शनिवार, 29 दिसंबर 2012
शुक्रवार, 21 सितंबर 2012
समझदारी से लिया काम लोकसभा चुनाव की एडवांस तेयारी, आज होगी विदाई ममता की लुटेरो की सरकार से ....
खुदरा क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश की सीमा 51 प्रतिशत किए जाने, डीजल की कीमत पांच रुपये बढ़ाने और एक साल में रियायती दर पर केवल छह एलपीजी सिलेंडर देने के फैसले के विरोध में ममता बनर्जी ने मंगलवार को संप्रग से बाहर आने का एलान किया था। उन्होंने इन फैसलों से पीछे हटने के लिए केंद्र सरकार को 72 घंटे का मौका भी दिया। लेकिन 48 घंटे गुजर जाने के बाद ऐसा नहीं लग रहा कि केंद्र ममता की मांग को गंभीरता से ले रहा है। उल्टे तृणमूल कांग्रेस की समर्थन वापसी से पैदा हुई स्थिति से निपटने में कांग्रेस लगी हुई है। पार्टी की तरफ से आ रहे बयानों में सरकार की स्थिरता पर पूरा भरोसा व्यक्त किया जा रहा है। इसी के बाद गुरुवार को ममता बनर्जी ने कोलकाता में साफ कर दिया कि शुक्रवार को उनकी पार्टी के सभी मंत्री प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को इस्तीफा सौंप देंगे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मुलाकात का समय मांगा गया है, जैसे ही समय मिलता है, पार्टी नेता उनसे मिलकर 19 लोकसभा सदस्यों के समर्थन वापसी का पत्र उन्हें देंगे।
ममता ने कहा, एफडीआइ के मुद्दे पर हम कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं और न ही वह अपनी मांगों पर कांग्रेस नेताओं से बातचीत के लिए नई दिल्ली जाएंगी। ममता के रुख साफ कर दिए जाने से मनमोहन सरकार के अल्पमत में आने का खतरा पैदा हो गया है। घोषित तौर पर सरकार समर्थक लोकसभा सदस्यों की संख्या 273 से घटकर 254 रह जाएगी। इसके बाद पार्टी को बाहरी समर्थन का मोहताज होना पड़ेगा।
केंद्र सरकार से समर्थन वापसी के फैसले से बढ़ी सियासी तपिश के बीच तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कहा है कि उनके फोन टैप किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार उनकी योजनाओं की जानकारी के लिए ऐसा कर रही है। वह खुद केंद्र सरकार में रही हैं, इसलिए उन्हें इन तरीकों के बारे में पता हें ।
अपने को ईमानदार साबित करने के लिए, 100 करोड़ खर्च करेगी कांग्रेस ....
कोयले की कालिख से छुटकारा पाने के लिए बेचैन कांग्रेस की सरकार अपना चेहरा
चमकाने पर 100 करोड़ रुपये केवल विज्ञापनों खर्च करेगी। भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रही
सरकार अपनी साफ-सुथरी छवि जनता के बीच लाने की योजना बना रही है। यानी कांग्रेस अपने को इमानदार साबित करने के लिए 100 करोड़ का खर्चा गरीबो का खून चूस कर इकट्ठे किये पेसो से ही करेगी ।
टेलीविजन, रेडियो और प्रिंट मीडिया के जरिए ऐसा करने के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इस राशि का इस्तेमाल विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) सरकार के लिए एक मजबूत प्रचार अभियान चलाने के लिए करेगा। खबरों के मुताबिक, भारत निर्माण एडवर्टाइजर्स जो यूपीए सरकार की छवि निखारो अभियान का हिस्सा है, विज्ञापन में स्थानीय कलाकारों को उतारेगा। अन्य कॉरपोरेट की तरह सरकार भी नकारात्मक छवि से मुक्त होने के लिए ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल नेटवर्क साइटों का इस्तेमाल करेगी।
वहीं, अपनी नीतियों और कार्यक्रमों के प्रचार के लिए केंद्र सरकार अब सोशल मीडिया यू-ट्यूब का सहारा ले रही है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सरकार के कुछ महत्वपूर्ण सम्मेलनों, भाषणों और इससे संबंधित वीडियो को चार दिन पहले यू-ट्यूब पर डाला है। कैसे इस माध्यम से लोगों तक पहुंचा जाए इस पर विचार के लिए करीब तीन महीने पर शीर्ष अधिकारियों की बैठक होगी।
गुरुवार, 20 सितंबर 2012
एक और कारगिल की तेयारी में जुटा पाक, सियाचिन से भारतीय सेना हटाने के लिए पीछे पड़ा पाक.....
केसे कहें की हम आजाद हें, आज भी अंग्रेजी कानून की पालना में जुटी भारतीय पुलिस........
लाला
लाजपात राय अंग्रेजो के खिलाफ़ लड़ रहे थे । अंग्रेजी पुलिस ने उनके सिर
में लाठिया मार मार के उनको मार दिया । आजादी के 64 साल बाद 4 जून 2012 को
भ्रष्ट कांग्रेस की केंद्र सरकार के खिलाफ़ आन्दोलन कर रहे लोगो में शामिल
बहन राजबाला को पुलिस ने डंडे मार मार उनकी हत्या कर दी। आजादी के 64 साल
बाद आज भी पुलिस आन्दोलन करने वाले भारतवासियो को वैसे ही डंडे मारती हें,
जैसे अंग्रेजो की पुलिस मारती तो थी, तो कैसे कहें की हम आजाद हैं ?
__________________________ __________________________ ___________________
आखिर ये पुलिस बनी कब ?????????
10 मई 1857 को जब देश में क्रांति हो गई । और भारतवासियों ने पूरे देश में 3 लाख अंग्रेजो को मार डाला । उस समय क्रांतिकारी थे मंगल पांडे, तांतिया टोपे, नाना साहब पेशवा आदि । लेकिन कुछ गद्दार राजाओ के वजह से अंग्रेज दुबारा भारत में घुस आयें । और दुबारा अंग्रेजो को भगाने के लिये 1857 से लेकर 1947 तक पुरे 90 साल लग गये । और इसके लिये भगत सिहं,उधम सिहं , चंद्र शेखर आजाद ,राम प्रसाद बिसमिल, सुभाष चन्द्र बोस जैसे 7 लाख 32 हजार क्रान्तिवीरो को अपनी जान देनी पड़ी । जब अंग्रेज दुबारा भारत में आये, तब उन्होने फ़ैसला किया कि अब हम भारतवासियों को सीधे मारेंगे पीटेंगे नहीं । अब हम इनको कानून बना कर मारेंगे और गुलाम रखेंगे । उनको डर था कि 1857 जैसी क्रान्ति दुबारा न हो जाये । तब अंग्रेजो ने इंडियन POLICE ACT बनाया । नाम मे indian लिखा है !लेकिन indian कुछ नहीं इसमे !! और पुलिस बनायी । उसमे एक धारा बनाई गई right to offence | इसका मतलब था, और हें की पुलिस वाला आप पर जितनी मर्जी लाठिया मारे, पर आप कुछ नहीं कर सकते और अगर आपने लाठी पकड़ने की कोशिश की, तो आप पर मुकद्दमा चलेगा । इसी कानून के आधार पर सरकार आन्दोलन करने वालो पर लाठिया बरसाया करती थी । फ़िर ऐसी ही एक धारा 144 बनाई गई, ताकि लोग सरकार की गलत नीतियों का विरोध करने के लिए इकट्ठे ना हो सके । ऐसे ही कुछ और खतरनाक कानुन बनाने के लिये साईमन कमीशन भारत आने वाला था । क्रान्तिकारी लाला लाजपत राय जी ने उसका शान्तिपूर्ण तरीके से विद्रोह कर रहे थे । अंग्रेजी पुलिस के एक अफ़सर सांडर्स ने उन के सर पर लाठिया बरसानी शुरु कर दी । एक लाठी मारी ,दो मारी ,तीन ,चार ,पांच करते करते 14 लाठिया मारी । नतीजा ये हुआ लाला जी के सर से खून ही खून बहने लगा, उनको अस्तपताल लेकर गये, ज्यादा खून बहने से वहां उनकी मौत हो गई । लोगो ने कहा हत्यारे सांडर्स को सज़ा मिलनी चाहिए | इसके लिये शहीदेआजम भगत सिंह ने अदालत में सांडर्स मुकद्दमा कर दिया । सुनवाई हुई । अंग्रेजी अदालत ने फैसला दिया कि लाला पर जी जो लाठिया मारी गई है, वो कानून के आधार पर मारी गई है, अब इसमे उनकी मौत हो गई तो अंग्रेज सरकार की कोई गलती नही हें | उनके अनुसार हम क्या करे इसमे कुछ भी गलत नहीं है ।नतीजा सांडर्स को बाइज्जत बरी कर दिया गया । तब भगत सिंह को गुस्सा आया, उसने कहा जिस अंग्रेजी न्याय व्यवस्था ने लाला जी के हत्यारे को बाईज्जत बरी कर दिया । उसको सज़ा मैं दुंगा । और इसे वहीं पहुँचाउगा, जहाँ इसने लाला जी पहुँचाया है । और जैसा आप जानते फ़िर भगत सिंह ने सांड्र्स को गोली से उड़ा दिया । और फ़िर भगत सिंह को इसके लिये फ़ांसी की सज़ा हुई ।
