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शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

हाफिज सईद के बेटे पर अमेरिका ने लगाया प्रतिबंध, पाक ने भारत से कहा ''हाफिज को ऑन द स्पोट पकडे तभी मानेंगे उसे आतंकवादी'' ....


America put ban on hafiz saeed's son अमेरिका ने गुरुवार को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आठ शीर्ष कमांडरों के खिलाफ प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें वर्ष 2008 में 26/11 को हुए मुंबई हमले के मास्टर माइंड साजिद मीर और लश्कर के संस्थापक हाफिज सईद का बेटा ताल्हा सईद भी शामिल हैं। भारत ने अमेरिका के इस कदम का स्वागत किया है। बस एक कमी रही मनमोहन जी मिठाई लेकर पहुचे नही ।
प्रतिबंध की घोषणा करते हुए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कहा है कि लश्कर-ए-तैयबा को वर्ष 2002 के जनवरी में एक विदेशी आतंकी संगठन कहा जाता था, इसके बावजूद इसका पाकिस्तान में और पूरे क्षेत्र में संचालन जारी है, और यह दुनियाभर में आतंकी गतिविधियों में लगा है। लश्कर ने पाकिस्तान, भारत, अफगानिस्तान और अमेरिकी हितों के खिलाफ बड़ी संख्या में आतंकी कार्य किए हैं। यह आतंकी 26/11 के मुंबई हमले के लिए भी जिम्मेदार है, जिसमें छह अमेरिकी सहित 160 से अधिक लोग मारे गए थे। इससे पहले जुलाई 2006 में हुए मुंबई ट्रेन विस्फोट भी इसी आतंकी संगठन ने किए थे, जिसमें 180 से अधिक लोग मारे गए थे।
मीर और ताल्हा के अलावा लश्कर के जिन नेताओं पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें अब्दुल्ला मुजाहिद, अहमद याकूब, हाफिज खालिद वालिद, कारी मुहम्मद याकूब शेख, आमिर हमजा, अब्दुल्ला मुंतजीर का नाम शामिल है। जिन लोगों पर गुरुवार को प्रतिबंध लगाया गया, वे पाकिस्तान में रहते हैं और लश्कर-ए-तैयबा का प्रचार अभियान, वित्तीय और ठहरने की सुविधा मुहैया कराते हैं।
इस बीच, भारत के विदेश सचिव रंजन मथाई ने संवाददाताओं को कहा कि आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष को बेहतर बनाने के लिए अंतराष्ट्रीय सहयोग के इस कदम का स्वागत करना चाहिए।( रात में सोनिया के मुजरे का भी इंतजाम किया गया होगा सवाददाता के लिए)
सईद के खिलाफ पर्याप्त सुबूत नहीं : मलिक
पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक ने गुरुवार को कहा कि उनका देश अब भी मुंबई हमले में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के खिलाफ पर्याप्त सुबूत का इंतजार कर रहा है। (उनके कहने का मतलब ये हे की आप हाफिज को ऑन द स्पोट पकड ले तभी हम मानेंगे की वो आतंकवादी गतिविधि करता हें)
 हालांकि, भारत की ओर से बार-बार जोर देकर कहा गया है कि मुंबई हमले में सईद की संलिप्तता के पर्याप्त सुबूत दिए गए हैं। मलिक ने कहा कि मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया है लेकिन उसे दोषी साबित करने के लिए सुबूतों की जरूरत है।

1984 में कांग्रेस के राज में कांग्रेसियों द्वारा सिक्खो के खिलाफ दंगे की सच्चाई........

 दोस्तों आज हम आपको वों दर्दनाक सच्चाई बताने जा रहे है, जिसे सुनकर आपका दिल दहल जायेगा। हम में से ज्यादातर लोगो कों यह तो पता है की 1984 में कांग्रेस शासन में सिक्खो के खिलाफ दंगे हुए थे, लेकिन वास्तव में क्या हुआ था ? यह अधिकतर लोग विस्तार से बिलकुल नहीं जानते। आइये जानते है कांग्रेस सरकार द्वारा आयोजित 1984 के सिक्ख विरोधी दंगो का पूरा सच।  

