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शनिवार, 15 सितंबर 2012

देश में शिव जी के 12 ज्योतिर्लिंग थे,11 तो हें 12 वाँ कहाँ गया ? जाने पूरी हकीकत.........

भारत में 12 ज्योतिर्लिंग थे 11 का सब को पता हें 12 व कहा गया ? आपको पता हें ? चलो में बताता हूँ 12 वे ज्योतिर्लिंग का नाम हे अग्रेश्वर महादेव जो की आगरा में स्थित था|  अब आप कहेंगे की आगरा में आज की तारीख में तो कोई शिव जी का ज्योतिर्लिंग नही हें ? किसी जमाने में, जिसे आज सब ताज महल कहते हें, वो शिवालय हुआ करता था |जिसे शाहजहाँ ने अपनी पत्नी या कहे की बच्चे पैदा करने की मशीन मुमताज की लाश को दफ़न करने के लिए जबरदस्ती छीन लिया था | पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट पढ़े और अगर आप की रगों में हिन्दू का खून हें, तो ज्यादा से ज्यादा शेयर जरुर करे......
>प्रो. ओक कि खोज ताजमहल के नाम से प्रारम्भ होती है———
=”महल” शब्द, अफगानिस्तान से लेकर अल्जीरिया तक किसी भी मुस्लिम देश में भवनों के लिए प्रयोग नही किया जाता…
यहाँ यह व्याख्या करना कि, महल शब्द मुमताज महल से लिया गया है……वह कम से कम दो प्रकार से तर्कहीन है-
पहला - शाहजहाँ कि पत्नी का नाम मुमताज महल कभी नही था, बल्कि उसका नाम मुमताज-उल-ज़मानी था ।
और दूसरा - किसी भवन का नामकरण किसी महिला के नाम के आधार पर रखने के लिए केवल अन्तिम आधे भाग (ताज)का ही प्रयोग किया जाए और प्रथम अर्ध भाग (मुम) को छोड़ दिया जाए, यह समझ से परे है ।
प्रो.ओक दावा करते हैं कि,ताजमहल नाम तेजो महालय (भगवान शिव का महल) का बिगड़ा हुआ संस्करण है, साथ ही साथ ओक कहते हैं कि -
मुमताज और शाहजहाँ कि प्रेम कहानी, चापलूस इतिहासकारों की भयंकर भूल और लापरवाह पुरातत्वविदों की सफ़ाई से, स्वयं गढ़ी गई कोरी अफवाह मात्र है, क्योंकि अगर इसमे थोड़ी भी सच्चाई होती तो शाहजहाँ के समय का कम से कम एक शासकीय अभिलेख इस प्रेम कहानी की पुष्टि कही ना कही जरुर करता है…..
इसके अतिरिक्त बहुत से प्रमाण ओक के कथन का प्रत्यक्षतः समर्थन कर रहे हैं……
तेजो महालय (ताजमहल) मुग़ल बादशाह के युग से पहले बना था, और यह भगवान् शिव को समर्पित था तथा आगरा के राजपूतों द्वारा पूजा जाता था ।
==>न्यूयार्क के पुरातत्वविद प्रो. मर्विन मिलर ने ताज के यमुना की तरफ़ के दरवाजे की लकड़ी की कार्बन डेटिंग के आधार पर 1985 में यह सिद्ध किया कि, यह दरवाजा सन् 1359 के आसपास अर्थात् शाहजहाँ के काल से लगभग 300 वर्ष पुराना है ।
==>मुमताज कि मृत्यु जिस वर्ष (1631) में हुई थी, उसी वर्ष के अंग्रेज भ्रमण कर्ता पीटर मुंडी का लेख भी इसका समर्थन करता है कि, ताजमहल मुग़ल बादशाह के पहले का एक अति महत्वपूर्ण भवन था ।