जिंदगी के अंतिम दिनो जब भगत सिंह लाहौर जेल में बंद थे, तो बहुत से पत्रकार उनसे मिलने जाया करते थे । और भगत सिंह से पुछा उनकी कोई आखिरी
इच्छा और देश के युवाओ के लिये कोई संदेश ? तब शहीदे आजम भगत सिंह ने कहा कि मैं देश के नौजवानो से उम्मीद करता हूँ ।
कि जिस indian police act के कारण लाला जी जान गई । जिस indian police एक्ट के आधार मैं फ़ांसी चढ़ रहा हूँ । मै आशा करता हुं, इस देश के नौजवान आजादी मिलने से पहले पहले इस indian police act खत्म करवां देगें ।ये मेरी भावना है | यही मेरे दिल की इच्छा है । लेकिन ये बहुत शर्म की बात है अजादी मिलने के बाद जिन लोगो ने देश कि सत्ता संभाली । उन्होने अंग्रेजो का भारत को बरबाद करने के लिये बनाये गये कानुनो में से एक भी कानुन नही बदला । बहुत शर्म की बात है, आजादी के ६४ साल बाद आज भी इस कानून को हम खत्म नहीं करवा पाये । आज भी आप देखो indian police act के आधार पर पुलिस देश वासियो पर कितना जुल्म करती है । कभी अंदोलन करने वाले किसनो को डंडे मारती है । कभी औरत को डंडे मारती है । सरकार के खिलाफ़ किसी भी तरह का अंदोलन किया जाता है । तो पुलिस आकर निर्दोष लोगो को डंडे मारने शुरु कर देती है । आज तक किसी भी राजा ने पुलिस नही बनाई सबकी सेना हुआ करती थी | अंग्रेजो ने पुलिस और indian police act क्रान्तिकारियों को लाठियो से पीटने और अपना बचाव करने के लिय़े बनाया था । और आजादी के 64 साल बाद भी ये पुलिस सरकार में बैठे काले अंग्रेजो की हितो की रक्षा करती है ।और सरकार के खिलाफ़ आन्दोलन करने वालो को वैसे ही पीटती है । जैसे अंग्रेजो कि पुलिस पीटा करती थी ।
और सबसे ताज़ी घटना 4 जून की वो भयानक रात, जब काला धन वापिस लाने के लिये रामलीला मैदान में सोये हुए देश भक्तो पर आधी रात को काले अंग्रेजो के कहने पर लाठिया बरसाई । इसमे सेकड़ो लोग घायल हो गये । और लाला लाजपत राय की तरह बहन राजबाला को लाठिया मार मार कर मार डाला ।
आज हर साल 23 मार्च को हम भगत सिंह का शहीदी दिवस मानाते हैं । लाला लाजपत राय का शहीदी दिवस मानाते हैं । किस मुँह से हम उनको श्रधांजलि
अर्पित करे । कि लाला लाजपत राय जी, जिस कानून के आधार आपको लाठिया मारी गई, और आपकी हत्या कर दी गयी, उस कानून को हम आजादी के 64 साल बाद भी हम खत्म नहीं करवा पाये । किस मुँह से हम भगत सिंह को श्रधान्जली दे ? कि भगत सिंह जी जिस अंग्रेजी कानून के आधार पर आपको फ़ासी की सज़ा हुई । आजादी के 64 साल बाद भी हम उसको सिर पर ढो रहे हैं । आज आजादी के 64 साल बाद भी पुलिस आन्दोलन करने वाले भारत वासियो को वैसे ही डंडे मारती हें, जैसे अंग्रेजो की पुलिस मारती तो थी तो कैसे ख सकते हें की हम आजाद हैं|
यह तो थी एक indian police act की कहानी ! अंग्रेज़ो ने ऐसे 34700 कानून भारत को गुलाम बनाने के लिए बनाए थे ! और बहुत शर्म की बात है !वो सारे
के सारे कानून आज भी वैसे के वैसे देश चल रहे हैं !! एक भी कानून को हम बदल नहीं पाये ! बस फर्क इतना है पहले गोरे अंग्रेज़ शासन करते थे, आज काले अंग्रेज़ शासन कर रहे हैं |
__________________________
आखिर ये पुलिस बनी कब ?????????
10 मई 1857 को जब देश में क्रांति हो गई । और भारतवासियों ने पूरे देश में 3 लाख अंग्रेजो को मार डाला । उस समय क्रांतिकारी थे मंगल पांडे, तांतिया टोपे, नाना साहब पेशवा आदि । लेकिन कुछ गद्दार राजाओ के वजह से अंग्रेज दुबारा भारत में घुस आयें । और दुबारा अंग्रेजो को भगाने के लिये 1857 से लेकर 1947 तक पुरे 90 साल लग गये । और इसके लिये भगत सिहं,उधम सिहं , चंद्र शेखर आजाद ,राम प्रसाद बिसमिल, सुभाष चन्द्र बोस जैसे 7 लाख 32 हजार क्रान्तिवीरो को अपनी जान देनी पड़ी । जब अंग्रेज दुबारा भारत में आये, तब उन्होने फ़ैसला किया कि अब हम भारतवासियों को सीधे मारेंगे पीटेंगे नहीं । अब हम इनको कानून बना कर मारेंगे और गुलाम रखेंगे । उनको डर था कि 1857 जैसी क्रान्ति दुबारा न हो जाये । तब अंग्रेजो ने इंडियन POLICE ACT बनाया । नाम मे indian लिखा है !लेकिन indian कुछ नहीं इसमे !! और पुलिस बनायी । उसमे एक धारा बनाई गई right to offence | इसका मतलब था, और हें की पुलिस वाला आप पर जितनी मर्जी लाठिया मारे, पर आप कुछ नहीं कर सकते और अगर आपने लाठी पकड़ने की कोशिश की, तो आप पर मुकद्दमा चलेगा । इसी कानून के आधार पर सरकार आन्दोलन करने वालो पर लाठिया बरसाया करती थी । फ़िर ऐसी ही एक धारा 144 बनाई गई, ताकि लोग सरकार की गलत नीतियों का विरोध करने के लिए इकट्ठे ना हो सके । ऐसे ही कुछ और खतरनाक कानुन बनाने के लिये साईमन कमीशन भारत आने वाला था । क्रान्तिकारी लाला लाजपत राय जी ने उसका शान्तिपूर्ण तरीके से विद्रोह कर रहे थे । अंग्रेजी पुलिस के एक अफ़सर सांडर्स ने उन के सर पर लाठिया बरसानी शुरु कर दी । एक लाठी मारी ,दो मारी ,तीन ,चार ,पांच करते करते 14 लाठिया मारी । नतीजा ये हुआ लाला जी के सर से खून ही खून बहने लगा, उनको अस्तपताल लेकर गये, ज्यादा खून बहने से वहां उनकी मौत हो गई । लोगो ने कहा हत्यारे सांडर्स को सज़ा मिलनी चाहिए | इसके लिये शहीदेआजम भगत सिंह ने अदालत में सांडर्स मुकद्दमा कर दिया । सुनवाई हुई । अंग्रेजी अदालत ने फैसला दिया कि लाला पर जी जो लाठिया मारी गई है, वो कानून के आधार पर मारी गई है, अब इसमे उनकी मौत हो गई तो अंग्रेज सरकार की कोई गलती नही हें | उनके अनुसार हम क्या करे इसमे कुछ भी गलत नहीं है ।नतीजा सांडर्स को बाइज्जत बरी कर दिया गया । तब भगत सिंह को गुस्सा आया, उसने कहा जिस अंग्रेजी न्याय व्यवस्था ने लाला जी के हत्यारे को बाईज्जत बरी कर दिया । उसको सज़ा मैं दुंगा । और इसे वहीं पहुँचाउगा, जहाँ इसने लाला जी पहुँचाया है । और जैसा आप जानते फ़िर भगत सिंह ने सांड्र्स को गोली से उड़ा दिया । और फ़िर भगत सिंह को इसके लिये फ़ांसी की सज़ा हुई ।
जिंदगी के अंतिम दिनो जब भगत सिंह लाहौर जेल में बंद थे, तो बहुत से पत्रकार उनसे मिलने जाया करते थे । और भगत सिंह से पुछा उनकी कोई आखिरी
इच्छा और देश के युवाओ के लिये कोई संदेश ? तब शहीदे आजम भगत सिंह ने कहा कि मैं देश के नौजवानो से उम्मीद करता हूँ ।
