमंद प्रात में तालिबान चरमपंथियों ने नृत्य व संगीत के कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे 15 पुरुषों और दो महिलाओं का सिर कलम कर दिया।
हेलमंद प्रात के शाह करेज इलाके में सिर कलम करने की ये घटना हुई, और मारे गए सभी 17 लोग आम नागरिक थे। तालिबान चरमपंथियों ने इस घटना को 26 और 27 अगस्त के बीच की रात को अंजाम दिया। पहले नागरिकों का सिर कलम किया गया या गोली मारी गई ये अभी स्पष्ट नहीं है।
 लोग एक उत्सव मनाने के लिए जमा हुए थे और संगीत की धुन पर नाच रहे थे, जबकि तालिबान इस समारोह को रोकना चाहते थे। उन्होंने कहा कि जहा इस घटना को अंजाम दिया गया वो पूरी तरह से तालिबान चरमपंथियों के नियंत्रण वाला इलाका है, इसलिए उसके बारे में और ज्यादा जानकारी नहीं है। तालिबान ने इस घटना पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

शनिवार, 18 अगस्त 2012

क्या कभी भारत के दोगले नेता और शासक इजरायल से प्रेरणा लेंगे ?.............

क्या कभी भारत के दोगले नेता और शासक इजरायल से प्रेरणा लेंगे ?
जब फिलिस्तीनी आतंकवादियो ने 1972 के म्यूनिख ओलंपिक गेम्स विलेज में घुसकर 12 इस्राइली खिलाडियों की हत्या कर दी थी । तब तत्कालीन इस्राइली प्रधानमंत्री श्रीमती गोल्डा मायर ने कोई भी बयान नहीं दिया ... उन्होंने सरे मृत खिलाडियो के घरवालो को खुद फोन करके कहा की हम बदला लेकर रहेंगे .. उन्होंने अपनी गुप्तचर एजेंसी मोसाद को पूरी छुट दे दी, और कहा इस घटना में जितने लोग भी शामिल है, वो चाहे दुनिया के किसी भी देश में हो उनको जिन्दा नहीं रहने देना है ..

मोसाद ने पता लगा लिया की इस हत्याकांड में 14 आतंकवादी शामिल थे ..

१ - एक आतंकवादी सलाह खलिफ जेदाह में अपने परिवार के साथ रहता था । मोसाद ने उसके घर में रखे टेबल जिस पर फ़ोन रखा था, ठीक वैसा ही टेबल रख दिया और टेबल के अन्दर बम फिट करके उसका कनेक्शन फोन से जोड़ दिया, फिर उसके फोन की घंटी बजी उसने जैसे ही फोन उठाया उसके चीथड़े उड़ गए ..

2 - एक आतंकवादी अबू दयुद बेरुत में छुपा था .. मोसाद ने उसकी पूरी दिनचर्या पर नज़र रखी । वो एक क्लब में रोज जाता था । इजराइल ने अपने खतरनाक कमांडो को बेरुत भेजा, जिसमे सिर्फ 3 लोग थे, एक कमांडो बेंजामिन नेतान्याहू [जो बाद में इसराइल के राष्ट्रपति बने ] एक ख़ूबसूरत लड़की का भेष रखकर उस क्लब में नाच रहे थे जैसे ही वो आतंकवादी उनके करीब नाचने के लिए आया, बेंजामिन ने अपनी फुल्ली औटोमटिक गन से गोलियों की बौछार कर दी 15 लोग मरे गए, और बेंजामिन और उनका साथी जो उनको कवर कर रहा था लेबनानी पुलिस के नकली गाड़ी में फरार हो गए।

3 - एक आतंकवादी अमिन अल हिंदी को मोसाद ने अम्मान में उसके बिल्डिंग के नीचे गोलियों से भुन दिया ..

