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मंगलवार, 18 सितंबर 2012

महिलाए बाजार गयी तो देना होगा जुर्माना, उत्तर प्रदेश धीरे-धीरे तालिबान की गिरफ्त में, तालिबानी फरमान जारी करती पंचायते ......

उत्तर प्रदेश में बागपत जिले के असारा गांव के बाद अब सहारनपुर के घाटमपुर गांव में 36 बिरादरियों की पंचायत में भी तालिबानी फरमान सुनाया गया है। पंचायत ने बाजार में महिलाओं की खरीदारी पर रोक लगा दी है। इसका उल्लंघन करने पर 500 रुपये जुर्माना होगा। अगर खुले में कोई मोबाइल से गाना बजाता सुना गया, तो उस पर 1500 रुपये का जुर्माना लगेगा। पंचायत ने शराब, गुटखा आदि के सेवन को भी प्रतिबंधित किया है।
सोमवार को गंगोह ब्लॉक के मुस्लिम गुर्जर बहुल घाटमपुर गांव के मदरसे में यह पंचायत आयोजित की गई। अध्यक्षता करने वाले सरपंच अयूब ने बताया कि महिलाएं खरीदारी के लिए बाजार में नहीं जाएंगी। महिलाएं घर के बाहर नल पर पानी नहीं भर सकेंगी। पंचायत ने पांच-पांच व्यक्तियों की छह टीमें बनाई हैं, जो गांव में घूमकर निगरानी करेंगी और दोषी से निर्धारित जुर्माना वसूलेंगी। विरोध करने पर दोगुना जुर्माना होगा। इस मामले में जब एसएसपी डीसी मिश्रा का कहना है कि पंचायत का मामला उनके संज्ञान में नहीं है, लेकिन अगर कानून के खिलाफ कुछ हुआ, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। सरपंच अयूब का कहना है कि गांव की बिगड़ती छवि को मद्देनजर ये फैसले लिए गए हैं।
जामिया इमाम मदरसा अनवर, देवबंद के सदर मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है कि, ऐसे फैसले कौम के लिए अच्छी बात हैं। लेकिन इन्हें बंदूक की नोक पर लागू न किया जाए। जरूरत पड़े तो लोगों को समझाया जाए। फरमान लोगों के लिए दिक्कत का कारण न बने। उल्लेखनीय है कि इससे पहले जुलाई माह में बागपत के असारा गांव में 36 बिरादरियों की पंचायत में भी ऐसे ही फरमान जारी किए गए थे। इसमें प्रेम विवाह करने वालों को गांव छोड़ने का फरमान भी था। पंचायत करने वालों का पुलिस से संघर्ष भी हुआ था, और बाद में प्रेम विवाह करने वाले एक परिवार के पांच लोगों का कत्ल भी किया गया।

मार्शल गाड़ी में ३ गायों को भर कर काटने ले जा रहे दो पकडे, कहा ये तो रोज का काम हें ..........

 एक ऐसा दृश्य जिसने मानवता का सर शर्म से झुका दिया. क्या आप कल्पना कर सकते है जिस मार्शल जीप में पिछली सीट पर बमुश्किल १० सवारियां बैठे जाती है. उसी जगह में वध करने के लिए दो गायो और एक बछड़े को ठूंसकर ले जाया जा रहा था, जिसे पुलिस ने पकड़ा. काफी मशक्कत के बाद वहां से पशुओ को उतरा गया तब तक एक गाय ने तड़पकर दम तोड़ दिया ,

पकडे गए आरोपी नूर मोहम्मद ने बताया की ऐसे कार्य को  अंजाम देने वाले कई लोग है. और ये उनका रोज का काम हें |
ऐसी क्रूरता कहाँ तक उचित है...इस घटना का दृश्य......
स्वयं देखे.... और सोचे की क्या इसलिए हमने ऐसे देश में जन्म लिया जहाँ गाय को गो- माता का दर्जा दिया जाता हें,जिस धरती पर कहते हें की देवता भी जन्म लेने को तरसते, वहा पर इस तरह के राक्षसी कार्य हमारी आँखों के सामने हो रहे हें, और हम मूक बन कर समर्थन कर रहे हें | 
और सोचे क्या यह जघन्य अपराध नहीं है ??

हमारा एक सवाल तथाकथित सेकुलरों से और मुस्लिम से की वो इस पर क्या कहंगे ?

सोमवार, 17 सितंबर 2012

मोबाईल में E रिचार्ज कराना हिन्दुओ के लिए घातक, आपकी बेटी या बहन भी हो सकती हें इसका शिकार...

