उत्तर प्रदेश में बागपत जिले के असारा गांव के बाद अब सहारनपुर के घाटमपुर गांव में 36 बिरादरियों की पंचायत में भी तालिबानी फरमान सुनाया गया है। पंचायत ने बाजार में महिलाओं की खरीदारी पर रोक लगा दी है। इसका उल्लंघन करने पर 500 रुपये जुर्माना होगा। अगर खुले में कोई मोबाइल से गाना बजाता सुना गया, तो उस पर 1500 रुपये का जुर्माना लगेगा। पंचायत ने शराब, गुटखा आदि के सेवन को भी प्रतिबंधित किया है।
सोमवार को गंगोह ब्लॉक के मुस्लिम गुर्जर बहुल घाटमपुर गांव के मदरसे में यह पंचायत आयोजित की गई। अध्यक्षता करने वाले सरपंच अयूब ने बताया कि महिलाएं खरीदारी के लिए बाजार में नहीं जाएंगी। महिलाएं घर के बाहर नल पर पानी नहीं भर सकेंगी। पंचायत ने पांच-पांच व्यक्तियों की छह टीमें बनाई हैं, जो गांव में घूमकर निगरानी करेंगी और दोषी से निर्धारित जुर्माना वसूलेंगी। विरोध करने पर दोगुना जुर्माना होगा। इस मामले में जब एसएसपी डीसी मिश्रा का कहना है कि पंचायत का मामला उनके संज्ञान में नहीं है, लेकिन अगर कानून के खिलाफ कुछ हुआ, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। सरपंच अयूब का कहना है कि गांव की बिगड़ती छवि को मद्देनजर ये फैसले लिए गए हैं।
जामिया इमाम मदरसा अनवर, देवबंद के सदर मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है कि, ऐसे फैसले कौम के लिए अच्छी बात हैं। लेकिन इन्हें बंदूक की नोक पर लागू न किया जाए। जरूरत पड़े तो लोगों को समझाया जाए। फरमान लोगों के लिए दिक्कत का कारण न बने। उल्लेखनीय है कि इससे पहले जुलाई माह में बागपत के असारा गांव में 36 बिरादरियों की पंचायत में भी ऐसे ही फरमान जारी किए गए थे। इसमें प्रेम विवाह करने वालों को गांव छोड़ने का फरमान भी था। पंचायत करने वालों का पुलिस से संघर्ष भी हुआ था, और बाद में प्रेम विवाह करने वाले एक परिवार के पांच लोगों का कत्ल भी किया गया।
सोमवार को गंगोह ब्लॉक के मुस्लिम गुर्जर बहुल घाटमपुर गांव के मदरसे में यह पंचायत आयोजित की गई। अध्यक्षता करने वाले सरपंच अयूब ने बताया कि महिलाएं खरीदारी के लिए बाजार में नहीं जाएंगी। महिलाएं घर के बाहर नल पर पानी नहीं भर सकेंगी। पंचायत ने पांच-पांच व्यक्तियों की छह टीमें बनाई हैं, जो गांव में घूमकर निगरानी करेंगी और दोषी से निर्धारित जुर्माना वसूलेंगी। विरोध करने पर दोगुना जुर्माना होगा। इस मामले में जब एसएसपी डीसी मिश्रा का कहना है कि पंचायत का मामला उनके संज्ञान में नहीं है, लेकिन अगर कानून के खिलाफ कुछ हुआ, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। सरपंच अयूब का कहना है कि गांव की बिगड़ती छवि को मद्देनजर ये फैसले लिए गए हैं।
जामिया इमाम मदरसा अनवर, देवबंद के सदर मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है कि, ऐसे फैसले कौम के लिए अच्छी बात हैं। लेकिन इन्हें बंदूक की नोक पर लागू न किया जाए। जरूरत पड़े तो लोगों को समझाया जाए। फरमान लोगों के लिए दिक्कत का कारण न बने। उल्लेखनीय है कि इससे पहले जुलाई माह में बागपत के असारा गांव में 36 बिरादरियों की पंचायत में भी ऐसे ही फरमान जारी किए गए थे। इसमें प्रेम विवाह करने वालों को गांव छोड़ने का फरमान भी था। पंचायत करने वालों का पुलिस से संघर्ष भी हुआ था, और बाद में प्रेम विवाह करने वाले एक परिवार के पांच लोगों का कत्ल भी किया गया।

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