4 - अब बाक़ी बचे आतंकवादियो ने डरकर आत्मसमर्पण करने का प्रस्ताव भेजा। लेकिन गोल्डा मायर ने कुछ नहीं बोला चौथे आतंकवादी अबू फयाज, जो छुप कर हेलसिंकी में रहता था, उसे कार से कुचल कर मार दिया गया ।
5 -पाचवे आतंकवादी अली हसन सलामेह जो पेरिस में छुपा था, वही उसको साइनाइड जहर देकर मार दिया गया ।
6 - महमूद हम्शारी को दमिस्क में गोली मारी गयी ।

इस तरह गोल्डा मायर ने एक एक को चुन चुन कर पूरी दुनिया में मारा ।

में सलाम करता हूँ, ऐसे देश के जज्बे को .. जहा के नागरिक हमेशा अपना सर उठा के चलते है.........
और साथ ही शर्म महसूस करता हूँ अपने देश के नेताओ पर, यहाँ के सिस्टम पर और साथ ही इन्हें बर्दाश्त करती और इन्हें कोई सबक नही सिखाने वाली आम जनता पर................

शनिवार, 11 अगस्त 2012

ये तस्वीरे हें आसाम के हिन्दुओ की ओरतो की, जिसे ये भांड मिडिया नही दिखा रहा हें, जो सेकुलर होने का दम भरते हें वो पहले देखे....

अब भी नही संभले तो थोड़े टाइम बाद आपकी बीवी आपकी बेटी और आपकी बहन और माँ के साथ भी पहले ये 30 - 40  मुल्ले बलात्कार करेंगे, जेसा इन दोनों के साथ किया, फिर इन्ही दोनों ओरतो की तरह ही टुकड़े टुकड़े करेंगे, और वो भी आपके सामने, लेकिन फिर भी आप सब इन मुल्लो को अपना भाई मानना, क्यों ? आप तो सेकुलर हो ना, अपनी परिवार की ओरतो माँ बहन, बेटी और बीवी को इनसे  *#%#**~#** अपनी आँखों के सामने .......please shyer this link...... 

शुक्रवार, 3 अगस्त 2012

कब तक सोयेंगा हिन्दू ? कब तक ? आज बारी इनकी थी, कल बारी हमारी होगी..........

यह तस्वीर है कश्मीर के एक हिन्दू महिला की जिसकी शादी को महज 4 महीने हुए थे और कुछ अलगाववादियों ने उसके घर में घुसकर उसके पति को अधमरा कर उसकी पत्नी के साथ लगभग 22 से 23 लोगो ने बलात्कार किया और उसके गुप्तांग में लोहे का सलिया डालकर उसकी गर्भ पेशी को बाहर निकला गया पर उसका पति कुछ नहीं कर सका और फिर पति के सामने उसे जिन्दा जला दिया और उसके बाद उसका पति जो सर के बीचो बीच टिका लगता था , उसके सर में लोहे की कील थोक दी गयी क्योंकि उसके मौत के बाद भी उसके सर में से 2 दिनों तक खून निकल रहा था |  
दोस्तों यह कोई झूठी कहानी नहीं है यह कश्मीर में हिन्दुओ पर किये गए जुल्मो की असली कहानी है । जरा इससे कुछ सीखो क्योंकि शायद कल यह घर हमारा और आपका भी हो सकता है और यह औरत हमारी और आपकी माँ , बेटी , बहु कोई भी हो सकती है !! इसलिए उठो जागो और समझो , अगर भारत के रक्षण के लिए नहीं तो अपने घर और अपनों के लिए ही जागो और अपने घर का रक्षण तो करो भाइयो और बहनों !! 

शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

देश के प्रथम राष्ट्रपति लाल बहादुर शास्त्री की हत्या के जिम्मेदार जिन्हें कोई पहचाना नही .........