कि जिस indian police act के कारण लाला जी जान गई । जिस indian police एक्ट के आधार मैं फ़ांसी चढ़ रहा हूँ । मै आशा करता हुं, इस देश के नौजवान आजादी मिलने से पहले पहले इस indian police act खत्म करवां देगें ।ये मेरी भावना है | यही मेरे दिल की इच्छा है । लेकिन ये बहुत शर्म की बात है अजादी मिलने के बाद जिन लोगो ने देश कि सत्ता संभाली । उन्होने अंग्रेजो का भारत को बरबाद करने के लिये बनाये गये कानुनो में से एक भी कानुन नही बदला । बहुत शर्म की बात है, आजादी के ६४ साल बाद आज भी इस कानून को हम खत्म नहीं करवा पाये । आज भी आप देखो indian police act के आधार पर पुलिस देश वासियो पर कितना जुल्म करती है । कभी अंदोलन करने वाले किसनो को डंडे मारती है । कभी औरत को डंडे मारती है । सरकार के खिलाफ़ किसी भी तरह का अंदोलन किया जाता है । तो पुलिस आकर निर्दोष लोगो को डंडे मारने शुरु कर देती है । आज तक किसी भी राजा ने पुलिस नही बनाई सबकी सेना हुआ करती थी | अंग्रेजो ने पुलिस और indian police act क्रान्तिकारियों को लाठियो से पीटने और अपना बचाव करने के लिय़े बनाया था । और आजादी के 64 साल बाद भी ये पुलिस सरकार में बैठे काले अंग्रेजो की हितो की रक्षा करती है ।और सरकार के खिलाफ़ आन्दोलन करने वालो को वैसे ही पीटती है । जैसे अंग्रेजो कि पुलिस पीटा करती थी ।
और सबसे ताज़ी घटना 4 जून की वो भयानक रात, जब काला धन वापिस लाने के लिये रामलीला मैदान में सोये हुए देश भक्तो पर आधी रात को काले अंग्रेजो के कहने पर लाठिया बरसाई । इसमे सेकड़ो लोग घायल हो गये । और लाला लाजपत राय की तरह बहन राजबाला को लाठिया मार मार कर मार डाला ।
आज हर साल 23 मार्च को हम भगत सिंह का शहीदी दिवस मानाते हैं । लाला लाजपत राय का शहीदी दिवस मानाते हैं । किस मुँह से हम उनको श्रधांजलि
अर्पित करे । कि लाला लाजपत राय जी, जिस कानून के आधार आपको लाठिया मारी गई, और आपकी हत्या कर दी गयी, उस कानून को हम आजादी के 64 साल बाद भी हम खत्म नहीं करवा पाये । किस मुँह से हम भगत सिंह को श्रधान्जली दे ? कि भगत सिंह जी जिस अंग्रेजी कानून के आधार पर आपको फ़ासी की सज़ा हुई । आजादी के 64 साल बाद भी हम उसको सिर पर ढो रहे हैं । आज आजादी के 64 साल बाद भी पुलिस आन्दोलन करने वाले भारत वासियो को वैसे ही डंडे मारती हें, जैसे अंग्रेजो की पुलिस मारती तो थी तो कैसे ख सकते हें की हम आजाद हैं|
यह तो थी एक indian police act की कहानी ! अंग्रेज़ो ने ऐसे 34700 कानून भारत को गुलाम बनाने के लिए बनाए थे ! और बहुत शर्म की बात है !वो सारे
के सारे कानून आज भी वैसे के वैसे देश चल रहे हैं !! एक भी कानून को हम बदल नहीं पाये ! बस फर्क इतना है पहले गोरे अंग्रेज़ शासन करते थे, आज काले अंग्रेज़ शासन कर रहे हैं |
बुधवार, 19 सितंबर 2012
ये पोस्ट जरुर पढ़े और शेयर भी करे, आप सब से हाथ जोड़ कर निवेदन हें, सारे दलो के नेता मोदी को हराने के पीछे पड़े, अकेला पड़ता एक विकास पुरुष......
गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा व काग्रेस समेत करीब एक दर्जन
राजनीतिक दल मैदान में कूद चुके है। काग्रेस, जीपीपी, राकापा, जदयू, लोजपा,
शिवसेना, सपा व बसपा सहित हर दल के निशाने पर गुजरात गोरव मुख्यमंत्री
नरेंद्र मोदी
है, जबकि मोदी के निशाने पर प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह व काग्रेस महासचिव
राहुल गाधी। सारी पार्टिया आज मोदी जी के पीछे हाथ धो कर पड़ गयी हें,
क्यों की वो सिर्फ आम जनता के विकास और फायदे के ही काम करते हें, और दुसरे
दल सिर्फ लफ्फासी बाते ही करते हें, और घोटालो के बारे में तो आप जानते ही
हें | अब ये सारे चोर और घोटालेबाज दल और नेता यही चाहते हें, और यही काम
करते आये हें की, जो भी इस देश का या जनता का विकास करता हें या करने की
कोशिश भी अगर करता हें तो ये उसे डुबोने में या उसे बहुत भारी अपराधी साबित
करने में लग जाते हें| अब सब मोदी जी के पीछे इसलिए ही पड़े हें क्यों की
उनके द्वारा कराए गये विकास कार्यो की चर्चा भारत में ही नही पुरे विश्व
में हो रही हें |
मोदी जी देश के विकास की बात कर रहे है, जबकि अन्य दल वोट ''कटवा'' बनकर भाजपा और मोदी जी का चुनावी गणित बिगाड़ने की रणनीति पर चल रहे है। देश के आम चुनाव से पहले गुजरात विधानसभा के चुनाव को सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री मोदी व काग्रेस नेता राहुल गाधी का आमना सामना तय है। राजनीतिक बयानबाजी के चलते इस चुनाव पर देश की नजरे टिकी है, मोदी अपनी विवेकानंद युवा यात्रा के जरिए जनसंपर्क में जुटे है, जबकि काग्रेस को अपने स्टार प्रचार राहुल का इन्तजार है। मुख्यमंत्री मोदी अपने शासन के चार हजार दिन पूरे करने के साथ ही मंगलवार को राज्य के 14 हजार सरपंचों का महासम्मेलन आयोजित कर एक बड़े वोट बैंक को साधने की तैयारी में है। इससे पहले मोदी ने गाधीनगर में ही महात्मा मंदिर की स्थापना के दौरान भी प्रदेश के सभी सरपंचों को इसमें भागीदार बनाया था। उधर काग्रेस केंद्र सरकार तथा प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की उपलब्धियों को जनता तक पहुचाकर गुजरात की दशा और दिशा बदलने का भरोसा दे रही है। काग्रेस अपने गुजरात प्रजा विकास दर्शन के जरिए अब तक सात चुनावी घोषणाएं कर चुकी है, जिसमें महिलाओं को आवास, युवाओं को रोजगार, ब्याज मुक्त मोबाइक, मुफ्त शिक्षा व स्वास्थ्य के साथ मुफ्त लेपटॉप देने का झूठा वादा किया गया है।अगर गुजरात की जनता इन चोर कांग्रेसियों के झूठे वादों के चक्कर में पड़ी तो वो अपने विकास पुरुष मोदी को खो देगी | और कांग्रेस फिर से गुजरात को बीमारू राज्यों की लाइन में ला कर पटक देगी | मुख्यमंत्री मोदी अब तक अपने विकास कार्यो के साथ काग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाए हुए है, अब उनके मुद्दों में किराना बाजार में विदेशी निवेश, डीजल के दाम में वृद्धि तथा राहत दरों पर मिलने वाले गैस सिलेंडर भी शामिल हो गए है। मोदी केंद्र के इन फैसलों को जनविरोधी बताने के साथ काग्रेस पर देश को बर्बाद करने का भी आरोप लगा रहे है। इसके जवाब में काग्रेस ने अपने चुनाव प्रबंधकों को मैदान में उतारने के संकेत दिए है। देश में सूचना क्राति के जनक सैम पित्रोदा को गुजरात भेजकर इसकी शुरुआत भी कर दी है। पित्रोदा का कहना है कि केंद्र सरकार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाधी और बोफोर्स तोप घोटाले के पिता के 21वीं सदी के भारत का सपना पूरा करने को कटिबद्ध है। जिसमे पुरे देश को अमेरिका के यहा गिरवी रखना भी शामिल हें |
मेरी गुजरात वासियों से एक ही अपील हे की मोदी जेसा व्यक्ति उन्हें वापस कभी नही मिलेगा | वोटिंग वाले दिन सब अपना काम बंद रख कर अपने परिवार के हर इंसान वो चाहे कहीं भी हो, उसका वोट मोदी जी के पक्ष में डलवाए, जाती-पाती और दलगत निति से ऊपर उठ कर मोदी को वोट करे, और सारे चोर और लुटर डालो को सबक सिखाये ताकि दुबारा वो गुजरात का रुख नही करे|