आज कल भारत में कुछ ऐसे संगठन काम कर रहे है..जो हमारे जड़ को खोखला करने में लगे हुए है , और अगर मै लोगो को समझाता हु तो लोग मुझे ही समझाने लगते है की तुम इसके विरोधी हो ,तुम उसके विरोधी हो..फिर भी कोई कुछ बोले मै अपना काम करता रहूँगा !
लगभग देश के हर शहर में है, आजकल मुस्लिम लडको ने अपने मोलानाओ के आदेशो से कई संगठन बना रखे हें | और इनका काम करने का तरीका सब से अलग है !
इनका काम हिन्दू लडकियों को अपने प्यार के जाल में फ़साना, फिर उन्हें किसी होटल या रिसोर्ट में ले जाकर उनके साथ प्यार का हवाला देकर, शारीरिक सम्बन्ध बनाना, फिर आये दिन उनका योन शोषण करना, फिर शादी करने के लिए मुस्लिम बनने का दबाव डालना, और अंत में हिन्दू लड़की को मुस्लिम बना डालना |
आज कल ज्यादातर लोग अपने मोबाईल की इ रिचार्ज करा रहे है, लड़किया भी, जैसे ही हिन्दू लड़की किसी मुस्लिम की मोबाईल की दूकान पर जाती है, और बोलती है की मेरा मोबाईल रिचार्ज कर दो 100 / 200 रुपये से ..तो मुस्लिम दूकानदार लड़की से उसका नंबर अपने कॉपी में लिख लेता है, फिर रिचार्ज कर देता है, अब दूकानदार को पता चल गया की यह नंबर एक हिन्दू लड़की का है ..फिर वो ये नम्बर अपने शहर में बनाये हुए संगठन तक पहुंचा देता हें | इसके बदले में दूकान वाले को पैसा मिलता है ! और फिर संगठन से जुड़े लड़के उस लड़की को फोन करने लगते हें, कई मामलो में तो लडकिय बच जाती हें | लेकिन 100 में से अगर 5-10 भी पट गयी तो उनका मकसद कामयाब ! पहले दोस्ती, फिर झूठा प्यार , फिर शादी का झासा .....लड़की को ऐसा कर दिया जाता है की वो या तो मुस्लिम लड़के से शादी कर ले, या घर से उसके साथ भाग जाये .......उसके बाद पहले लड़की का धरम परिवर्तन....फिर 2 / 3 महीने के बाद वो मुस्लिम लड़का उस लड़की को तलाक दे कर किसी और हिन्दू लड़की को पटाने, और उसका जीवन बर्बाद करने की राह पर निकल पड़ता हें,...उसके बाद हिन्दू लड़की तो वेसे ही मुस्लिम बन चुकी होती हें, उसके घर वाले समाज के डर से उसे नही अपनाते और एस तरह उस हिन्दू लड़की का का जीवन बर्बाद ... फिर लड़के के दोस्त आते हें, और बोलते हें की तुम भी हमारे मिशन में शामिल हो जाओ...और एस तरह हिन्दू समाज को नष्ट करने का सिलसिला चल पड़ता हें |
इसलिए आप सब से निवेदन है की इ रिचार्ज नहीं कराये, सिर्फ कूपन से ही कराये रिचार्ज, और अगर majburi में कराना पड़े तो किसी भरोसे मंद हिन्दू दूकान दार से कराये | हो सकता हें की कल कही आप की बेटी भी इसका शिकार हो सकती हें |  यह बात अपने घर में और सभी जानने वाले को बताये और सतर्क रहे !
जय श्री राम,
जय भारत ..!!

शनिवार, 15 सितंबर 2012

देश में शिव जी के 12 ज्योतिर्लिंग थे,11 तो हें 12 वाँ कहाँ गया ? जाने पूरी हकीकत.........