==>यूरोपियन यात्री जॉन अल्बर्ट मैनडेल्स्लो ने सन् 1638 (मुमताज कि मृत्यु के 07 साल बाद) में आगरा भ्रमण किया, और इस शहर के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत का वर्णन किया, परन्तु उसने ताज के बनने का कोई भी सन्दर्भ नही प्रस्तुत किया, जबकि भ्रांतियों मे यह कहा जाता है कि ताज का निर्माण कार्य 1631 से 1651 तक जोर शोर से चल रहा था ।
==>फ्रांसीसी यात्री फविक्स बर्निअर एम.डी. जो औरंगजेब द्वारा गद्दीनशीन होने के समय भारत आया था, और लगभग दस साल यहाँ रहा, के लिखित विवरण से पता चलता है कि, औरंगजेब के शासन के समय यह झूठ फैलाया जाना शुरू किया गया कि, ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था…….
प्रो. ओक. बहुत सी आकृतियों और शिल्प सम्बन्धी असंगताओं को इंगित करते हैं जो इस विश्वास का समर्थन करते हैं कि, ताजमहल विशाल मकबरा न होकर विशेषतः हिंदू शिव मन्दिर है…….
आज भी ताजमहल के बहुत से कमरे शाहजहाँ के काल से बंद पड़े हैं, जो आम जनता की पहुँच से परे हैं। प्रो. ओक जोर देकर कहते हैं कि, हिंदू मंदिरों में ही पूजा एवं धार्मिक संस्कारों के लिए भगवान् शिव की मूर्ति, त्रिशूल,कलश और ॐ आदि वस्तुएं प्रयोग की जाती हैं।
==>ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद बूँद कर पानी टपकता रहता है, यदि यह सत्य है तो पूरे विश्व मे किसी कि भी कब्र पर बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता, जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद बूँद कर पानी टपकाने की व्यवस्था की जाती है, फ़िर ताजमहल (मकबरे) में बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब….????
राजनीतिक भर्त्सना के डर से इंदिरा गाँधी सरकार ने ओक की सभी पुस्तकें स्टोर्स से वापस ले लीं थीं, और इन पुस्तकों के प्रथम संस्करण को छापने वाले संपादकों को भयंकर परिणाम भुगत लेने की धमकियां भी दी गईं थी ।
प्रो. पी. एन. ओक के अनुसंधान को ग़लत या सिद्ध करने का केवल एक ही रास्ता है, कि वर्तमान केन्द्र सरकार बंद कमरों को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षण में खुलवाए, और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को छानबीन करने दे ।
ज़रा सोचिये….!!!!!!
कि यदि ओक का अनुसंधान पूर्णतयः सत्य है तो किसी देशी राजा के बनवाए गए संगमरमरी आकर्षण वाले खूबसूरत, शानदार एवं विश्व के महान आश्चर्यों में से एक भवन, “तेजो महालय” को बनवाने का श्रेय बाहर से आए मुग़ल बादशाह शाहजहाँ को क्यों……?????
तथा -
इससे जुड़ी तमाम यादों का सम्बन्ध मुमताज-उल-ज़मानी से क्यों……..??????? ताजमहल के बारे में ये लाइने बिलकुल सटीक बैठती हें--
आंसू टपक रहे हैं, हवेली के बाम से,
रूहें लिपट के रोती हैं, हर खासों आम से,
अपनों ने बुना था हमें, कुदरत के काम से,
फ़िर भी यहाँ जिंदा हैं, हम गैरों के नाम से,