मोदी जी देश के विकास की बात कर रहे है, जबकि अन्य दल वोट ''कटवा'' बनकर भाजपा और मोदी जी का चुनावी गणित बिगाड़ने की रणनीति पर चल रहे है। देश के आम चुनाव से पहले गुजरात विधानसभा के चुनाव को सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री मोदी व काग्रेस नेता राहुल गाधी का आमना सामना तय है। राजनीतिक बयानबाजी के चलते इस चुनाव पर देश की नजरे टिकी है, मोदी अपनी विवेकानंद युवा यात्रा के जरिए जनसंपर्क में जुटे है, जबकि काग्रेस को अपने स्टार प्रचार राहुल का इन्तजार है। मुख्यमंत्री मोदी अपने शासन के चार हजार दिन पूरे करने के साथ ही मंगलवार को राज्य के 14 हजार सरपंचों का महासम्मेलन आयोजित कर एक बड़े वोट बैंक को साधने की तैयारी में है। इससे पहले मोदी ने गाधीनगर में ही महात्मा मंदिर की स्थापना के दौरान भी प्रदेश के सभी सरपंचों को इसमें भागीदार बनाया था। उधर काग्रेस केंद्र सरकार तथा प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की उपलब्धियों को जनता तक पहुचाकर गुजरात की दशा और दिशा बदलने का भरोसा दे रही है। काग्रेस अपने गुजरात प्रजा विकास दर्शन के जरिए अब तक सात चुनावी घोषणाएं कर चुकी है, जिसमें महिलाओं को आवास, युवाओं को रोजगार, ब्याज मुक्त मोबाइक, मुफ्त शिक्षा व स्वास्थ्य के साथ मुफ्त लेपटॉप देने का झूठा वादा किया गया है।अगर गुजरात की जनता इन चोर कांग्रेसियों के झूठे वादों के चक्कर में पड़ी तो वो अपने विकास पुरुष मोदी को खो देगी | और कांग्रेस फिर से गुजरात को बीमारू राज्यों की लाइन में ला कर पटक देगी | मुख्यमंत्री मोदी अब तक अपने विकास कार्यो के साथ काग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाए हुए है, अब उनके मुद्दों में किराना बाजार में विदेशी निवेश, डीजल के दाम में वृद्धि तथा राहत दरों पर मिलने वाले गैस सिलेंडर भी शामिल हो गए है। मोदी केंद्र के इन फैसलों को जनविरोधी बताने के साथ काग्रेस पर देश को बर्बाद करने का भी आरोप लगा रहे है। इसके जवाब में काग्रेस ने अपने चुनाव प्रबंधकों को मैदान में उतारने के संकेत दिए है। देश में सूचना क्राति के जनक सैम पित्रोदा को गुजरात भेजकर इसकी शुरुआत भी कर दी है। पित्रोदा का कहना है कि केंद्र सरकार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाधी और बोफोर्स तोप घोटाले के पिता के 21वीं सदी के भारत का सपना पूरा करने को कटिबद्ध है। जिसमे पुरे देश को अमेरिका के यहा गिरवी रखना भी शामिल हें |
मेरी गुजरात वासियों से एक ही अपील हे की मोदी जेसा व्यक्ति उन्हें वापस कभी नही मिलेगा | वोटिंग वाले दिन सब अपना काम बंद रख कर अपने परिवार के हर इंसान वो चाहे कहीं भी हो, उसका वोट मोदी जी के पक्ष में डलवाए, जाती-पाती और दलगत निति से ऊपर उठ कर मोदी को वोट करे, और सारे चोर और लुटर डालो को सबक सिखाये ताकि दुबारा वो गुजरात का रुख नही करे|
''सिटी ऑफ़ लन्दन'' ने गाये गुजरात और मोदी की महिमा के गुण, दोनों को माना दुनिया के लिए रोल-मोडल ....
दुनिया में नरेंद्र मोदी के शासन में गुजरात की आर्थिक तरक्की, सभी के लिए चर्चा
का विषय बन गई है। लंदन के औद्योगिक हिस्से ''सिटी ऑफ लंदन'' की ओर से कराए गए
अध्ययन में भारत के गुजरात राज्य को ''आश्चर्यजनक'' करार दिया गया है। वित्तीय
रूप से विश्वसनीय बताते हुए गुजरात सरकार के बारे में कहा गया है कि
सार्वजनिक-निजी भागीदारी [पीपीपी] की मदद से बनने वाली परियोजनाओं को लागू
करने में गुजरात की मोदी सरकार का प्रदर्शन बेमिसाल है।
लंदन शहर का हिस्सा ''सिटी ऑफ लंदन'' ब्रिटेन में वित्तिय सेवा उद्योग का केंद्र है। उसकी ओर से भारत पर सेमीनार के दौरान एक समीक्षा रिपोर्ट पेश की गई। इसमें कहा गया कि राज्य में पीपीपी परियोजनाओं के लिए मजबूत ढांचा है। गुजरात इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एक्ट के रूप में ऐसी परियोजनाओं के अमल के लिए उसके पास व्यापक अधिकार हैं। सिटी ऑफ लंदन का मुंबई में ऑफिस है, जो भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार और निवेश को लेकर अहम कड़ी के तौर पर काम करता है|
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय निवेश के मामले में गुजरात पुरे भारत सबसे मजबूत स्थिति में है। वह भारत में शीर्ष निवेश स्थान के रूप में उभरा है। विश्वसनीय राज्य सरकार के कारण वहां भुगतान का जोखिम नहीं है। पीपीपी परियोजनाओं को देख रहे गुजरात इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के पास अपेक्षाकृत बेहतर तकनीकी और आकलन क्षमता है। बोर्ड के कामकाज का तरीका भी काफी निष्पक्ष और पारदर्शी है। पूरी दुनिया जिस राज्य या जिस मोदी की तारीफ़ कर रही हें क्या हम एक मोका उस इंसान को नही दे सकते ? 65 सालो की आजादी में 50 सालो तक कोंग्रेस के गाँधी ''राजपरिवार'' को सत्ता सोंपते आ रहे हें| क्या एक मोका गेर राजनितिक परिवार से आये मोदी को नही मिलना चाहिए ? जिसने गुजरात को बीमारू राज्य से विकसित राज्य में बदल दिया | देश का विकास चाहिए तो मोदी को लाईये |
लंदन शहर का हिस्सा ''सिटी ऑफ लंदन'' ब्रिटेन में वित्तिय सेवा उद्योग का केंद्र है। उसकी ओर से भारत पर सेमीनार के दौरान एक समीक्षा रिपोर्ट पेश की गई। इसमें कहा गया कि राज्य में पीपीपी परियोजनाओं के लिए मजबूत ढांचा है। गुजरात इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एक्ट के रूप में ऐसी परियोजनाओं के अमल के लिए उसके पास व्यापक अधिकार हैं। सिटी ऑफ लंदन का मुंबई में ऑफिस है, जो भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार और निवेश को लेकर अहम कड़ी के तौर पर काम करता है|
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय निवेश के मामले में गुजरात पुरे भारत सबसे मजबूत स्थिति में है। वह भारत में शीर्ष निवेश स्थान के रूप में उभरा है। विश्वसनीय राज्य सरकार के कारण वहां भुगतान का जोखिम नहीं है। पीपीपी परियोजनाओं को देख रहे गुजरात इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के पास अपेक्षाकृत बेहतर तकनीकी और आकलन क्षमता है। बोर्ड के कामकाज का तरीका भी काफी निष्पक्ष और पारदर्शी है। पूरी दुनिया जिस राज्य या जिस मोदी की तारीफ़ कर रही हें क्या हम एक मोका उस इंसान को नही दे सकते ? 65 सालो की आजादी में 50 सालो तक कोंग्रेस के गाँधी ''राजपरिवार'' को सत्ता सोंपते आ रहे हें| क्या एक मोका गेर राजनितिक परिवार से आये मोदी को नही मिलना चाहिए ? जिसने गुजरात को बीमारू राज्य से विकसित राज्य में बदल दिया | देश का विकास चाहिए तो मोदी को लाईये |
मंगलवार, 18 सितंबर 2012
महिलाए बाजार गयी तो देना होगा जुर्माना, उत्तर प्रदेश धीरे-धीरे तालिबान की गिरफ्त में, तालिबानी फरमान जारी करती पंचायते ......