पार्ट 1: आपातकाल
भारत में राजनैतिक अस्थिरता के चलते प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने भारतीय संविधान की धारा 352 के अंतर्गत 25 जून 1975 कों आपातकाल की घोषणा की थी। यह आपातकाल 21 महीने याने 21 मार्च 1977 तक चला, और इस दौरान जनता के अधिकारों पर काफी बंधन आ गये थे, और ठीक इसी वक्त पंजाब राज्य में कुछ सिक्ख अलगाववादी संगठन स्वायत्त खालिस्तान की मांग करने लगे थे।
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पार्ट 2: ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार
ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार 5 जून, 1984 को भारतीय सेना के द्वारा चलाया गया था। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य खालिस्तानी आतंकवादियों की गतिविधियों को समाप्त करना था। पंजाब में भिंडरावाले के नेतृत्व में अलगाववादी ताकतें सिर उठाने लगी थीं, और उन ताकतों को पाकिस्तान से हवा मिल रही थी। पंजाब में भिंडरावाले का उदय इंदिरा गाँधी की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाओं के कारण हुआ था। अकालियों के विरुद्ध भिंडरावाले को स्वयं इंदिरा गाँधी ने ही खड़ा किया था। लेकिन भिंडरावाले की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाएं देश को तोड़ने की हद तक बढ़ गई थीं। जो भी लोग पंजाब में अलगाववादियों का विरोध करते थे, उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता था। 3 जून, 1984 को भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर पर घेरा डालकर निर्णायक जंग में भिंडरावाले और उसके कट्टर समर्थकों कों मार गिराया। बाद में मालूम हुआ कि भिंडरावाले ने पवित्र स्वर्ण मंदिर को आतंक का गढ़ बना लिया था। 'ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार' से सिक्ख समुदाय इस समय काफ़ी आक्रोशित था। उन्हें लगता था कि स्वर्ण मंदिर पर हमला करना उनके धर्म पर हमला करने के समान है। इंदिरा गाँधी को गुप्तचर संस्था 'रॉ' ने आगाह कर दिया था कि, सिक्खों में भारी रोष है, और उन्हें अपनी सिक्योरिटी में सिक्खों को स्थान नहीं देना चाहिए। लेकिन इंदिरा गाँधी ने उस परामर्श पर कोई ध्यान नहीं दिया। उस रोष की परिणति 31 अक्टूबर, 1984 को इंदिरा गाँधी की नृशंस हत्या के रूप में सामने आई।
अधिक जानकारी के लिये पढ़े:http://aajtak.intoday.in/story.php/content/view/67053/9/76/Assassination-of-Indira-Gandhi-for-our-nation-.html

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पार्ट 3: 31 अगस्त 1984, दंगो का पहला दिन:
1) सुबह 9.20 बजे दिल्ली में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कों उनके 2 सिक्ख बॉडीगार्ड सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने गोलियों से छलनी कर दिया। उन्हें तुरंत एम्स (AIIMS) अस्पताल में भरती कराया गया।
2) सुबह 10.50 बजे इंदिरा गाँधी का एम्स अस्पताल में निधन।
3) सुबह 11.00 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर यह खबर प्रसारित हुई की इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही दो सिक्ख बॉडीगार्डो (सुरक्षा रक्षक) ने की। यह सुनकर सारा देश सन्न रह गया।
4) शाम 4 बजे राजिव गाँधी पश्चिम बंगाल से लौटकर सीधे एम्स अस्पताल पहुचते है।
5) शाम 5.30 बजे राष्ट्रपति जैल सिंह अपना विदेश दौरा खत्म कर भारत लौटते है और सीधे एम्स अस्पताल में दाखिल होते है। चुकी वे  सिख थे, तो अस्पताल के बाहर जमा भीड़ उनकी कार पर पथराव कर कार कों चकनाचूर कर देती है।
6) शाम कों कांग्रेस द्वारा लगाये गये दंगाईयो की टुकडिया एम्स अस्पताल से दिल्ली के अलग अलग इलाको में कुच करती है। कांग्रेसी दंगाई पुरे दिल्ली में सिक्खो के खिलाफ जबरदस्त हिंसा फैलाना शुरू कर देते है। कई सिक्खो कों सरेआम मारा गया।
7) तनावपूर्ण वातावरण में राजीव गांधी कों शाम कों प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलवाई जाती है जो की प्रजातंत्र में वंशवाद की एक मिसाल है।
8) भाजपा नेता गृहमंत्री नरसिहराव से मिलकर उन्हें दंगो पर तत्काल नियंत्रण पाने कि हिदायत देते है।
9) रात में कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार, ललित माकन, H.K.L.भगत ने दंगाईयो कों संगठित कर उन्हें पैसे, तलवार, लाठियाँ, सलाखे मुहेय्या करवाई। जो कांग्रेसी नेता पेट्रोल पम्प के मालिक थे, उन्होंने दंगाईयो कों केरोसिन और पेट्रोल के कॅन की आपूर्ति की। सिक्खो के घरों का पता जानने के लिये कांग्रेस नेताओं ने दंगाईयो कों वोटर कार्ड और राशन कार्ड दिए।
10) कांग्रेसी कार्यकर्ताओ ने रात में सिक्खो के घरों पर “s” के निशान बना दिए। ताकि दूसरे दिन दंगाई जल्द से जल्द सिक्खो के घरों की पहचान कर, घरों में घुसकर सिक्खो का कत्लेआम कर सके।
अधिक जानकारी के लिये मिश्रा कमीशन के सामने पेश किया गया यह अफिडेविट इस लिंक पर पढ़े।। :http://www.carnage84.com/affidavits/mishra/promi/Aseem%20Shrivastava.htm