शुक्रवार, 14 सितंबर 2012

मानव को सभी इच्छित फल प्रदान करने वाले प्रमुख अवतार .......

शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव के दस प्रमुख अवतार ।
यह दस अवतार इस प्रकार है, जो मानव को सभी इच्छित फल प्रदान करने वाले हैं-
 
1. महाकाल- शिव के दस प्रमुख अवतारों में पहला अवतार महाकाल नाम से विख्यात हैं। भगवान शिव का महाकाल स्वरुप अपने भक्तों को भोग और मोक्ष प्रदान करने वाला परम कल्याणी हैं। इस अवतार की शक्ति मां महाकाली मानी जाती हैं।
2. तार- भगवान शिव का तार स्वरुप अपने भक्तों को भुक्ति-मुक्ति, दोनों फल प्रदान करने वाला हैं। इस अवतार की शक्ति तारादेवी मानी जाती हैं।
3. बाल भुवनेश- भगवान शिव का बाल भुवनेश स्वरुप अपने भक्तों को सुख, समृद्धि और शांति प्रदान करने वाला हैं। इस अवतार की शक्ति को बाला भुवनेशी माना जाता हैं।
4.षोडश श्रीविद्येश- भगवान शिव का षोडश श्रीविद्येश स्वरुप अपने भक्तों को सुख, भोग और मोक्ष प्रदान करने वाला हैं। इस अवतार की शक्ति को देवी षोडशी श्रीविद्या माना जाता हैं।
5. भैरव- भगवान शिव का भैरव स्वरुप अपने भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करने वाला हैं। इस अवतार की शक्ति भैरवी गिरिजा मानी जाती हैं।
6. छिन्नमस्तक- भगवान शिव का छिन्नमस्तक स्वरुप अपने भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला हैं। इस अवतार की शक्ति देवी छिन्नमस्ता मानी जाती हैं।
7. धूमवान- भगवान शिव का धूमवान स्वरुप अपने भक्तों की सभी प्रकार से श्रेष्ठ फल देने वाला हैं। इस अवतार की शक्ति को देवी धूमावती माना जाता हैं।
8. बगलामुख-  भगवान शिव का बगलामुख स्वरुप अपने भक्तों को परम आनंद प्रदान करने वाला हैं। इस अवतार की शक्ति को देवी बगलामुखी माना जाता हैं।
9. मातंग-  भगवान शिव का मातंग स्वरुप अपने भक्तों की समस्त अभिलाषाओं को पूर्ण करने वाला हैं। इस अवतार की शक्ति को देवी मातंगी माना जाता हैं।
10. कमल-  भगवान शिव का कमल स्वरुप अपने भक्तों को भुक्ति और मुक्ति प्रदान करने वाला हैं। इस अवतार की शक्ति को देवी कमला माना जाता हैं।
विद्वानो के मत से उक्त शिव के सभी प्रमुख अवतार व्यक्ति को सुख, समृद्धि, भोग, मोक्ष प्रदान करने वाले एवं व्यक्ति की रक्षा करने वाले हैं।

मंगलवार, 4 सितंबर 2012

विदेशियों ने भी माना लोहा वेदों का, वेद ज्ञान को आधार मान, ध्वनि पर आधारित ''डिवाइस'' का आविष्कार किया......

Photo: वेद ज्ञान को आधार मान कर न्यूलैंड के एक वैज्ञानिक स्टेन क्रो ने एक डिवाइस विकसित कर लिया। ध्वनि पर आधारित इस डिवाइस से मोबाइल की बैटरी चार्ज हो जाती है। इस बिजली की आवश्यकता नहीं होती है।
भारत के वरिष्ठ अंतरिक्ष वैज्ञानिक ओमप्रकाश पांडे ने वेदों में निहित ज्ञान पर प्रकाश डालते हुए दैनिक भास्कर प्रतिनिधि से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस डिवाइस का नाम भी ओम डिवाइस रखा गया है।

उन्हो
ंने कहा कि संस्कृत को अपौरुष भाषा इसलिए कहा जाता है कि इसकी रचना ब्रह्मांड की ध्

वनियों से हुई है।
उन्होंने बताया कि गति सर्वत्र है। चाहे वस्तु स्थिर हो या गतिमान। गति होगी तो ध्वनि निकलेगी। ध्वनि होगी तो शब्द निकलेगा। सौर परिवार के प्रमुख सूर्य के एक ओर से नौ रश्मियां निकलती हैं और ये चारों और से अलग-अलग निकलती है। इस तरह कुल 36 रश्मियां हो गई। इन 36 रश्मियों के ध्वनियों पर संस्कृत के 36 स्वर बने। इस तरह सूर्य की जब नौ रश्मियां पृथ्वी पर आती है तो उनका पृथ्वी के आठ बसुओं से टक्कर होती है। सूर्य की नौ रश्मियां और पृथ्वी के आठ बसुओं की आपस में टकराने से जो 72 प्रकार की ध्वनियां उत्पन्न हुई वे संस्कृत के 72 व्यंजन बन गई। इस प्रकार ब्रह्मांड में निकलने वाली कुल 108 ध्वनियां पर संस्कृत की वर्ण माला आधारित है।