उत्तर प्रदेश में बागपत जिले के असारा गांव के बाद अब सहारनपुर के घाटमपुर गांव में 36 बिरादरियों की पंचायत में भी तालिबानी फरमान सुनाया गया है। पंचायत ने बाजार में महिलाओं की खरीदारी पर रोक लगा दी है। इसका उल्लंघन करने पर 500 रुपये जुर्माना होगा। अगर खुले में कोई मोबाइल से गाना बजाता सुना गया, तो उस पर 1500 रुपये का जुर्माना लगेगा। पंचायत ने शराब, गुटखा आदि के सेवन को भी प्रतिबंधित किया है।
सोमवार को गंगोह ब्लॉक के मुस्लिम गुर्जर बहुल घाटमपुर गांव के मदरसे में यह पंचायत आयोजित की गई। अध्यक्षता करने वाले सरपंच अयूब ने बताया कि महिलाएं खरीदारी के लिए बाजार में नहीं जाएंगी। महिलाएं घर के बाहर नल पर पानी नहीं भर सकेंगी। पंचायत ने पांच-पांच व्यक्तियों की छह टीमें बनाई हैं, जो गांव में घूमकर निगरानी करेंगी और दोषी से निर्धारित जुर्माना वसूलेंगी। विरोध करने पर दोगुना जुर्माना होगा। इस मामले में जब एसएसपी डीसी मिश्रा का कहना है कि पंचायत का मामला उनके संज्ञान में नहीं है, लेकिन अगर कानून के खिलाफ कुछ हुआ, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। सरपंच अयूब का कहना है कि गांव की बिगड़ती छवि को मद्देनजर ये फैसले लिए गए हैं।
जामिया इमाम मदरसा अनवर, देवबंद के सदर मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है कि, ऐसे फैसले कौम के लिए अच्छी बात हैं। लेकिन इन्हें बंदूक की नोक पर लागू न किया जाए। जरूरत पड़े तो लोगों को समझाया जाए। फरमान लोगों के लिए दिक्कत का कारण न बने। उल्लेखनीय है कि इससे पहले जुलाई माह में बागपत के असारा गांव में 36 बिरादरियों की पंचायत में भी ऐसे ही फरमान जारी किए गए थे। इसमें प्रेम विवाह करने वालों को गांव छोड़ने का फरमान भी था। पंचायत करने वालों का पुलिस से संघर्ष भी हुआ था, और बाद में प्रेम विवाह करने वाले एक परिवार के पांच लोगों का कत्ल भी किया गया।
सोमवार को गंगोह ब्लॉक के मुस्लिम गुर्जर बहुल घाटमपुर गांव के मदरसे में यह पंचायत आयोजित की गई। अध्यक्षता करने वाले सरपंच अयूब ने बताया कि महिलाएं खरीदारी के लिए बाजार में नहीं जाएंगी। महिलाएं घर के बाहर नल पर पानी नहीं भर सकेंगी। पंचायत ने पांच-पांच व्यक्तियों की छह टीमें बनाई हैं, जो गांव में घूमकर निगरानी करेंगी और दोषी से निर्धारित जुर्माना वसूलेंगी। विरोध करने पर दोगुना जुर्माना होगा। इस मामले में जब एसएसपी डीसी मिश्रा का कहना है कि पंचायत का मामला उनके संज्ञान में नहीं है, लेकिन अगर कानून के खिलाफ कुछ हुआ, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। सरपंच अयूब का कहना है कि गांव की बिगड़ती छवि को मद्देनजर ये फैसले लिए गए हैं।
जामिया इमाम मदरसा अनवर, देवबंद के सदर मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है कि, ऐसे फैसले कौम के लिए अच्छी बात हैं। लेकिन इन्हें बंदूक की नोक पर लागू न किया जाए। जरूरत पड़े तो लोगों को समझाया जाए। फरमान लोगों के लिए दिक्कत का कारण न बने। उल्लेखनीय है कि इससे पहले जुलाई माह में बागपत के असारा गांव में 36 बिरादरियों की पंचायत में भी ऐसे ही फरमान जारी किए गए थे। इसमें प्रेम विवाह करने वालों को गांव छोड़ने का फरमान भी था। पंचायत करने वालों का पुलिस से संघर्ष भी हुआ था, और बाद में प्रेम विवाह करने वाले एक परिवार के पांच लोगों का कत्ल भी किया गया।
लगता हे कांग्रेस ने थप्पड़ की आवाज नही सुनी, बाल ठाकरे के बाद उनके पोते ने उगली आग .........
22 साल के आदित्य ठाकरे ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर दिए राजनीतिक भाषण में कांग्रेस के खिलाफ जहर उगला है। आदित्य ने कहा, आज काग्रेस ने लोगों की आवाज सुनी है, लेकिन थप्पड़ की वह आवाज नहीं सुनी है, जो कान के नीचे बजाने से पैदा होती है।
माना यह जा रहा है कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बढ़ते कद को देखते हुए शिवसेना अब आदित्य को तेजतर्रार नेता के तौर पर पेश करना चाहती है। चूंकि उद्धव ठाकरे की छवि एक शांत नेता की है, इसलिए बाल ठाकरे अपने पोते के जरिए अपनी परंपरा को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
शिवसेना की इकाई युवासेना के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे ने रविवार को शिवाजी पार्क से सिद्धिविनायक मंदिर तक साइकलों और बैलगाड़ियों के साथ विरोध प्रदर्शन रैली की। यह रैली सब्सिडी वाली रसोई गैस में कटौती और डीजल के दामों में बढ़ोतरी के विरोध में थी। रैली में करीब 10 हजार लोग शामिल हुए।
आदित्य ने कहा, हम काग्रेस के खिलाफ इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे। आम लोगों की आवाज काग्रेस तक पहुंचेगी और हम यह पक्का करेंगे।
आदित्य रैली का नेतृत्व पैदल कर रहे थे। उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी और सासद संजय राउत समेत शिवसेना के करीब दर्जन भर बड़े नेता थे। शिवसेना के ज्यादातर आयोजनों और रैलियों में दिखने के बावजूद आदित्य ने इससे पहले सार्वजनिक रूप से भाषण नहीं दिया था।
हालाकि आदित्य के बोलने के बाद और रैली के खत्म होने से पहले उद्धव आ गए थे। शिवसेना के एक कार्यकर्ता ने कहा, सेना में सब कुछ सार्वजनिक भाषण देने पर ही है। बाला साहेब ने अपने बोलने के दम पर पार्टी खड़ी की। आदित्य साहेब को लगातार बोलना चाहिए और उसी तरह की आक्त्रामकता दिखानी चाहिए, जैसी उन्होंने रविवार को दिखाई।
एक और कार्यकर्ता के मुताबिक यह रैली 2014 के आम चुनावों के मद्देनजर आदित्य को उभारने के लिए आयोजित की गई थी। शिवसेना सूत्रों ने बताया कि आदित्य ने इस रैली के आयोजन में खुद रुचि दिखाई।
मार्शल गाड़ी में ३ गायों को भर कर काटने ले जा रहे दो पकडे, कहा ये तो रोज का काम हें ..........
एक ऐसा दृश्य जिसने मानवता का सर शर्म से झुका दिया. क्या आप कल्पना कर सकते है जिस मार्शल जीप में पिछली सीट पर बमुश्किल १० सवारियां बैठे जाती है. उसी जगह में वध करने के लिए दो गायो और एक बछड़े को ठूंसकर ले जाया जा रहा था, जिसे पुलिस ने पकड़ा. काफी मशक्कत के बाद वहां से पशुओ को उतरा गया तब तक एक गाय ने तड़पकर दम तोड़ दिया ,
पकडे गए आरोपी नूर मोहम्मद ने बताया की ऐसे कार्य को अंजाम देने वाले कई लोग है. और ये उनका रोज का काम हें |
ऐसी क्रूरता कहाँ तक उचित है...इस घटना का दृश्य......