भारत में 12 ज्योतिर्लिंग थे 11 का सब को पता हें 12 व कहा गया ? आपको पता हें ? चलो में बताता हूँ 12 वे ज्योतिर्लिंग का नाम हे अग्रेश्वर महादेव जो की आगरा में स्थित था|  अब आप कहेंगे की आगरा में आज की तारीख में तो कोई शिव जी का ज्योतिर्लिंग नही हें ? किसी जमाने में, जिसे आज सब ताज महल कहते हें, वो शिवालय हुआ करता था |जिसे शाहजहाँ ने अपनी पत्नी या कहे की बच्चे पैदा करने की मशीन मुमताज की लाश को दफ़न करने के लिए जबरदस्ती छीन लिया था | पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट पढ़े और अगर आप की रगों में हिन्दू का खून हें, तो ज्यादा से ज्यादा शेयर जरुर करे......
>प्रो. ओक कि खोज ताजमहल के नाम से प्रारम्भ होती है———
=”महल” शब्द, अफगानिस्तान से लेकर अल्जीरिया तक किसी भी मुस्लिम देश में भवनों के लिए प्रयोग नही किया जाता…
यहाँ यह व्याख्या करना कि, महल शब्द मुमताज महल से लिया गया है……वह कम से कम दो प्रकार से तर्कहीन है-
पहला - शाहजहाँ कि पत्नी का नाम मुमताज महल कभी नही था, बल्कि उसका नाम मुमताज-उल-ज़मानी था ।
और दूसरा - किसी भवन का नामकरण किसी महिला के नाम के आधार पर रखने के लिए केवल अन्तिम आधे भाग (ताज)का ही प्रयोग किया जाए और प्रथम अर्ध भाग (मुम) को छोड़ दिया जाए, यह समझ से परे है ।
प्रो.ओक दावा करते हैं कि,ताजमहल नाम तेजो महालय (भगवान शिव का महल) का बिगड़ा हुआ संस्करण है, साथ ही साथ ओक कहते हैं कि -
मुमताज और शाहजहाँ कि प्रेम कहानी, चापलूस इतिहासकारों की भयंकर भूल और लापरवाह पुरातत्वविदों की सफ़ाई से, स्वयं गढ़ी गई कोरी अफवाह मात्र है, क्योंकि अगर इसमे थोड़ी भी सच्चाई होती तो शाहजहाँ के समय का कम से कम एक शासकीय अभिलेख इस प्रेम कहानी की पुष्टि कही ना कही जरुर करता है…..
इसके अतिरिक्त बहुत से प्रमाण ओक के कथन का प्रत्यक्षतः समर्थन कर रहे हैं……
तेजो महालय (ताजमहल) मुग़ल बादशाह के युग से पहले बना था, और यह भगवान् शिव को समर्पित था तथा आगरा के राजपूतों द्वारा पूजा जाता था ।
==>न्यूयार्क के पुरातत्वविद प्रो. मर्विन मिलर ने ताज के यमुना की तरफ़ के दरवाजे की लकड़ी की कार्बन डेटिंग के आधार पर 1985 में यह सिद्ध किया कि, यह दरवाजा सन् 1359 के आसपास अर्थात् शाहजहाँ के काल से लगभग 300 वर्ष पुराना है ।
==>मुमताज कि मृत्यु जिस वर्ष (1631) में हुई थी, उसी वर्ष के अंग्रेज भ्रमण कर्ता पीटर मुंडी का लेख भी इसका समर्थन करता है कि, ताजमहल मुग़ल बादशाह के पहले का एक अति महत्वपूर्ण भवन था ।
==>यूरोपियन यात्री जॉन अल्बर्ट मैनडेल्स्लो ने सन् 1638 (मुमताज कि मृत्यु के 07 साल बाद) में आगरा भ्रमण किया, और इस शहर के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत का वर्णन किया, परन्तु उसने ताज के बनने का कोई भी सन्दर्भ नही प्रस्तुत किया, जबकि भ्रांतियों मे यह कहा जाता है कि ताज का निर्माण कार्य 1631 से 1651 तक जोर शोर से चल रहा था ।
==>फ्रांसीसी यात्री फविक्स बर्निअर एम.डी. जो औरंगजेब द्वारा गद्दीनशीन होने के समय भारत आया था, और लगभग दस साल यहाँ रहा, के लिखित विवरण से पता चलता है कि, औरंगजेब के शासन के समय यह झूठ फैलाया जाना शुरू किया गया कि, ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था…….
प्रो. ओक. बहुत सी आकृतियों और शिल्प सम्बन्धी असंगताओं को इंगित करते हैं जो इस विश्वास का समर्थन करते हैं कि, ताजमहल विशाल मकबरा न होकर विशेषतः हिंदू शिव मन्दिर है…….
आज भी ताजमहल के बहुत से कमरे शाहजहाँ के काल से बंद पड़े हैं, जो आम जनता की पहुँच से परे हैं। प्रो. ओक जोर देकर कहते हैं कि, हिंदू मंदिरों में ही पूजा एवं धार्मिक संस्कारों के लिए भगवान् शिव की मूर्ति, त्रिशूल,कलश और ॐ आदि वस्तुएं प्रयोग की जाती हैं।
==>ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद बूँद कर पानी टपकता रहता है, यदि यह सत्य है तो पूरे विश्व मे किसी कि भी कब्र पर बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता, जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद बूँद कर पानी टपकाने की व्यवस्था की जाती है, फ़िर ताजमहल (मकबरे) में बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब….????
राजनीतिक भर्त्सना के डर से इंदिरा गाँधी सरकार ने ओक की सभी पुस्तकें स्टोर्स से वापस ले लीं थीं, और इन पुस्तकों के प्रथम संस्करण को छापने वाले संपादकों को भयंकर परिणाम भुगत लेने की धमकियां भी दी गईं थी ।
प्रो. पी. एन. ओक के अनुसंधान को ग़लत या सिद्ध करने का केवल एक ही रास्ता है, कि वर्तमान केन्द्र सरकार बंद कमरों को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षण में खुलवाए, और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को छानबीन करने दे ।
ज़रा सोचिये….!!!!!!
कि यदि ओक का अनुसंधान पूर्णतयः सत्य है तो किसी देशी राजा के बनवाए गए संगमरमरी आकर्षण वाले खूबसूरत, शानदार एवं विश्व के महान आश्चर्यों में से एक भवन, “तेजो महालय” को बनवाने का श्रेय बाहर से आए मुग़ल बादशाह शाहजहाँ को क्यों……?????
तथा -
इससे जुड़ी तमाम यादों का सम्बन्ध मुमताज-उल-ज़मानी से क्यों……..??????? ताजमहल के बारे में ये लाइने बिलकुल सटीक बैठती हें--
आंसू टपक रहे हैं, हवेली के बाम से,
रूहें लिपट के रोती हैं, हर खासों आम से,
अपनों ने बुना था हमें, कुदरत के काम से,
फ़िर भी यहाँ जिंदा हैं, हम गैरों के नाम से,

शुक्रवार, 14 सितंबर 2012

देश को बर्बाद करने में लगे बंगलादेशी घुसपेठीये ...........

मानव तस्करी में और अवेध घुसपेठ कराने में लिप्त बांग्लादेश ने अपने देश की युवतियों को भारत भेजने का नायाब तरीका ढूंढ निकाला है।आजकल युवती के साथ एक दलाल होता है। दोनों वैध तरीके से भारत में प्रवेश के लिए बताते हैं कि वे हनीमून के लिए भारत जा रहे हैं।
गत तीन महीने में भारत और बांग्लादेश की सीमा पर करीब 70 महिलाओं और बच्चों को मानव तस्करों से बचाया है। अक्सर लड़कियों को हनीमून के लिए जाने वाले जोड़े के रूप में ले जाया जाता है। तस्कर अपना रास्ता और तरीका बदलते रहते हैं। गरीब लड़कियों और महिलाओं को मानव तस्कर विदेश में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर फांस लेते हें, पर्यटन, नौकरी व शादी के फर्जी प्रस्तावों सहित मानव तस्करी के नौ तरीके सामने आए हैं। दुखद पहलू यह है कि तस्करों से बचाई गईं लडकियों से चला हे की, लड़कियां या युवतियां बेहतर जीवन की उम्मीद में सीमा पार जाने के लिए तस्करों के साथ सहयोग करती हैं। और यहाँ आकर फंस जाती हें । भारत में लाने के बाद इन्हें अवेध और गेर क़ानूनी कार्यो में खपाया जाता हें, या इन्हें जिस्मफरोशी के दलदल में धकेल दिया जाता हें। असम में इन्ही कारणों से अवेध बंगलादेशियो की संख्या बढती ही जा रही हें ।

मंगलवार, 11 सितंबर 2012

''ब्राह्मणों की कोई मदद ना करे'' उत्तर प्रदेश के मुल्ला-यम पुत्र का अखिलेश का आदेश ........