उन्होंने बताया कि ब्रह्मांड की ध्वनियों के रहस्य के बारे में वेदों से ही जानकारी मिलती है। इन ध्वनियों को नासा ने भी माना है। इसलिए यह बात साबित होती है कि वैदिक काल में ब्रह्मांड में होने वाली ध्वनियों का ज्ञान ऋषियों को था।

http://www.bhaskar.com/article/RAJ-OTH-1808378-2832236.htmlवेद ज्ञान को आधार मान कर न्यूलैंड के एक वैज्ञानिक ''स्टेन क्रो'' ने एक डिवाइस विकसित कर लिया। ध्वनि पर आधारित इस डिवाइस से मोबाइल की बैटरी चार्ज हो जाती है। इस बिजली की आवश्यकता नहीं होती है।
भारत के वरिष्ठ अंतरिक्ष वैज्ञानिक ओमप्रकाश पांडे ने वेदों में निहित ज्ञान पर प्रकाश डालते हुए बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस डिवाइस का नाम भी ओम डिवाइस रखा गया है।

उन्होने कहा कि संस्कृत को अपौरुष भाषा इसलिए कहा जाता है कि इसकी रचना ब्रह्मांड की ध्वनियों से हुई है।
  पांडे कि गति सर्वत्र है। चाहे वस्तु स्थिर हो या गतिमान। गति होगी तो ध्वनि निकलेगी। ध्वनि होगी, तो शब्द निकलेगा। सौर परिवार के प्रमुख सूर्य के एक ओर से नौ रश्मियां निकलती हैं, और ये चारों और से अलग-अलग निकलती है। इस तरह कुल 36 रश्मियां हो गई। इन 36 रश्मियों के ध्वनियों पर संस्कृत के 36 स्वर बने। इस तरह सूर्य की जब नौ रश्मियां पृथ्वी पर आती है, तो उनका पृथ्वी के आठ बसुओं से टक्कर होती है। सूर्य की नौ रश्मियां और पृथ्वी के आठ बसुओं की आपस में टकराने से जो 72 प्रकार की ध्वनियां उत्पन्न हुई वे संस्कृत के 72 व्यंजन बन गई। इस प्रकार ब्रह्मांड में निकलने वाली कुल 108 ध्वनियां पर संस्कृत की वर्ण माला आधारित है।
ब्रह्मांड की ध्वनियों के रहस्य के बारे में वेदों से ही जानकारी मिलती है। इन ध्वनियों को ''नासा'' ने भी माना है। इसलिए यह बात साबित होती है, कि वैदिक काल में ब्रह्मांड में होने वाली ध्वनियों का ज्ञान ऋषियों को था।
 

सोमवार, 3 सितंबर 2012

कांग्रेस की हकीकत, खुलेआम दंगे करवाने वाले कांग्रेसी आज भी पहुंच से दूर........

आज एक सवाल उन सभी कांग्रेसियों और सेकुलर के ठेकेदारों से...
कोई मुझे इतना बता दे कि जब इंदिरा गाँधी की हत्या हुयी तब सिक्खों पर उन्होंने कहर ढा दिया ,,,खुलेआम सिक्खो का कत्ल हुआ ,, उन्हें जिंदा जलाया गया, उनकी बहू बेटियों की आबरू लूटी गयी, उनके घरों से माल असबाब की लूट खसोट का खुला ओलम्पिक गेम चला....
मगर कश्मीर, मथुरा, बरेली, असम, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, इलाहाबाद, कानपुर में जो मासूम मरे, उसके बदले में कांग्रेसियों ने क्या किया ? तब कहाँ चली गयी थी कांग्रेसियों, तुम्हारी मर्दानगी ? क्या वों तुम्हारे भाई बन्धु नही थे ?क्या वों हिंदुस्तान की मिट्टी के नही थे ? चलो छोडो ये बताओ कि जब संसद में हमला हुआ, दिल्ली में कनाट प्लेस और रीगल सिनेमा पर हमला हुआ, तब कहाँ थे तुम लोग ? चलो छोड़ो ये बताओ कि जब मुंबई में हमला हुआ तब कहाँ ठंडा हो गया था तुम्हारे खून का उबाल ?
अबे सिर्फ इन नकली गांधियो के लिए ही तुम्हारा खून खोलता हैं ?