स्वयं देखे.... और सोचे की क्या इसलिए हमने ऐसे देश में जन्म लिया जहाँ गाय को गो- माता का दर्जा दिया जाता हें,जिस धरती पर कहते हें की देवता भी जन्म लेने को तरसते, वहा पर इस तरह के राक्षसी कार्य हमारी आँखों के सामने हो रहे हें, और हम मूक बन कर समर्थन कर रहे हें |
और सोचे क्या यह जघन्य अपराध नहीं है ??
हमारा एक सवाल तथाकथित सेकुलरों से और मुस्लिम से की वो इस पर क्या कहंगे ?
ऐसी क्रूरता कहाँ तक उचित है...इस घटना का दृश्य......
स्वयं देखे.... और सोचे की क्या इसलिए हमने ऐसे देश में जन्म लिया जहाँ गाय को गो- माता का दर्जा दिया जाता हें,जिस धरती पर कहते हें की देवता भी जन्म लेने को तरसते, वहा पर इस तरह के राक्षसी कार्य हमारी आँखों के सामने हो रहे हें, और हम मूक बन कर समर्थन कर रहे हें |
और सोचे क्या यह जघन्य अपराध नहीं है ??
हमारा एक सवाल तथाकथित सेकुलरों से और मुस्लिम से की वो इस पर क्या कहंगे ?
सोमवार, 17 सितंबर 2012
गोवा में,गोवा सरकार उठाएगी गेस पर बढ़ी कीमतों का बोझ, आम जन की राहत के लिए ....
ये वही मनोहर पारिकर जी हैं, जिन्होंने गोवा की सत्ता सँभालते ही पेट्रोल पर से वैट ख़त्म कर दिया था, जिससे पेट्रोल के दाम देश के बाकि राज्यों की तुलना में गोवा में 10 रुपये सस्ता हो गया था l और आज भी वो मुख्यमंत्री के पर्सनल प्लेन से नही, आम लोगो की तरह सामान्य हवाई जहाज में टिकिट खरीदकर आम जन की तरह ही यात्रा करते हें, ताकि आम जन से वसूले गये टेक्स के पेसो की बर्बादी ना हो | और दूसरी तरफ कांग्रस की सोनिया जी के परिवार की यात्रा का खर्च 1860 करोड़ रूपये हें |
ये उस ही राज्य में होता है जिस राज्य की जनता जाति और धर्म से उठ कर राष्ट्रवादियों को चुनती हैं, गोवा में 25-30 % आबादी इसाई है| फिर भी उन्होंने भाजपा को तो चुना, पर चुना ऐसे इंसान को जिस से विकास की आशा थी| और उस इंसान, मनोहर जी ने आम जनता की आशा को पूरा भी किया और ये भी साबित किया की सरकार चाहे तो जनता को राहत दे सकती हें| अगर गोवा की जनता भी कांग्रेस के झांसे में आकर धर्म और झूठे सेकुलरवाद के नाम पर कांग्रेस को चुनती, तो आज उन्हें भी इस राहत से वंचित रहना पड़ता । यानी गोवा भी गुजरात की राह पर चल पड़ा हें |गोवा को भी मिल ही गया एक सच्चा राष्ट्रवादी नेता | अब जरुरत हें देश को | और देश के लिए राष्ट्रवादी नेता सिर्फ एक, नरेन्द्र मोदी | भाजप को चाहिए स्पष्ट बहुमत, तो मोदी को प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार घोषित करे | और आप भी इस बार जाति,धर्म और इलाके की राजनीति से ऊपर उठ कर भाजपा को वोट दे | और मोदी को पी. एम. पद के लिए समर्थन दे जय सियाराम जय हिंद |
मोबाईल में E रिचार्ज कराना हिन्दुओ के लिए घातक, आपकी बेटी या बहन भी हो सकती हें इसका शिकार...
लगभग देश के हर शहर में है, आजकल मुस्लिम लडको ने अपने मोलानाओ के आदेशो से कई संगठन बना रखे हें | और इनका काम करने का तरीका सब से अलग है !
इनका काम हिन्दू लडकियों को अपने प्यार के जाल में फ़साना, फिर उन्हें किसी होटल या रिसोर्ट में ले जाकर उनके साथ प्यार का हवाला देकर, शारीरिक सम्बन्ध बनाना, फिर आये दिन उनका योन शोषण करना, फिर शादी करने के लिए मुस्लिम बनने का दबाव डालना, और अंत में हिन्दू लड़की को मुस्लिम बना डालना |
आज कल ज्यादातर लोग अपने मोबाईल की इ रिचार्ज करा रहे है, लड़किया भी, जैसे ही हिन्दू लड़की किसी मुस्लिम की मोबाईल की दूकान पर जाती है, और बोलती है की मेरा मोबाईल रिचार्ज कर दो 100 / 200 रुपये से ..तो मुस्लिम दूकानदार लड़की से उसका नंबर अपने कॉपी में लिख लेता है, फिर रिचार्ज कर देता है, अब दूकानदार को पता चल गया की यह नंबर एक हिन्दू लड़की का है ..फिर वो ये नम्बर अपने शहर में बनाये हुए संगठन तक पहुंचा देता हें | इसके बदले में दूकान वाले को पैसा मिलता है ! और फिर संगठन से जुड़े लड़के उस लड़की को फोन करने लगते हें, कई मामलो में तो लडकिय बच जाती हें | लेकिन 100 में से अगर 5-10 भी पट गयी तो उनका मकसद कामयाब ! पहले दोस्ती, फिर झूठा प्यार , फिर शादी का झासा .....लड़की को ऐसा कर दिया जाता है की वो या तो मुस्लिम लड़के से शादी कर ले, या घर से उसके साथ भाग जाये .......उसके बाद पहले लड़की का धरम परिवर्तन....फिर 2 / 3 महीने के बाद वो मुस्लिम लड़का उस लड़की को तलाक दे कर किसी और हिन्दू लड़की को पटाने, और उसका जीवन बर्बाद करने की राह पर निकल पड़ता हें,...उसके बाद हिन्दू लड़की तो वेसे ही मुस्लिम बन चुकी होती हें, उसके घर वाले समाज के डर से उसे नही अपनाते और एस तरह उस हिन्दू लड़की का का जीवन बर्बाद ... फिर लड़के के दोस्त आते हें, और बोलते हें की तुम भी हमारे मिशन में शामिल हो जाओ...और एस तरह हिन्दू समाज को नष्ट करने का सिलसिला चल पड़ता हें |
इसलिए आप सब से निवेदन है की इ रिचार्ज नहीं कराये, सिर्फ कूपन से ही कराये रिचार्ज, और अगर majburi में कराना पड़े तो किसी भरोसे मंद हिन्दू दूकान दार से कराये | हो सकता हें की कल कही आप की बेटी भी इसका शिकार हो सकती हें | यह बात अपने घर में और सभी जानने वाले को बताये और सतर्क रहे !
जय श्री राम,
जय भारत ..!!
इसलिए आप सब से निवेदन है की इ रिचार्ज नहीं कराये, सिर्फ कूपन से ही कराये रिचार्ज, और अगर majburi में कराना पड़े तो किसी भरोसे मंद हिन्दू दूकान दार से कराये | हो सकता हें की कल कही आप की बेटी भी इसका शिकार हो सकती हें | यह बात अपने घर में और सभी जानने वाले को बताये और सतर्क रहे !
जय श्री राम,
जय भारत ..!!
रविवार, 16 सितंबर 2012
सन 2000 के बाद किसी तेल कम्पनी को घाटा नही हुआ देखे बेलेंस शीट ...........