  

 अब भी नही सुधरे तो बिलकुल ''साफ़'' कर देगा ये, मुल्ला-यम और अखिलेश हिन्दुओ को, आने वाले लोक-सभा  चुनावों में सबक सिखाये इन मुल्लो को, एक ही विकल्प नरेन्द्र मोदी को या उसकी पार्टी को ही वोट करे। ............

शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

देश में कोन थे सर्वश्रेष्ट राष्ट्रवादी, मुग़ल शासक या भारतीय शासक .........

कुछ चाटुकार सेकुलरवादियों तथा वामपंथी इतिहासकारों ने मुगल शासनकाल में भारतीय राष्ट्रीयता की विवेचना तथा स्वरूप को तथ्यरहित तथा मनमाने ढंग से प्रस्तुत किया है। इन्होंने मुगल शासनकाल को भारत का 'शानदर युग' तथा मुगल शासकों को 'महान' बताया है।Shah Jahan
भारत के मुगल शासकों में पहले छह शासक (1526-1707) ही प्रमुख थे। शेष ग्यारह शासक तो 1857 तक जैसे-तैसे शासन चलाते रहे। अंतिम शासक (बहादुरशाह जफर) के आते-आते तक मुगल साम्राज्य दिल्ली के लाल किले की चार दीवारी के भीतर तक ही सिमट कर रह गया था।
लेकिन वामपंथी लेखकों ने मनमाने ढंग से राष्ट्रीयता के दो भाग कर दिए। एक को विशुद्ध राष्ट्रवादी तथा दूसरे को सीमित अर्थ में राष्ट्रवादी कहा। इन्होंने मुगल शासक अकबर, औरंगजेब आदि खलनायकों को पहली श्रेणी में तथा महाराणा प्रताप, शिवाजी जैसे नायकों को दूसरी श्रेणी में रखा। यह विडम्बना ही है कि आक्रमणकारी तथा देश के रक्षकों की श्रेणी मनमाने ढंग से, बिना किसी तथ्य या तर्क से निर्धारित की गई। इन सभी कथित विद्वानों ने अपना विश्लेषण करते हुए इसकी कारण-मीमांसा तक नहीं की।
भ्रम फैलाने के कारण