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पार्ट 4: 1 नवम्बर 1984, दंगो का दूसरा दिन
सुबह सुबह कांग्रेस के सांसद सज्जन कुमार ने कांग्रेसी कार्यकरता, गुंडे और दंगाइयो कों लेकर रॅली निकाली, और सरेआम मासूम सिक्खो का क़त्ल करने के लिये नारे लगाये। सज्जन कुमार ने सिक्खो की हत्या करने वालों कों इनाम घोषित किये, कहा एक भी सिख  जिन्दा ना बच पाए।
सुबह ९ बजे दंगाईयो ने सिक्खो के खिलाफ भयानक कत्ले आम शुरू कर दिया। सबसे पहले गुरुद्वारा में मौजूद सिक्खो कों मारा गया, फ़िर सिक्खो के घरों में घुसकर वहा महिला, बच्चे, पुरुष सभी कों केरोसिन और पेट्रोल छिडककर जिन्दा जला दिया गया। रेलगाड़ी, बसे रोक कर उनमे सवार सिक्खो कों जिन्दा जलाया गया । बीजेपी और अटलजी ने सिक्खो की मदद की। त्रिलोकपुरी, मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी इलाको में सबसे ज्यादा सिक्ख मारे गये।
अधिक जानकारी के लिए यह लिंक आप देख सकते है:http://www.bbc.co.uk/news/world-asia-india-17811666

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पार्ट 5: 2 नवम्बर 1984, दंगो का तिसरा दिन
दिल्ली के कुछ इलाको में कर्फ्यू लगाया गया, लेकिन इसका कोई प्रभाव नहीं था। क्योकि पुलिस और आर्मी सभी कों दंगाईयो पर कारवाई करने के बजाय उल्टा उन्हे मदद करने के आदेश दिए गये थे। सिक्खो का नरसंहार जारी रहा।
अधिक जानकारी के लिए यह लिंक आप देख सकते है:http://ibnlive.in.com/news/1984-antisikh-riots-backed-by-govt-police-cbi/251375-37-64.html

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पार्ट 6: 3 नवम्बर 1984, दंगो का चौथा दिन
जब दंगाई अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेती है, तब सेना और पुलिस स्थिति पर नियंत्रण करना शुरू कर देती है। छिट पुट घटनाओ कों छोड़कर शाम तक दंगे थम जाते है। दिल्ली में सिक्खो की लाशो का अम्बार लग जाता है। 3 नवम्बर तक 2,700 से 20,000 सिक्ख मारे गये। उन लाशो कों एम्स अस्पताल ले जाया जाता है।
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पार्ट 7: दंगो की जांच
दंगो की जांच के लिये मारवाह कमीशन, मिश्रा कमीशन, मित्तल कमिटी, नानावटी आयोग और कई अन्य आयोगों का गठन किया गया। आयोग और कोर्ट ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता सज्जन कुमार, R.K.आनंद, ललित माकन, H.K.L.भगत और कांग्रेस पार्टी कों दंगे भडकाने और दंगाईयो कों मदद करने के आरोप में सीधा सीधा दोषी ठहराया। लेकिन पुलिस और कांग्रेसी सरकारों ने कोई कारवाई नहीं की। कांग्रेस नेता जगदीश टायटलर के खिलाफ चल रहे सभी केस कोर्ट ने 2007 में पुख्ता सबूतों के अभाव में बंद कर दिए और उन्हें बरी कर दिया।
अधिक जानकारी : http://www.indianexpress.com/news/cbi-gives-tytler-clean-chit-in-1984-riots-case/442552/