Photo: कुलदीप नैयर की आत्मकथा में कई अहम खुलासे

लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मौत के बारे में भी नैयर ने अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला है। वे लिखते हैं कि उस रात मैं लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु का सपना देख रहा था। तभी दरवाजे पर हुई दस्तक से मैं जागा। गलियारे में खड़ी एक महिला ने कहा, ‘आपके प्रधानमंत्री मर रहे हैं।’ मैं हड़बड़ी में एक भारतीय अधिकारी के साथ कुछ ही दूरी पर स्थित शास्त्री जी के कमरे की ओर दौरा। पता चला, शास्त्री नहीं रहे। शास्त्री जी का कमरा काफी बड़ा था। उनका बेड भी। उनके चप्पल कारपेट पर सही तरीके से रखे थे।

कमरे के एक कोने में ड्रेसिंग टेबल पर थर्मस लुढ़का पड़ा था। आधिकारिक फोटोग्राफर और मैंने शास्त्री के पार्थिव शरीर पर तिरंगा ओढ़ा दिया और श्रद्धांजलि के साथ कुछ फूल चढ़ाये। बाद में मैंने जो खबर जुटायी, उसके अनुसार, शास्त्री जी 10 बजे रात अपने कमरे में आये। इसके बाद उन्होंने अपने निजी सेवादार रामनाथ को भोजन लाने को कहा। उनका भोजन राजदूत टीएन कौल के घर से आता था, जिसे खानसामा जान मोहम्मद पकाता था। खाने के बाद शास्त्री ने रामनाथ से कहा कि काबुल जाने के लिए सुबह जल्दी उठना है।

ताशकंद के समयानुसार, रात 1.20 बजे शास्त्री के सहयोगी सामान बांधने में लगे थे। तभी जगन्नाथ सहाय (शास्त्री के निजी सचिव) के कमरे के दरवाजे तक जाकर परेशान हालत में शास्त्री ने पूछा,’डाक्टर साहब कहां हैं?’ तब सहयोगियों ने उन्हें पानी पिलाया और सहयोगियों के सहारे अपने कमरे के बेड पर लेट गये। इसके बाद उन्होंने अपनी छाती पर हाथ फेरा और अचेत हो गये।

पाकिस्तान के जनरल अयूब मौके पर चार बजे सुबह पहुंचे और शास्त्री की मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया। अयूब ने पाकिस्तान के विदेश सचिव अजीज अहमद को इसकी जानकारी जुल्फिकार अली भुट्टो को देने को कहा। भुट्टो ने मौत शब्द सुनते ही पूछा,’वह दो कमीने कौन!’।

ताशकंद से लौटने के बाद शास्त्री की पत्नी ललिता शास्त्री ने मुझसे पूछा कि उनका शरीर नीला क्यों पड़ गया था? मैंने जवाब दिया कि जब पार्थिव शरीर पर लेप लगाया जाता है, तो।। इसके बाद उन्होंने शास्त्री के शरीर पर कुछ कटे के निशान के बारे में पूछा। इसकी जानकारी मुझे नहीं थी। लेकिन ललिता की एक बात मुझे अचंभित कर गयी कि शास्त्री का पोस्टमार्टम न तो ताशकंद में हुआ था, न दिल्ली में।

इसके कुछ दिनों बाद ललिता के गुस्सा होने का पता चला। वे इसलिए गुस्से में थीं कि शास्त्री के दो सहयोगियों ने उनकी मौत के अप्राकृतिक होने की बातवाले बयान पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था। समय गुजरने के साथ ही शास्त्री के परिवार का यह विश्वास पुख्ता होता चला गया कि उन्हें जहर दिया गया था।

किसने जहर दिलवाया, ये अब पूरी दुनिया जानती है, परन्तु आज भी लोग कांग्रेस जैसी पार्टी को समर्थन देते हैं इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या हो सकती है?
कुलदीप नैयर की आत्मकथा में कई अहम खुलासे,
लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मौत के बारे में भी नैयर ने अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला है। वे लिखते हैं कि उस रात मैं लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु का सपना देख रहा था। तभी दरवाजे पर हुई दस्तक से मैं जागा। गलियारे में खड़ी एक महिला ने कहा, ‘आपके प्रधानमंत्री मर रहे हैं।’