एक प्रसिद्ध इतिहासकार ने वामपंथी लेखकों द्वारा 1860 के दशक में फैलाए गए इस भ्रमजाल के चार सम्भावित कारण दिये हैं। पहला-यह संभावना हो सकती है कि अंग्रेजों ने मुगलों से राज्य छीना था। अत: इन लेखकों ने मुगल शासकों को देशभक्त समझा हो। परन्तु यह कुतर्क ही होगा, क्योंकि ब्रिटिश इतिहासकारों तथा प्रशासकों ने माना है कि अंग्रेजों ने भारतीय सत्ता मुगलों से नहीं बल्कि मराठों तथा सिखों से छीनी थी। अंतिम मुगल शासक बहादुरशाह जफर तो नाममात्र का शासक था, जो दिल्ली के लाल किले तक सीमित था। दूसरा- यह तर्क हो सकता है कि, मुगल शासकों का शासन दिल्ली के पठान शासकों की तुलना में अच्छा था। परन्तु यह कथन भी आधारहीन है। इस आधार पर कोई भी कह सकता है कि ब्रिटिश शासन मुगलों से बेहतर था। तीसरा- अकबर ने अपने शासनकाल में कुछ सुधार किए थे। परन्तु केवल इस कारण ही उसके राज्य को 'राष्ट्रीय राज्य' या उसे 'राष्ट्रीय शासक' नहीं कहा जा सकता। चौथा-कुछ आधुनिक मुस्लिम इतिहासकारों के एक वर्ग ने सत्य को छिपाते हुए मुगल साम्राज्य की सफलताओं को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया, परन्तु साथ ही उन्होंने मुगल शासकों की असफलताओं तथा कमियों को बिल्कुल भुला दिया या छिपाया। अत: वामपंथी इतिहासकारों के कथन राजनीति से प्रेरित तथा अवसरवादिता का परिणाम ही लगते हैं।
अराष्ट्रीय मुगल शासक
मुगल शासक मूलत: विदेशी थे। अत्यधिक शराबी तथा व्यसनी बाबर, मुगलों का प्रथम शासक-वस्तुत: एक लुटेरा था। वह हिन्दुओं के लिए हमेशा 'काफिर' शब्द का प्रयोग करता था (देखे बाबरनामा)। न उसे कभी भारत से लगाव था और न ही यहां के लोगों से। उसे तो भारत के मुसलमान भी नहीं चाहते थे। उससे तो अत्यन्त श्रेष्ठ हसन खां मेवाती था, जिसने स्वेदश की रक्षा के लिए राणा सांगा की सेना में भाग लिया था। मेवाती को अपने पक्ष में लाने के लिए बाबर ने अनेक प्रलोभन दिए थे, लेकिन हसन खां मेवाती ने अपने पुत्र नाहर खां को बाबर द्वारा बन्धक बना लिए जाने के बाद भी स्वदेश भक्ति नहीं छोड़ी। इसी भांति बाबर के अफीमची पुत्र हुमांयू को भारत से किंचित मात्र भी लगाव नहीं था। वह छोटी- मोटी विजय के पश्चात जश्न, दावतों तथा विलासिता में डूब जाता था। बार-बार ईरान की ओर भागता था। वह जीवन भर लुढ़कता रहा और उसकी मृत्यु भी लुढ़क कर हुई थी।
मुगलों का तीसरा साम्राज्यवादी शासन अकबर था, जिसने लगभग 50 वर्षों तक भारत पर शासन किया। स्मिथ के अनुसार उसमें राष्ट्रीयता की एक बूंद तक नहीं थी। वह अफीम मिली शराब का व्यसनी था, तथा उसके नशे में धुत रहता था (स्मिथ-अकबर दि ग्रेट, पृ. 16)। अबुल फजल के अनुसार उसके हरम में 3000 महिलाएं थीं। साम्राज्य के विस्तार में वह तैमूर लंग की भांति नृशंस, क्रूर तथा छल-कपट में जरा भी नहीं हिचकता था। विशेषकर हेमचन्द्र विक्रमादित्य, महारानी दुर्गावती तथा महाराणा प्रताप के साथ संघर्ष उसके कलंकित चरित्र को सामने लाते हैं। अकबर की इस साम्राज्यवादी प्रवृत्ति की विश्व प्रसिद्ध वामपंथी इतिहासकार डा. रामविलास शर्मा ने भी कटु आलोचना की है (देखें-इतिहास दर्शन)। यह भी सत्य है कि उसकी मध्य एशिया में समरकन्द तथा अपने पूर्वजों की भूमि फरगना जीतने की आकांक्षा अधूरी रही। वह 1595 में केवल कांधार ही जीत सका।
राष्ट्रीयता के प्रतीक कौन?
विचारणीय व गंभीर प्रश्न यह है कि भारतीय राष्ट्रीयता का प्रतीक साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षी अकबर है या देशाभिमान पर शहीद होने वाली रानी दुर्गावती, अथवा भारतीय स्वतंत्रता के लिए मर मिटने वाले हेमचन्द्र विक्रमादित्य या देश की आजादी के लिए जंगलों में भटकने वाले महाराणा प्रताप। 
क्या भारत का राष्ट्रीय पुरुष अकबर है जो छल-कपट तथा दूसरों पर आक्रमण कर उसे जीत लेने के पागलपन से युक्त था, या हेमू जैसा साहसी व्यक्ति, जिसने विदेशी शासन को देश से उखाड़ फेंकने तथा दिल्ली पर स्वदेशी शासन पुन: स्थापित करने का प्रयत्न किया? क्या राष्ट्र का प्रतिनिधि गोंडवाना की रानी पर अकारण आक्रमण करने वाला अकबर है। या शत्रु द्वारा पकड़े जाने व अपमानित होने की आशंका के स्वयं छुरा घोंप कर बलिदान देने वाली रानी? क्या राष्ट्र का प्रेरक चित्तौड़ में 30,000 हिन्दुओं का नरसंहार करने वाला अकबर है, या महाराणा प्रताप का संघर्षमय जीवन, जिन्होंने मुगलों की अजेय सेनाओं को नष्ट कर दिया था।