देश में डीजल व पेट्रोलियम पदार्थो के दाम जब भी बढ़ाए जाते हैं, तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम बढ़ने का हवाला दिया जाता हें या फिर तेल कंपनियों के घाटे की दुहाई दी जाती है।
लेकिन पिछले 6 सालो में कच्चे तेल के दाम 88 डॉलर से 125 डॉलर के आसपास रहे हें, जब इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम 96 डॉलर प्रति बेरल थे, तो पेट्रोल 42 रूपये लीटर था, उसके बाद से मार्केट में पेट्रोल के दाम 12 बार बढाये हें| और बार घटे का रोना तेल कंपनियों ने रोया हें | बाहरी देश ये सोच कर ही हेरान होते हे की लाखो करोड़ के इतने घोटाले होने के बाद भी भारत की अर्थ वयवस्था केसे खड़ी हे | इसके पीछे सरकार द्वारा वसूला जाने वाला लाखो करोड़ो के टेक्स हें |
सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत पता चला है कि पेट्रोलियम कंपनियां हर साल भारी मुनाफा कमा रही हैं। वर्ष 2010-11 में ही उन्होंने 25 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का शुद्ध मुनाफा कमाया। यह जानकारी विकास गहलोत ने आरटीआइ के सहारे हासिल की है। विकास ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, ओएनजीसी, गेल इंडिया, नुमालीगढ़ रिफाइनरी, बामर लॉरी एंड कंपनी से उनकी लाभांश रिपोर्ट मांगी। इस पर कंपनियों ने जो जवाब दिए वो दिमाग की बत्ती गुल करने के साथ ही, चौंकाने वाले भी हैं। इससे पता चला है कि किसी भी तेल कंपनी को साल 2000 के बाद कोई नुकसान ही नहीं हुआ है। फिर भी पेट्रोल, डीजल या गैस की कीमत बढ़ा दी जाती है। यदि प्रमुख कंपनियों के साल 2010-11 के शुद्ध मुनाफे को जोड़ दिया जाए, तो यह करीब 25 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को छू जाता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि तेल के दाम बढ़ाने के पीछे सिर्फ मुनाफा बढ़ाना ही कंपनियों का मुख्य कार्य है।
कंपनी वित्त वर्ष मुनाफा
1. आइओसीएल 2006-07 7499 करोड़
2007-08 6963 करोड़
2008-09 2950 करोड़
2009-10 10,221 करोड़
2010-11 7445 करोड़
2. बीपीसीएल 2006-07 1805 करोड़
2007-08 1580 करोड़
2008-09 735 करोड़
2009-10 1537 करोड़
2010-11 1546 करोड़
3. एचपीसीएल 2009-10 8715 करोड़
2010-11 9373 करोड़
4. ओएनजीसी 2006-07 901 करोड़
2007-08 1663 करोड़
2008-09 2806 करोड़
2009-10 2089 करोड़
2010-11 2690 करोड़
5. गेल (इंडिया) 2006-07 2386 करोड़
2007-08 2601 करोड़
2008-09 2803 करोड़
2009-10 3139 करोड़
2010-11 3561 करोड़
(सारा शुद्ध लाभ करोड़ रुपये में )
लेकिन पिछले 6 सालो में कच्चे तेल के दाम 88 डॉलर से 125 डॉलर के आसपास रहे हें, जब इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम 96 डॉलर प्रति बेरल थे, तो पेट्रोल 42 रूपये लीटर था, उसके बाद से मार्केट में पेट्रोल के दाम 12 बार बढाये हें| और बार घटे का रोना तेल कंपनियों ने रोया हें | बाहरी देश ये सोच कर ही हेरान होते हे की लाखो करोड़ के इतने घोटाले होने के बाद भी भारत की अर्थ वयवस्था केसे खड़ी हे | इसके पीछे सरकार द्वारा वसूला जाने वाला लाखो करोड़ो के टेक्स हें |
सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत पता चला है कि पेट्रोलियम कंपनियां हर साल भारी मुनाफा कमा रही हैं। वर्ष 2010-11 में ही उन्होंने 25 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का शुद्ध मुनाफा कमाया। यह जानकारी विकास गहलोत ने आरटीआइ के सहारे हासिल की है। विकास ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, ओएनजीसी, गेल इंडिया, नुमालीगढ़ रिफाइनरी, बामर लॉरी एंड कंपनी से उनकी लाभांश रिपोर्ट मांगी। इस पर कंपनियों ने जो जवाब दिए वो दिमाग की बत्ती गुल करने के साथ ही, चौंकाने वाले भी हैं। इससे पता चला है कि किसी भी तेल कंपनी को साल 2000 के बाद कोई नुकसान ही नहीं हुआ है। फिर भी पेट्रोल, डीजल या गैस की कीमत बढ़ा दी जाती है। यदि प्रमुख कंपनियों के साल 2010-11 के शुद्ध मुनाफे को जोड़ दिया जाए, तो यह करीब 25 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को छू जाता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि तेल के दाम बढ़ाने के पीछे सिर्फ मुनाफा बढ़ाना ही कंपनियों का मुख्य कार्य है।
कंपनी वित्त वर्ष मुनाफा
1. आइओसीएल 2006-07 7499 करोड़
2007-08 6963 करोड़
2008-09 2950 करोड़
2009-10 10,221 करोड़
2010-11 7445 करोड़
2. बीपीसीएल 2006-07 1805 करोड़
2007-08 1580 करोड़
2008-09 735 करोड़
2009-10 1537 करोड़
2010-11 1546 करोड़
3. एचपीसीएल 2009-10 8715 करोड़
2010-11 9373 करोड़
4. ओएनजीसी 2006-07 901 करोड़
2007-08 1663 करोड़
2008-09 2806 करोड़
2009-10 2089 करोड़
2010-11 2690 करोड़
5. गेल (इंडिया) 2006-07 2386 करोड़
2007-08 2601 करोड़
2008-09 2803 करोड़
2009-10 3139 करोड़
2010-11 3561 करोड़
(सारा शुद्ध लाभ करोड़ रुपये में )
ईस्ट इंडिया कम्पनी वापस आ रही हे भारत (देश पर सेकड़ो साल राज करने और लुटने वाली) नया नाम वाल-मार्ट....
लगता है ये सरदार अपनी ''ख़ामोशी का मियां मिट्टू'' को यह गलत फहमी हो गई है की वर्तमान में दुनियां में एक ही अर्थ शास्त्री जिन्दा बचा है ( खुद वो ) जो पुरे हिंदुस्तान को बेवकूफ बना सकता है ।
सरदार जी समझा रहें हैं की ...............
एफ डी आई की वजह से ''वितीय घाटा कम होगा "
सरदार जी समझा रहें हैं की ...............
एफ डी आई की वजह से ''वितीय घाटा कम होगा "
सरदार जी समझते हे की देश की जनता तो बेवकूफ है, जो इतना नहीं समझती कि -
जो विदेशी कम्पनी खुदरा बाज़ार( किराना ) में आयेंगी, वो हमारे खुदरा बाज़ार में सेंध लगाएंगी।
मतलब कुल बाजार का बड़ा हिस्सा उनके ( विदेशी वाल मार्ट ) हाथ और छोटा हिस्सा गुलाम हिन्दुस्तानी के हाथ, पर बाज़ार उतने का उतना ही रहेगा, इसका मतलब वित्तीय व्यपार तो उतना ही रहना है।
क्यों की विदेशी कम्पनी से आटा खरीदने से आप चार की जगह दस रोटी तो नहीं खाओगे।
बल्कि जो वो कमाएंगे उसमे से 30 % वे अपना पैसा देश के बाहर भेजेंगे।
जिसकी वजह से एक मुर्ख अर्थ शास्त्री भी बता देगा की हमारी वित्तीय घटा बढेगा |
सोचो जनता तुम्हें कितना......................" मुर्ख , गधा गवांर और गुलाम समझते हैं ये काले अंग्रेज "
मतलब कुल बाजार का बड़ा हिस्सा उनके ( विदेशी वाल मार्ट ) हाथ और छोटा हिस्सा गुलाम हिन्दुस्तानी के हाथ, पर बाज़ार उतने का उतना ही रहेगा, इसका मतलब वित्तीय व्यपार तो उतना ही रहना है।
क्यों की विदेशी कम्पनी से आटा खरीदने से आप चार की जगह दस रोटी तो नहीं खाओगे।
बल्कि जो वो कमाएंगे उसमे से 30 % वे अपना पैसा देश के बाहर भेजेंगे।
जिसकी वजह से एक मुर्ख अर्थ शास्त्री भी बता देगा की हमारी वित्तीय घटा बढेगा |
सोचो जनता तुम्हें कितना......................" मुर्ख , गधा गवांर और गुलाम समझते हैं ये काले अंग्रेज "
शनिवार, 15 सितंबर 2012
देश में शोक की लहर, आरएसएस के पूर्व सर संघचालक के सुदर्शन का निधन.....