मतलब ये हुआ कि चाहे भारत की अस्मिता पर हमला हो जाए ? चाहे तुम्हारे परिवार के लोगो पर हमला हो जाये, तुम सिर्फ इन नकली गांधियो के लिए ही भौकोगे, जैसे मोदी जी पर भौक रहे हो ? कभी गोधरा को लेकर तों कभी नरौदा को लेकर ? कभी दो शब्द उनके लिए भी कह दो जो शहीद हो गए तुम्हारे इन गांधियो की वजह से ? क्योकि तुम्हारा अठ्ठा, मुल्ले का पठ्ठा राहुल गाँधी कहता हैं कि आतंकी हमले नही रोके जा सकते ? तों कैसे निभाएगा बड़ी जिम्मेदारी ? क्यों बे ? कैसे निभाएगा ?

क्या करू, गुस्सा बहुत आता हैं, और चाहता हूँ कि सारी सीने की आग निकाल कर रख दूँ .....
खैर, मेरा एक प्रश्न अपने सिक्ख भाइयो से भी हैं कि इस काले कोयले प्रधानमंत्री को सिक्ख बिरादरी में रहने का वाकई अधिकार हैं ? क्या १९८४ के दंगे में मनमोहन के हाथ और कपडो पर सिक्खो के ही खून के छीटे नही हैं ? कहाँ हैं वों इन्साफ की देवी जिसने माया कोडनानी और बाबू बजरंगी को तों जेल की सलाखों में पहुँचा दिया, मगर अफजल और कसाब को ये सोनिया अपनी छाती से लगाकर स्तनपान करा रही हैं? कहाँ हैं वों नौटंकी (सोनिया ) जो अपने पति की लाश पर दो आँसू ना बहा सकी, मगर इन मुल्लो की छाती पर फूट फूट कर रोती हैं....

ये सेकुलरवाद और हिन्दुओ की निष्क्रियता हिंदुस्तान को एक दिन ऐसे गर्त के सागर में ले जाकर डुबो देगा, जहाँ से सिर्फ और सिर्फ मुगलिस्तान के नारे सुनाई देंगे ..
वन्देमातरम 

बुधवार, 29 अगस्त 2012

नाचने-गाने पर 17 लोगों का सिर काटा डाला ..........


talibani farman: 17 beheaded for dancing and singing अफगानिस्तान के हेलमंद प्रात में तालिबान चरमपंथियों ने नृत्य व संगीत के कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे 15 पुरुषों और दो महिलाओं का सिर कलम कर दिया।
हेलमंद प्रात के शाह करेज इलाके में सिर कलम करने की ये घटना हुई, और मारे गए सभी 17 लोग आम नागरिक थे। तालिबान चरमपंथियों ने इस घटना को 26 और 27 अगस्त के बीच की रात को अंजाम दिया। पहले नागरिकों का सिर कलम किया गया या गोली मारी गई ये अभी स्पष्ट नहीं है।
 लोग एक उत्सव मनाने के लिए जमा हुए थे और संगीत की धुन पर नाच रहे थे, जबकि तालिबान इस समारोह को रोकना चाहते थे। उन्होंने कहा कि जहा इस घटना को अंजाम दिया गया वो पूरी तरह से तालिबान चरमपंथियों के नियंत्रण वाला इलाका है, इसलिए उसके बारे में और ज्यादा जानकारी नहीं है। तालिबान ने इस घटना पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

शनिवार, 18 अगस्त 2012

लखनऊ में पार्क में हिन्दू महिलाओं के कपड़े फाड़े, बुद्ध की मूर्ति तोड़ी असम मामले को लेकर....