वस्तुत: विद्वानों द्वारा किसी भी शासक का मूल्यांकन राष्ट्र के जीवन मूल्यों के लिए किए गए उसके प्रयत्नों के रूप में आंका जाना चाहिए। इस दृष्टि से भारत के इतिहास में महाराणा प्रताप का नाम सदैव प्रेरक रहा है, अकबर का नहीं। शचीन्द्रनाथ सान्याल की क्रांतिकारी समिति का कोई भी सदस्य ऐसा नहीं हो सकता था, जो चित्तौड़ के विजय स्तम्भ के नीचे शपथ न ले। तब चित्तौड़ की तीर्थयात्रा तथा हल्दी घाटी का तिलक लगाना अनिवार्य हो गया था। वस्तुत: अंग्रेजों की दासता से मुक्ति दिलाने में महाराणा प्रताप के  नाम ने जादू का काम किया था। मजहबी तथा सांस्कृतिक कुकुत्यों में अकबर भी किसी से कम नहीं था। मूर्छित अवस्था में पड़े हेमचन्द्र विक्रमादित्य का सिर काटकर अल्पायु में भारत में पहली बार 'गाजी' की उपाधि प्राप्त करने वाला अकबर बड़ी धनराशि हज जाने वाले यात्रियों पर लुटाता था। पहले इबादत खाना, फिर मजहर, इसके बाद दीन-ए- इलाही उसके मजहबी प्रयत्न थे। मजहर को उसकी गुप्त भावनाओं से प्रेरित एक पाखण्ड नीति कहा गया है। स्मिथ ने उसकी दीन-ए-इलाही की स्थापना की योजना को मिथ्यास्पद तथा निरकुंश स्वेच्छाचारिता का विकास माना है। (देखें, स्मिथ-अकबर दि ग्रेट, पृ. 160)। यह उल्लेखनीय है कि चाटुकार तथा वामपंथी इतिहासकारों के साथ ब्रिटिश इतिहासकारों ने भी अकबर के शासन की बड़ी प्रशंसा की है। यहां तक कि भारत में अंग्रेजों का अंतिम वायसराय लार्ड माउन्टबेटन भी पाकिस्तान के जन्म पर भाषण देने में अकबर को श्रद्धाञ्जलि देना नहीं भूला (देखें, इंडियन एक्सप्रेस, 14 अगस्त, 1947)।
निरंकुश और बर्बर मुगल
जहांगीर तथा शाहजहां-दोनों ही अत्यधिक मतान्ध तथा विलासी थे। दोनों सुरा के साथ सुन्दरी के भी भूखे थे। अकबर के बिगड़ैल पुत्र जहांगीर ने स्वयं लिखा कि वह प्रतिदिन बीस प्याले शराब पीता था। दोनों ने हिन्दू, जैन तथा सिख गुरुओं को बहुत कष्ट दिए थे। ये दोनों अपने पूर्वजों की भूमि नहीं भूले थे। जहांगीर ने इसी कोशिश में कांधार भी गंवा दिया था। शाहजहां ने मध्य एशिया को जीतने में 12 करोड़ रुपए तथा अपार जनशक्ति लगा दी थी, पर एक इंच भूमि तक नहीं जीत सका। शाहजहां की ही मजहबी कट्टरता तथा असहिष्णुता ने औरंगजेब की प्रतिक्रियावादी शासन पद्धति को जन्म दिया था। उसने भारत को दारुल हरब से दरुल इस्लाम बनाने के सभी घिनौने प्रयत्न किए। उसके ही शासन काल में गुरु तेग बहादुर का बलिदान हुआ, गुरु गोविन्द के चारों पुत्रों का बलिदान हुआ था। इसके बावजूद कुछ चाटुकार तथा वामपंथी इतिहासकारों ने उसे 'जिंदा पीर' का भी खिताब दिया है।
यहां पुन: वही प्रश्न है कि औरंगजेब भारत का राष्ट्रीय शासक था, अथवा शिवाजी तथा गुरु गोविन्द सिंह राष्ट्रीय महापुरुष थे? महादेव गोविन्द रानाडे ने शिवाजी के जन्म को एक महान संघर्ष तथा तपस्या का परिणाम माना है। वामपंथी इतिहासकार औरंगजेब की तुलना में शिवाजी को राष्ट्रीय मानने को तैयार नहीं हैं। उनके संघर्ष को देश के साथ जोड़ने में उन्हें लज्जा आती है। जबकि सर यदुनाथ सरकार जैसे विश्वविख्यात इतिहासकार का कथन है कि शिवाजी जैसा सच्चा नेता सम्पूर्ण मानव जाति के लिए एक अद्वितीय देन है। यह सर्वविदित है कि शिवाजी द्वारा हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना का लक्ष्य औरंगजेब जैसे 'जार' से भिन्न था तथा राष्ट्रभक्तों का संरक्षण था। शिवाजी का लक्ष्य हिन्दू साम्राज्य की स्थापना, हिन्दुत्व की रक्षा तथा भारतभूमि से विदेशी साम्राज्य को नष्ट करना था। हर समय घोड़े की पीठ पर रहने वाले शिवाजी की तुलना पालकी में बैठकर युद्ध करने वाले औरंगजेब से किसी भी प्रकार से न्यायोचित नहीं है।
महान तो ये हैं।
इसी भांति गुरु गोविन्द सिंह जी का व्यक्तित्व तथा कृतित्व भारतीय इतिहास का एक स्वर्णिम पृष्ठ है। गुरु गोेविन्द सिंह ने समस्त समाज को, बिना किसी भेदभाव के भयमुक्त तथा नि:स्वार्थ भावना से ओत-प्रोत किया। औरंगजेब को भेजा जफरनामा (विजय पत्र) उनकी वीरता तथा श्रेष्ठता का प्रतीक है। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना कर सम्पूर्ण राष्ट्र को जीवनदायिनी बूटी दी थी। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि मुगल शासक विदेशी, साम्राज्यवादी, क्रूर, लुटेरे तथा मतान्ध थे। उन्हें न भारत भूमि से कोई लगाव था और न ही भारतीयों से। अभारतीयों को राष्ट्रीय शासक कहना सर्वथा अनुचित है तथा देशघातक है। इसके विपरीत राणा प्रताप, शिवाजी, गुरु गोविन्द सिंह, राणा सांगा, हेमचन्द्र विक्रमादित्य, रानी दुर्गवती विदेशी शासकों को खदेड़ने वाले भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी थे, जिन्होंने भारत में सांस्कृतिक जीवन मूल्यों की पुन:स्थापना के लिए अपने जीवन का सर्वस्व बलिदान दिया।

