गत तीन महीने में भारत और बांग्लादेश की सीमा पर करीब 70 महिलाओं और बच्चों को मानव तस्करों से बचाया है। अक्सर लड़कियों को हनीमून के लिए जाने वाले जोड़े के रूप में ले जाया जाता है। तस्कर अपना रास्ता और तरीका बदलते रहते हैं। गरीब लड़कियों और महिलाओं को मानव तस्कर विदेश में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर फांस लेते हें, पर्यटन, नौकरी व शादी के फर्जी प्रस्तावों सहित मानव तस्करी के नौ तरीके सामने आए हैं। दुखद पहलू यह है कि तस्करों से बचाई गईं लडकियों से चला हे की, लड़कियां या युवतियां बेहतर जीवन की उम्मीद में सीमा पार जाने के लिए तस्करों के साथ सहयोग करती हैं। और यहाँ आकर फंस जाती हें । भारत में लाने के बाद इन्हें अवेध और गेर क़ानूनी कार्यो में खपाया जाता हें, या इन्हें जिस्मफरोशी के दलदल में धकेल दिया जाता हें। असम में इन्ही कारणों से अवेध बंगलादेशियो की संख्या बढती ही जा रही हें ।
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