आरएसएस के प्रवक्ता राम राघव ने बताया कि वह शनिवार सुबह जब मॉर्निंग वॉक से लौट कर आए थे, तभी वह कुछ थकावट और बैचेनी महसूस कर रहे थे। कुछ देर बाद उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए, और देवलोक गमन कर गये | राघव ने बताया कि उनकी पार्थिव देह को अंतिम संस्कार से पूर्व जनता के दर्शनों के लिए रखा जाएगा।
के. सुदर्शन का पूरा नाम था, कुप्पाली सीतारमैया सुदर्शन, इनका जन्म 18 जून 1931 को छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में एक ब्राहमण परिवार में हुआ था। 1954 में वह आरएसएस से प्रचारक के तौर पर जुड़े थे। सुदर्शन 10 मार्च 2000 को आरएसएस के सर संचालक पद के लिए चुने गए थे। वह राजेंद्र सिंह की जगह इस पद के लिए चुने गए थे, उन्हें अपनी खराब सेहत के चलते इस पद से हटना पड़ा था। उनके निधन पर बीजेपी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। और पुरे देश में आरएसएस के लोगो में शोक की लहर फेल गयी हें | अभी तक देश के किसी नेता ने शोक वयक्त नही किया हें, क्यों की उन्हें घोटालो से ही फुर्सत नही हें|
देश में शिव जी के 12 ज्योतिर्लिंग थे,11 तो हें 12 वाँ कहाँ गया ? जाने पूरी हकीकत.........
>प्रो. ओक कि खोज ताजमहल के नाम से प्रारम्भ होती है———
=”महल” शब्द, अफगानिस्तान से लेकर अल्जीरिया तक किसी भी मुस्लिम देश में भवनों के लिए प्रयोग नही किया जाता…
यहाँ यह व्याख्या करना कि, महल शब्द मुमताज महल से लिया गया है……वह कम से कम दो प्रकार से तर्कहीन है-
पहला - शाहजहाँ कि पत्नी का नाम मुमताज महल कभी नही था, बल्कि उसका नाम मुमताज-उल-ज़मानी था ।
और दूसरा - किसी भवन का नामकरण किसी महिला के नाम के आधार पर रखने के लिए केवल अन्तिम आधे भाग (ताज)का ही प्रयोग किया जाए और प्रथम अर्ध भाग (मुम) को छोड़ दिया जाए, यह समझ से परे है ।
प्रो.ओक दावा करते हैं कि,ताजमहल नाम तेजो महालय (भगवान शिव का महल) का बिगड़ा हुआ संस्करण है, साथ ही साथ ओक कहते हैं कि -
मुमताज और शाहजहाँ कि प्रेम कहानी, चापलूस इतिहासकारों की भयंकर भूल और लापरवाह पुरातत्वविदों की सफ़ाई से, स्वयं गढ़ी गई कोरी अफवाह मात्र है, क्योंकि अगर इसमे थोड़ी भी सच्चाई होती तो शाहजहाँ के समय का कम से कम एक शासकीय अभिलेख इस प्रेम कहानी की पुष्टि कही ना कही जरुर करता है…..
इसके अतिरिक्त बहुत से प्रमाण ओक के कथन का प्रत्यक्षतः समर्थन कर रहे हैं……
तेजो महालय (ताजमहल) मुग़ल बादशाह के युग से पहले बना था, और यह भगवान् शिव को समर्पित था तथा आगरा के राजपूतों द्वारा पूजा जाता था ।
==>न्यूयार्क के पुरातत्वविद प्रो. मर्विन मिलर ने ताज के यमुना की तरफ़ के दरवाजे की लकड़ी की कार्बन डेटिंग के आधार पर 1985 में यह सिद्ध किया कि, यह दरवाजा सन् 1359 के आसपास अर्थात् शाहजहाँ के काल से लगभग 300 वर्ष पुराना है ।
==>मुमताज कि मृत्यु जिस वर्ष (1631) में हुई थी, उसी वर्ष के अंग्रेज भ्रमण कर्ता पीटर मुंडी का लेख भी इसका समर्थन करता है कि, ताजमहल मुग़ल बादशाह के पहले का एक अति महत्वपूर्ण भवन था ।
==>यूरोपियन यात्री जॉन अल्बर्ट मैनडेल्स्लो ने सन् 1638 (मुमताज कि मृत्यु के 07 साल बाद) में आगरा भ्रमण किया, और इस शहर के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत का वर्णन किया, परन्तु उसने ताज के बनने का कोई भी सन्दर्भ नही प्रस्तुत किया, जबकि भ्रांतियों मे यह कहा जाता है कि ताज का निर्माण कार्य 1631 से 1651 तक जोर शोर से चल रहा था ।
==>फ्रांसीसी यात्री फविक्स बर्निअर एम.डी. जो औरंगजेब द्वारा गद्दीनशीन होने के समय भारत आया था, और लगभग दस साल यहाँ रहा, के लिखित विवरण से पता चलता है कि, औरंगजेब के शासन के समय यह झूठ फैलाया जाना शुरू किया गया कि, ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था…….
प्रो. ओक. बहुत सी आकृतियों और शिल्प सम्बन्धी असंगताओं को इंगित करते हैं जो इस विश्वास का समर्थन करते हैं कि, ताजमहल विशाल मकबरा न होकर विशेषतः हिंदू शिव मन्दिर है…….
आज भी ताजमहल के बहुत से कमरे शाहजहाँ के काल से बंद पड़े हैं, जो आम जनता की पहुँच से परे हैं। प्रो. ओक जोर देकर कहते हैं कि, हिंदू मंदिरों में ही पूजा एवं धार्मिक संस्कारों के लिए भगवान् शिव की मूर्ति, त्रिशूल,कलश और ॐ आदि वस्तुएं प्रयोग की जाती हैं।
==>ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद बूँद कर पानी टपकता रहता है, यदि यह सत्य है तो पूरे विश्व मे किसी कि भी कब्र पर बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता, जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद बूँद कर पानी टपकाने की व्यवस्था की जाती है, फ़िर ताजमहल (मकबरे) में बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब….????
राजनीतिक भर्त्सना के डर से इंदिरा गाँधी सरकार ने ओक की सभी पुस्तकें स्टोर्स से वापस ले लीं थीं, और इन पुस्तकों के प्रथम संस्करण को छापने वाले संपादकों को भयंकर परिणाम भुगत लेने की धमकियां भी दी गईं थी ।
प्रो. पी. एन. ओक के अनुसंधान को ग़लत या सिद्ध करने का केवल एक ही रास्ता है, कि वर्तमान केन्द्र सरकार बंद कमरों को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षण में खुलवाए, और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को छानबीन करने दे ।
ज़रा सोचिये….!!!!!!
कि यदि ओक का अनुसंधान पूर्णतयः सत्य है तो किसी देशी राजा के बनवाए गए संगमरमरी आकर्षण वाले खूबसूरत, शानदार एवं विश्व के महान आश्चर्यों में से एक भवन, “तेजो महालय” को बनवाने का श्रेय बाहर से आए मुग़ल बादशाह शाहजहाँ को क्यों……?????
तथा -
इससे जुड़ी तमाम यादों का सम्बन्ध मुमताज-उल-ज़मानी से क्यों……..??????? ताजमहल के बारे में ये लाइने बिलकुल सटीक बैठती हें--
आंसू टपक रहे हैं, हवेली के बाम से,
रूहें लिपट के रोती हैं, हर खासों आम से,
अपनों ने बुना था हमें, कुदरत के काम से,
फ़िर भी यहाँ जिंदा हैं, हम गैरों के नाम से,
शुक्रवार, 14 सितंबर 2012
गुजरात में चुनाव प्रचार से पीछे हटी कांग्रेस, कहा राहुल नही जायेंगे गुजरात प्रचार करने .....
नरेंद्र मोदी ने कहा कि काग्रेस यह कह रहीहै, कि राहुल गुजरात में प्रचार नहीं करेंगे। क्यों? मैं और गुजरात की जनता इसका कारण जानना चाहती है। क्या राहुल यह सोचते हैं कि गुजरात बहुत बुरा है, इसलिए वह प्रचार नहीं करेंगे? या फिर उन्हें पता हें, की गुजरात में राहुल हो चाहे सोनिया इनकी दाल नही गलेगी, चाहे कितना भी प्रचार कर ले ।
वलसाड के मोटा पोंधा गाव में एक रैली में मोदी ने यह बात कही। मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, काग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाधी पर हमला बोलते हुए कहा कि वह किसी से भी मुकाबले के लिए तैयार हैं। भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने भी कहा कि राहुल गाधी गुजरात कैसे आ सकते हैं ? क्योंकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में काग्रेस की हार के बाद उन्हें हकीकत पता चल गई है ।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)