रविवार, 2 सितंबर 2012

दुनिया का एक मुस्लिम राष्ट्र जहाँ पर देश की राजनीती से खुशहाली तक सभी कार्य हिन्दू रीती से होते हें



सोमवार, 27 अगस्त 2012

ब्रेकिंग न्यूज़ असाउदीन ओवेसी हमास और हिजबुल्लाह समर्थक हें, पूरी जानकारी विथ फोटो के साथ.........



 साथियों क्या भारत धर्मनिरपेक्ष है ? क्या भारत संयुक्तराष्ट्र के सिधांतों को मानता है ? क्या भारत मे हिंदू और मुस्लिम लोगो और उनके नेताओ के बीच भेदभाव नही किया जाता ? यदि हाँ तो फिर राहुल गाँधी का सबसे करीबी दोस्त और यूपीए का सांसद असदुद्दीन ओबैसी भारत और संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हमास और हिजबुल्लाह के खूखार कमांडरों के साथ बार बार मिलने लेबनान के बेरुत और दहिल्या शहर मे क्यों जाता है ?

मित्रों, इजराइली ख़ुफ़िया एजेन्सी मोसाद ने भारत सरकार को कई बार पत्र लिखकर कहा है कि आपका सांसद जो आपकी सरकार को समर्थन दे रहा है वो इजरायल मे आतंकवाद फैला रहा है और साथ ही भारत के गरीब मुस्लिम युवको का ब्रेनवाश करके उन्हें हमास और हिजबुल्लाह के लिए भर्ती करता है | लेकिन चूँकि भारत की कांग्रेस सरकार को सिर्फ हिंदू ही आतंकवादी नजर आते है इसलिए भारत सरकार ओबैसी को खुलेआम छुट दे दिया है |
 
 मित्रों अभी कुछ दिन पहलेसंसद मे आसाम पर चर्चा के दौरान ओबैसी ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की उपस्थिति मे कहा कि "यदि भारत सरकार आसाम मे मुसलमानों का चाहे वो प्रवासी क्यों न हो ठीक ढंग से पुनर्वास नही करती और उन्हें उचित मुवावजा नही देती तो फिर भारत का मुसलमान इस देश की ईंट से ईंट बजा देंगे" लेकिन किसी भी कांग्रेसी सांसद ने ओबैसी के इस बयान की निंदा नही की | और तो और मीडिया ने भी इसको ब्रेकिंग न्यूज़ नही बताया सिर्फ टाइम्स नाउ ने ही इस खबर पर चर्चा की।

सबसे बड़ा चौकने वाला खुलासा ये है, कि ओबैसी को डिप्लोमेटिक पासपोर्ट राहुल गाँधी की सिपारिश पर मिला हें। जबकि खुद आन्ध्रप्रदेश की कांग्रेस-सरकार की ख़ुफ़िया पुलिस ने ओबैसी को डिप्लोमेटिक पासपोर्ट न देने की रिपोर्ट भेजी थी, लेकिन जब राहुल गाँधी ने इस मामले मे हस्तक्षेप किया, जब जाकर विदेश मंत्रालय ने ओबैसी को बिना किसी योग्यता और अहर्ता के डिप्लोमेटिक पासपोर्ट इस्शु कर दिया |

   साधारण  पासपोर्ट का कलर नीला होता है बल्कि डिप्लोमेटिक पासपोर्ट का कलर मैरून होता है, और डिप्लोमेटिक पासपोर्ट रखने वाले व्यक्ति की किसी भी हवाईअड्डे पर तलाशी नही होती, और इन्हें "वीजा आन अराइवल" की भी सुविधा होती है, और ये पासपोर्ट केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केबिनेट स्तर के मंत्री और राज्यों मे मुख्यमन्त्रियो और राजदूत तथा दूतावास मे सचिव स्तर के अधिकारियों  को ही इशु हो सकता है | 

  हिजबुल्लाह आज विश्व का सबसे बड़ा आत्मघाती दस्ते वाला आतंकवादी संगठन है। जो छोटे छोटे बच्चो को अपने आत्मघाती दस्ते मे भर्ती करता है | लेबनान पहले धर्मनिरपेक्ष देश था ,और वहाँ ४% हिंदू और १०% यहूदी  भी रहते थे | लेबनान जहां पहले ८०% ईसाई तथा अन्य धर्म और २०% मुस्लिम रहते थे और लेबनान विश्व का बहुत तेजी से तरक्की करता हुआ मुल्क था | और इसकी राजधानी बेरुत को विश्व का गोल्ड केपिटल कहा जाता था। क्योकि बेरुत विश्व की सबसे बड़ी सोने की मण्डी थी | इतना ही नही खूबसूरत लेबनान मे कई हालीवुड और वालीवुड की फिल्मो की शूटिंग होती थी | रामानंद सागर ने सत्तर के दशक मे धर्मेन्द्र और माला सिन्हा को लेकर एक फिल्म बनाई थी जिसका नाम "आखें' उस फिल्म की 80% शूटिंग बेरुत मे हुई थी और कई गाने जैसे "मिलती है जिंदगी मे मोहब्बत कभी कभी" की शूटिंग भी बेरुत मे ही हुई |

लेकिन लेबनान की तरक्की और खुशहाली पर  लेबनान  के मुस्लिम लीडरो ने ग्रहण लगा दिया |मस्जिदों मे और अपने सम्मेलनों में मुसलमानों को खूब बच्चे पैदा करके लेबनान पर क्ब्ज्जा करने की बाते करते थे | फिर धीरे धीरे लेबनान का जनसंख्या का संतुलन बिगड गया, और फिर लेबनान 25 सालो से गृहयुद्ध की चपेट मे आ गया | आज लेबनान के दो हिस्से है उत्तरी लेबनान जिसमे ईसाई और अन्य धर्मो के लोग रहते है, और दक्षिण लेबनान जहां मुस्लिम रहते है, उसी तरह राजधानी बेरुत के भी दो अघोषित हिस्से है, जहां एक तरह ईसाई और दूसरी तरफ मुस्लिम रहते है |
 दोस्तों जब भी कोई सांसद विदेश यात्रा करता है, तो उसे लोकसभा अध्यक्ष की लिखित अनुमति लेनी पडती है, भले ही वो उसकी निजी यात्रा ही क्यों न हो | एक आरटीआई के जबाब मे मीरा कुमार ने पहले बताया कि उनके पास ऐसी कोई फ़ाइल नही आई, जिसमे ओबैसी ने लेबनान और सीरिया के यात्रा की अनुमति मांगी हो |

  अब सवाल ये उठता है कि आखिर इतना घोर साम्प्रदायिकता फ़ैलाने वाले ओबैसी को कांग्रेस साम्प्रदायिक क्यों नही मानती ? 