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दंगो के दोषी कांग्रेसी नेता आज भी आजाद घूम रहे है, पीडितो के दिल में आक्रोश है और मृतको की आत्मा आज भी इन्साफ के इंतजार में है। लेकिन उनकी आवाज सुनेगा कौन ? और दूसरी तरफ भारत में दंगो की शुरुआत (1947) और देश का विभाजन करने वाली कांग्रेस सरकार और उ.प्र. की मुल्ला-यम सरकार गुजरात दंगो का रोना रोती हें,


 में गुजरात दंगो को सही करार देता हूँ, और इन्हे दंगे ना कह कर देश भक्तो द्वारा ''देश-द्रोहियों की सफाई का अभियान'' का नाम देता हूँ।    



बुधवार, 29 अगस्त 2012

नाचने-गाने पर 17 लोगों का सिर काटा डाला ..........


talibani farman: 17 beheaded for dancing and singing अफगानिस्तान के हेलमंद प्रात में तालिबान चरमपंथियों ने नृत्य व संगीत के कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे 15 पुरुषों और दो महिलाओं का सिर कलम कर दिया।
हेलमंद प्रात के शाह करेज इलाके में सिर कलम करने की ये घटना हुई, और मारे गए सभी 17 लोग आम नागरिक थे। तालिबान चरमपंथियों ने इस घटना को 26 और 27 अगस्त के बीच की रात को अंजाम दिया। पहले नागरिकों का सिर कलम किया गया या गोली मारी गई ये अभी स्पष्ट नहीं है।
 लोग एक उत्सव मनाने के लिए जमा हुए थे और संगीत की धुन पर नाच रहे थे, जबकि तालिबान इस समारोह को रोकना चाहते थे। उन्होंने कहा कि जहा इस घटना को अंजाम दिया गया वो पूरी तरह से तालिबान चरमपंथियों के नियंत्रण वाला इलाका है, इसलिए उसके बारे में और ज्यादा जानकारी नहीं है। तालिबान ने इस घटना पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

मुंबई हमले के आरोपी कसाब को कांग्रेस सरकार देगी जीवनदान, देश के प्रति सच्ची श्रधांजली


मुंबई हमले के आरोपी कसाब को कांग्रेस सरकार देगी जीवनदान, देश के प्रति सच्ची श्रधांजली केसे ??? ये तो सब जानते ही हें, पहले से अफजल  गुरु  कई सालो से फांसी के इन्तजार में बेठा हें । फिर भी सरकार ना सही देश की सुप्रीम कोर्ट ने आज मुंबई पर वर्ष 2008 में हुए आतंकी हमले में पकड़े गए एकमात्र जीवित आतंकी अजमल आमिर कसाब की फांसी की सजा बुधवार को बरकार रखी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कसाब ने सबसे बड़ा गुनाह किया है। कसाब के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले हैं। कसाब का गुनाह माफी के लायक नहीं है।
supreme court uphold the death sentence of ajmal kasab
सुप्रीम कोर्ट ने कसाब के इस तर्क को खारिज कर दिया, कि मुंबई पर हुआ आतंकी हमला भारत सरकार के खिलाफ एक युद्ध था, न कि भारत देश या यहां के लोगों के खिलाफ।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत देश का एक मात्र निर्वाचित अंग, और संप्रभु सत्ता का केंद्र भारत सरकार ही है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी का प्राथमिक और मुख्य अपराध भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ना ही था।
मुंबई की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2010 में कसाब के खिलाफ फांसी की सजा सुनाई थी। कसाब ने इस फैसले को बंबई उच्च न्यायालयम में चुनौती दी थी, जिसे न्यायालय ने फरवरी 2011 में अमान्य कर दिया था।
मुंबई पर हुए हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी। पाकिस्तानी आतंकियों ने समुद्र के रास्ते मुंबई पर हमला किया था, जिसमें कसाब भी शामिल था। बाकी के आतंकी मारे गए थे, लेकिन कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया था।
अब देखना ये हें की आतंकियों को जेलों में पालने वाली और उनकी सेवा करने वाली ये भ्रष्ट कांग्रेस सरकार कितने दिन में उसे फांसी पर लटकाती हें, मुझे नही लगता की कसाब को फांसी पे लटकाया जायेगा । क्यों की संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु को सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई साल पहले फांसी की सजा सुनाने के बाद आज इतने सालो बाद भी सरकार ने उसे फांसी पर नही लटकाया , तो इस मामले में  क्या उम्मीद रखे ? और शायद हो सकता हें की थोड़े टाइम बाद सरकार इन्हे देश से बाहर भेज कर कहेगी की जेल तोड़ कर भाग गये ।