पुलिस सुरक्षा में दंगे करते मुस्लिम 
पुलिस सुरक्षा में दंगे करते मुस्लिम उत्तर प्रदेश में ।
असम और म्यांमार की हिंसा में अल्पसंख्यकों पर हुए असर के विरोध में शुक्रवार को नमाज के बाद उत्तर प्रदेश में लखनऊ, कानपुर और इलाहाबाद में मुस्लिम हिंसक हो उठे। इस दौरान ना बीमार की परवाह की गई, और न बच्चों की। न महिलाओं को देखा गया और न अपाहिज को। बेतहाशा ईंट-पत्थर बरसाए गए हिन्दुओ के घरो पर और उनकी दुकानों में लूटपाट की गई। लखनऊ में बुद्ध पार्क घूमने गई हिन्दू महिलाओं को घेरकर उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। मुंबई में हुए हिंसक विरोध से कोई सबक न लेते हुए सुस्त पुलिस तंत्र ''मुल्ला''यम के पालतू कुत्तो असाउदिन ओवेसी और आज़म खान के दबाव के कारण तब सक्रिय हुआ, जब तमाम हिन्दू निर्दोष घायल हो चुके थे, और उनकी संपत्ति का भारी नुकसान हो चुका था।
 लखनऊ में दोपहर बाद पक्का पुल से शुरू अराजकता विधान भवन के सामने तक पहुंच गई। यहां टीलेवाली मस्जिद व आसफी इमामबाड़े में नमाज के बाद मुस्लिमो लोगों ने विधान भवन की ओर कूच कर दिया, और वहां तोड़फोड़ की। अधिकारी जब तक माजरा समझ पाते तब तक करीब एक हजार प्रदर्शनकारी गौतम बुद्ध पार्क पहुंच गए। कुछ ने पार्क की रेलिंग तोड़नी शुरू की तो कुछ ने स्वतंत्रता दिवस पर लगाई झालरों को नोच डाला। इसके बाद सैकड़ों लोग पार्क में कूद गए और टिकट खिड़की पर तोड़फोड़ कर पार्क में मौजूद पुरुषों, महिलाओं और कर्मचारियों को पीटने लगे। लोगो ने महिलाओ से पहले नाम पूछे, और हिन्दू नाम बताते ही इन्हें घेर कर सभी महिला पर्यटकों के कपड़े भी फाड़ दिए, उन्हें नग्न कर दिया।
 इस दौरान कई गाड़ियां तोड़ी गईं। पार्क में लगभग सब-कुछ तहस नहस कर डाला। पार्क में लगी गौतम बुद्ध की मूर्ति भी क्षतिग्रस्त कर दी गयी। आसपास की हिन्दुओ की दुकानें तोड़ीं और सामान लूट लिया। इसके बाद उपद्रवी कन्वेंशन सेंटर मोड़ पर पहुंचे और बसों व गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इन वाहनों में सवार लोगों से भी अभद्रता की गई। शायद उत्तर प्रदेश के हिन्दुओ को अक्ल आ गयी होगी, के समाजवादी पार्टी ?केसे हिन्दू समाज के लिए खतरा बन गयी, केसे ''मुल्ला''यम उनके लिए ''यम'' बन गया हें।

गुरुवार, 26 जुलाई 2012

मुसलमान खुद बोल रहे है की काबा हिन्दू मंदिर था बहा पर यज्ञ होते थे.......