साथियों कांग्रेस की नजर मे  सिर्फ भारत के हिंदू ही साम्प्रदायिक है | अगर कोई भारत मे हिंदू हित की बात करेगा, तो वो घोर साम्प्रदायिक और राजनितिक रूप से अछूत बन जायेगा | पूरी मीडिया और कांग्रेस सहित कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाली छोटी पार्टियां सब उसको साम्प्रदायिक घोषित कर देंगे | लेकिन यदि कोई सिर्फ मुस्लिम हित की ही बात करेगा, तो वो धर्मनिरपेक्ष माना जायेगा | यहाँ मैंने "सिर्फ" इसलिए लिखा है क्योकि ओबैसी ने आज तक संसद मे सिर्फ मुस्लिम हित, और मुस्लीमों के बारे मे ही मुद्दे उठाये है। और सिर्फ मुस्लिम लोगो की ही मदद करते है, यहाँ तक आसाम मे भी जो उन्होंने रिलीफ कैम्प लगाया, उसके उपर लिख दिया " only for muslims" इन्होने सानिया मिर्जा को कई बार सम्मानित किया, लेकिन जब एक पत्रकार ने इसने पूछा कि आप सानिया नेहवाल को कब सम्मानित करेंगे तो इन्होने माइक फेक दिये |
   आंध्रप्रदेश की कांग्रेस सरकार की ही आईबी हैदराबाद मे भडके कई दंगो के लिए ओबैसी बंधुओ को जिम्मेदार बताती है। यहाँ तक की केन्द्र की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने भी कई बार गृहमंत्रालय को ओबैसी के संदिग्ध गतिबिधियों के बारे मे चेतावनी दी है | लेकिन सब बेकार |

सोचिये क्या राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी नरेंद्र मोदी या तोगड़िया या अशोक सिंघल जी के साथ फोटो खिचवा सकते है ? नही क्योकि ये लोग तो हिन्दुवादी है और भारत मे हिन्दुवादी होना सबसे बड़ा अपराध है |
 
 लेकिन वही राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी ओबैसी के साथ कई कई घंटो तक बैठते है और उसके साथ फोटो खिचवाते है | क्योकि सोनिया ने जो काला कानून "साम्प्रदायिक हिंसा निवारण बिल" बनाया था, उसके अनुसार तो सिर्फ हिंदू ही दंगाई होते है, हिंदू हिंसक होते है और हर बार सिर्फ हिंदू ही पहले दंगे भड़काते है |

मित्रों, सबसे बड़ा सवाल ये है कि भारत की मीडिया और कांग्रेस की हिन्दुओ के बारे मे इस दोगली मानसिकता का जिम्मेदार कौन है ? 

मित्रों, इसके जिम्मेदार हम सब हिंदू  खुद ही है | ये हम हिंदू ही है जो सब कुछ जानते समझते हुए भी जतिपति और दूसरे छोटे छोटे मुद्दों और कांग्रेस के द्वारा दिये गए झूठे लालचो और प्रलोभनों के बहकावे मे आकर इस कांग्रेस को वोट देकर इसे मजबूत करते है | हिंदू मित्रों, अपने बारे मे तो नही कम से कम पचास साल बाद आने वाली अपनी हिंदू पीढियों के बारे मे सोचो | जो हाल पाकिस्तान, सीरिया, लेबनान, इंडोनेशिया, फिलीपींस और भारत मे कश्मीर, केरल और आसाम मे हिन्दुओ के साथ हुआ है और जो आज हिंदू इन जगहों पर पर अत्याचार झेल रहे है वही आज के पचास सालो के बाद पूरे भारत मे झेलेंगे |
जय हिंद !!! जय भारत !!! वन्देमातरम ! 



शनिवार, 18 अगस्त 2012

बिहार में 3 मुस्लिमो द्वारा हिन्दू युवती का बलात्कार, कहाँ हें गुजरात गोरव मोदी की बुराई करने वाली नितीश की फर्जी सरकार......


कहाँ हें गुजरात गोरव मोदी की बुराई करने वाली नितीश की फर्जी सरकार ?
बिहार के अररिया जिले के सिमराहा की एक युवती के साथ 3 मुस्लिम युवको ने बलात्कार कर दिया, और इस मामले में लड़की को न्याय के नाम पर अन्याय का शिकार होना पड़ा है। अररिया में सिलाई का काम कर घर लौट रही एक युवती के साथ बुधवार को सामूहिक बलात्कार करने का मामला जब बृहस्पतिवार सुबह गांव की पंचायत में आया तो न्याय दिलाने के बजाय उसके साथ एक और अन्याय हुआ। यहां कुछ लोगों ने मिलकर उसके बाल काट दिए और जमकर पिटाई भी कर दी साथ ही आवारा बदचलन होने के आरोप लगा डाले। 
मामले की सूचना मिलने पर थाने से दो पुलिस कर्मी पहुंचे, लेकिन उन्होंने भी पंचायत के माध्यम से मामले को सुलझा लेने की सलाह दे डाली। परिजनों ने शुक्रवार को युवती को सदर अस्पताल अररिया में भर्ती कराया। वहां के चिकित्सक ने थाने को सूचित किया, तब पुलिस ने बयान दर्ज किया है। युवती सिमराहा थाना क्षेत्र की रहने वाली है। वह चौक पर सिलाई का कार्य कर घर लौट रही थी। इसी दौरान गांव के नसीम, मुख्तार व रजी ने मुंह में जबरन कपड़ा ठूंस दिया, और पकड़ कर जंगल में ले गए। तीनों ने उसके साथ बलात्कार किया। अगले दिन सुबह युवती अचेतावस्था में मिली। परिजनों का आरोप है कि एक पंचायत प्रतिनिधि द्वारा आरोपी युवकों के परिजनों से 30 हजार रुपये लेकर उन्हें छोड़ दिया गया।