शनिवार, 18 अगस्त 2012

लखनऊ में पार्क में हिन्दू महिलाओं के कपड़े फाड़े, बुद्ध की मूर्ति तोड़ी असम मामले को लेकर....


पुलिस सुरक्षा में दंगे करते मुस्लिम 
पुलिस सुरक्षा में दंगे करते मुस्लिम उत्तर प्रदेश में ।
असम और म्यांमार की हिंसा में अल्पसंख्यकों पर हुए असर के विरोध में शुक्रवार को नमाज के बाद उत्तर प्रदेश में लखनऊ, कानपुर और इलाहाबाद में मुस्लिम हिंसक हो उठे। इस दौरान ना बीमार की परवाह की गई, और न बच्चों की। न महिलाओं को देखा गया और न अपाहिज को। बेतहाशा ईंट-पत्थर बरसाए गए हिन्दुओ के घरो पर और उनकी दुकानों में लूटपाट की गई। लखनऊ में बुद्ध पार्क घूमने गई हिन्दू महिलाओं को घेरकर उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। मुंबई में हुए हिंसक विरोध से कोई सबक न लेते हुए सुस्त पुलिस तंत्र ''मुल्ला''यम के पालतू कुत्तो असाउदिन ओवेसी और आज़म खान के दबाव के कारण तब सक्रिय हुआ, जब तमाम हिन्दू निर्दोष घायल हो चुके थे, और उनकी संपत्ति का भारी नुकसान हो चुका था।
 लखनऊ में दोपहर बाद पक्का पुल से शुरू अराजकता विधान भवन के सामने तक पहुंच गई। यहां टीलेवाली मस्जिद व आसफी इमामबाड़े में नमाज के बाद मुस्लिमो लोगों ने विधान भवन की ओर कूच कर दिया, और वहां तोड़फोड़ की। अधिकारी जब तक माजरा समझ पाते तब तक करीब एक हजार प्रदर्शनकारी गौतम बुद्ध पार्क पहुंच गए। कुछ ने पार्क की रेलिंग तोड़नी शुरू की तो कुछ ने स्वतंत्रता दिवस पर लगाई झालरों को नोच डाला। इसके बाद सैकड़ों लोग पार्क में कूद गए और टिकट खिड़की पर तोड़फोड़ कर पार्क में मौजूद पुरुषों, महिलाओं और कर्मचारियों को पीटने लगे। लोगो ने महिलाओ से पहले नाम पूछे, और हिन्दू नाम बताते ही इन्हें घेर कर सभी महिला पर्यटकों के कपड़े भी फाड़ दिए, उन्हें नग्न कर दिया।
 इस दौरान कई गाड़ियां तोड़ी गईं। पार्क में लगभग सब-कुछ तहस नहस कर डाला। पार्क में लगी गौतम बुद्ध की मूर्ति भी क्षतिग्रस्त कर दी गयी। आसपास की हिन्दुओ की दुकानें तोड़ीं और सामान लूट लिया। इसके बाद उपद्रवी कन्वेंशन सेंटर मोड़ पर पहुंचे और बसों व गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इन वाहनों में सवार लोगों से भी अभद्रता की गई। शायद उत्तर प्रदेश के हिन्दुओ को अक्ल आ गयी होगी, के समाजवादी पार्टी ?केसे हिन्दू समाज के लिए खतरा बन गयी, केसे ''मुल्ला''यम उनके लिए ''यम'' बन गया हें।

क्या कभी भारत के दोगले नेता और शासक इजरायल से प्रेरणा लेंगे ?.............