अब हम कुछ नहीं कह रहे है मुसलमान खुद बोल रहे है की काबा हिन्दू मंदिर था बहा पर यज्ञ होते थे .... श्री राम जी वह पर राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए मक्का (काबा ) गए थे अनवर जमाल भी येही बोल रहा है की कुरान में वेदों का ज्ञान है और उनके बारे में बोला गया है ..लेकिन बो अपनी संकिन बुद्धि का प्रयोग करके मुहम्मद को विष्णु अबतार बताने में लगा है जब की ये गलत है ये वेदों में भी सिद्ध है की मुहम्मद शैतान था .... और ये जो पद चिन्ह है ये श्री राम या वावन अवतार के हो सकते है क्युकि इस्लाम में तो पद चिन्ह की पूजा निषेद है और आप खुद देख सकते है चित्र में की पदचिन्ह पर चन्दन , रोली से पूजा होती है और चिन्ह के ऊपर घंटी नुमा भी लग रहा है जो इस्लाम के खिलाफ है .......
 हिंदुस्तान से भी लोग वहां जाते थे। मक्का को भारतीय लोग मख के नाम से जानते हैं। यज्ञ के पर्यायवाची के तौर पर ‘मख‘ शब्द भी बोला जाता है जैसा कि तुलसीदास ने विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा हेतु श्री रामचंद्र जी के जाने का वर्णन करते हुए कहा है कि
 *प्रात कहा मुनि सन रघुराई। निर्भय जग्य करहु तुम्ह जाई॥
होम करन लागे मुनि झारी। आपु रहे मख कीं रखवारी॥1॥
 भावार्थ:-सबेरे श्री रघुनाथजी ने मुनि से कहा- आप जाकर निडर होकर यज्ञ कीजिए। यह सुनकर सब मुनि हवन करने लगे। आप (श्री रामजी) यज्ञ की रखवाली पर रहे॥1॥
'मख‘ शब्द वेदों में भी आया है और मक्का के अर्थों में ही आया है। यज्ञ को यज भी कहा जाता है। दरअस्ल यज और हज एक ही बात है, बस भाषा का अंतर है। पहले यज नमस्कार योग के रूप में किया जाता था और पशु की बलि दी जाती थी। काबा की परिक्रमा भी की जाती थी। बाद में यज का स्वरूप बदलता चला गया। हज में आज भी परिक्रमा, नमाज़ और पशुबलि यही सब किया जाता है और दो बिना सिले वस्त्र पहने जाते हैं जो कि आज भी हिंदुओं के धार्मिक गुरू पहनते हैं।
 क़ुरआन ने यह भी बताया है कि मक्का का पुराना नाम बक्का है ,
 - अनवर जमाल
 डा. श्याम गुप्त said.............
 ---मक्का निश्चय ही ’मख’ का अपभ्रन्श रूप होसकता है....अति-पुरा काल में सारा अरब प्रदेश, अफ़्रीका, तिब्बत , साइबेरिया , एशिया एक ही भूखन्ड था..जन्बू द्वीप या भरत खन्ड...भारत...अत:भारत का उत्तर-पश्चिमी भाग ... अरबप्रदेश वाला भारतीय भूभाग मानव का प्रथम पालना रहा होगा जहां से मानव इतिहास की प्रथम सन्स्क्रिति व प्रथम यग्य प्रारम्भ हुई होगी ..शायद जल-प्रलय से पहले ..
 "मरूतगण का अर्थ मरूस्थलवासी है।"---सही नही है ...मरुत..वायुदेव को कहते हैं..मरुतगण का वायु देव की सेना ..जिसमें मेघ,वर्षा आदि भी सम्मिलित हैं...
 --वैदिक युग में यग्य में पशु बलि नहीं दी जाती थी ...बाद में असन्स्कारित, अवैदिक सन्स्क्रिति के लोगों ने यह पशु वध आदि अरम्भ्य किया होगा.


शनिवार, 30 जून 2012

महात्मा गाँधी की असली हकीकत जानिए, की कितना धर्मनिरपेक्ष था ये इंसान...........

एक बार एक वाल्मीकि बस्ती में मंदिर में महात्मा गाँधी मुसलमानों की कुरान का पाठ करा रहे थे. तभी भीड़ में से एक औरत ने उठकर गाँधी से ऐसा करने को मना किया.
गाँधी ने पूछा .. क्यों?
तब उस औरत ने कहा कि ये हमारे धर्म के विरुद्ध है.
गाँधी ने कहा.... मै तो ऐसा नहीं मानता ,
तो उस औरत ने जवाब दिया कि हम आपको धर्म में व्यवस्था देने योग्य नहीं मानते.
... गाँधी ने कहा कि इसमें यहाँ उपस्थित लोगों का मत ले लिया जाय.
औरत ने जवाब दिया कि क्या धर्म के विषय में वोटो से निर्णय लिया जा सकता है.
गाँधी बोला कि आप मेरे धर्ममें बांधा डाल रही हैं.
औरत ने जवाब दिया कि आप तो करोडो हिन्दुओ