क्या कभी भारत के दोगले नेता और शासक इजरायल से प्रेरणा लेंगे ?
जब फिलिस्तीनी आतंकवादियो ने 1972 के म्यूनिख ओलंपिक गेम्स विलेज में घुसकर 12 इस्राइली खिलाडियों की हत्या कर दी थी । तब तत्कालीन इस्राइली प्रधानमंत्री श्रीमती गोल्डा मायर ने कोई भी बयान नहीं दिया ... उन्होंने सरे मृत खिलाडियो के घरवालो को खुद फोन करके कहा की हम बदला लेकर रहेंगे .. उन्होंने अपनी गुप्तचर एजेंसी मोसाद को पूरी छुट दे दी, और कहा इस घटना में जितने लोग भी शामिल है, वो चाहे दुनिया के किसी भी देश में हो उनको जिन्दा नहीं रहने देना है ..

मोसाद ने पता लगा लिया की इस हत्याकांड में 14 आतंकवादी शामिल थे ..

१ - एक आतंकवादी सलाह खलिफ जेदाह में अपने परिवार के साथ रहता था । मोसाद ने उसके घर में रखे टेबल जिस पर फ़ोन रखा था, ठीक वैसा ही टेबल रख दिया और टेबल के अन्दर बम फिट करके उसका कनेक्शन फोन से जोड़ दिया, फिर उसके फोन की घंटी बजी उसने जैसे ही फोन उठाया उसके चीथड़े उड़ गए ..

2 - एक आतंकवादी अबू दयुद बेरुत में छुपा था .. मोसाद ने उसकी पूरी दिनचर्या पर नज़र रखी । वो एक क्लब में रोज जाता था । इजराइल ने अपने खतरनाक कमांडो को बेरुत भेजा, जिसमे सिर्फ 3 लोग थे, एक कमांडो बेंजामिन नेतान्याहू [जो बाद में इसराइल के राष्ट्रपति बने ] एक ख़ूबसूरत लड़की का भेष रखकर उस क्लब में नाच रहे थे जैसे ही वो आतंकवादी उनके करीब नाचने के लिए आया, बेंजामिन ने अपनी फुल्ली औटोमटिक गन से गोलियों की बौछार कर दी 15 लोग मरे गए, और बेंजामिन और उनका साथी जो उनको कवर कर रहा था लेबनानी पुलिस के नकली गाड़ी में फरार हो गए।

3 - एक आतंकवादी अमिन अल हिंदी को मोसाद ने अम्मान में उसके बिल्डिंग के नीचे गोलियों से भुन दिया ..

4 - अब बाक़ी बचे आतंकवादियो ने डरकर आत्मसमर्पण करने का प्रस्ताव भेजा। लेकिन गोल्डा मायर ने कुछ नहीं बोला चौथे आतंकवादी अबू फयाज, जो छुप कर हेलसिंकी में रहता था, उसे कार से कुचल कर मार दिया गया ।
5 -पाचवे आतंकवादी अली हसन सलामेह जो पेरिस में छुपा था, वही उसको साइनाइड जहर देकर मार दिया गया ।
6 - महमूद हम्शारी को दमिस्क में गोली मारी गयी ।

इस तरह गोल्डा मायर ने एक एक को चुन चुन कर पूरी दुनिया में मारा ।

में सलाम करता हूँ, ऐसे देश के जज्बे को .. जहा के नागरिक हमेशा अपना सर उठा के चलते है.........
और साथ ही शर्म महसूस करता हूँ अपने देश के नेताओ पर, यहाँ के सिस्टम पर और साथ ही इन्हें बर्दाश्त करती और इन्हें कोई सबक नही सिखाने वाली आम जनता पर................

गुरुवार, 28 जून 2012

हिन्दुस्तान के हिन्दू क्या सब कायर हो गये, कहाँ गये वीर शिवाजी और महाराणा की महिमा गाने वाले ?. ...........


मुझे बचपन से ही ये बात हमेशा आश्चर्य चकित करती थी कि.... आखिर हमारे देश पर कैसे मुहम्मद गजनवी उतनी दूर से आकर 17 बार आक्रमण कर पाया.... बाबर .... मीर कासिम .. या... वो लंगड़ा तैमूरलंग.......... ये सब लुटेरे आखिर कैसे हमारे देश पर बार-बार आक्रमण कर पाए.... हमें जम कर लूटा....