देश में डीजल व पेट्रोलियम पदार्थो के दाम जब भी बढ़ाए जाते हैं, तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम बढ़ने का हवाला दिया जाता हें या फिर तेल कंपनियों के घाटे की दुहाई दी जाती है।
लेकिन पिछले 6 सालो में कच्चे तेल के दाम 88 डॉलर से 125 डॉलर के आसपास रहे हें, जब इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम 96 डॉलर प्रति बेरल थे, तो पेट्रोल 42 रूपये लीटर था, उसके बाद से मार्केट में पेट्रोल के दाम 12 बार बढाये हें| और बार घटे का रोना तेल कंपनियों ने रोया हें | बाहरी देश ये सोच कर ही हेरान होते हे की लाखो करोड़ के इतने घोटाले होने के बाद भी भारत की अर्थ वयवस्था केसे खड़ी हे | इसके पीछे सरकार द्वारा वसूला जाने वाला लाखो करोड़ो के टेक्स हें |
सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत पता चला है कि पेट्रोलियम कंपनियां हर साल भारी मुनाफा कमा रही हैं। वर्ष 2010-11 में ही उन्होंने 25 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का शुद्ध मुनाफा कमाया। यह जानकारी विकास गहलोत ने आरटीआइ के सहारे हासिल की है। विकास ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, ओएनजीसी, गेल इंडिया, नुमालीगढ़ रिफाइनरी, बामर लॉरी एंड कंपनी से उनकी लाभांश रिपोर्ट मांगी। इस पर कंपनियों ने जो जवाब दिए वो दिमाग की बत्ती गुल करने के साथ ही, चौंकाने वाले भी हैं। इससे पता चला है कि किसी भी तेल कंपनी को साल 2000 के बाद कोई नुकसान ही नहीं हुआ है। फिर भी पेट्रोल, डीजल या गैस की कीमत बढ़ा दी जाती है। यदि प्रमुख कंपनियों के साल 2010-11 के शुद्ध मुनाफे को जोड़ दिया जाए, तो यह करीब 25 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को छू जाता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि तेल के दाम बढ़ाने के पीछे सिर्फ मुनाफा बढ़ाना ही कंपनियों का मुख्य कार्य है।
कंपनी वित्त वर्ष मुनाफा
1. आइओसीएल 2006-07 7499 करोड़
2007-08 6963 करोड़
2008-09 2950 करोड़
2009-10 10,221 करोड़
2010-11 7445 करोड़
2. बीपीसीएल 2006-07 1805 करोड़
2007-08 1580 करोड़
2008-09 735 करोड़
2009-10 1537 करोड़
2010-11 1546 करोड़
3. एचपीसीएल 2009-10 8715 करोड़
2010-11 9373 करोड़
4. ओएनजीसी 2006-07 901 करोड़
2007-08 1663 करोड़
2008-09 2806 करोड़
2009-10 2089 करोड़
2010-11 2690 करोड़
5. गेल (इंडिया) 2006-07 2386 करोड़
2007-08 2601 करोड़
2008-09 2803 करोड़
2009-10 3139 करोड़
2010-11 3561 करोड़
(सारा शुद्ध लाभ करोड़ रुपये में )
लेकिन पिछले 6 सालो में कच्चे तेल के दाम 88 डॉलर से 125 डॉलर के आसपास रहे हें, जब इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम 96 डॉलर प्रति बेरल थे, तो पेट्रोल 42 रूपये लीटर था, उसके बाद से मार्केट में पेट्रोल के दाम 12 बार बढाये हें| और बार घटे का रोना तेल कंपनियों ने रोया हें | बाहरी देश ये सोच कर ही हेरान होते हे की लाखो करोड़ के इतने घोटाले होने के बाद भी भारत की अर्थ वयवस्था केसे खड़ी हे | इसके पीछे सरकार द्वारा वसूला जाने वाला लाखो करोड़ो के टेक्स हें |
सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत पता चला है कि पेट्रोलियम कंपनियां हर साल भारी मुनाफा कमा रही हैं। वर्ष 2010-11 में ही उन्होंने 25 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का शुद्ध मुनाफा कमाया। यह जानकारी विकास गहलोत ने आरटीआइ के सहारे हासिल की है। विकास ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, ओएनजीसी, गेल इंडिया, नुमालीगढ़ रिफाइनरी, बामर लॉरी एंड कंपनी से उनकी लाभांश रिपोर्ट मांगी। इस पर कंपनियों ने जो जवाब दिए वो दिमाग की बत्ती गुल करने के साथ ही, चौंकाने वाले भी हैं। इससे पता चला है कि किसी भी तेल कंपनी को साल 2000 के बाद कोई नुकसान ही नहीं हुआ है। फिर भी पेट्रोल, डीजल या गैस की कीमत बढ़ा दी जाती है। यदि प्रमुख कंपनियों के साल 2010-11 के शुद्ध मुनाफे को जोड़ दिया जाए, तो यह करीब 25 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को छू जाता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि तेल के दाम बढ़ाने के पीछे सिर्फ मुनाफा बढ़ाना ही कंपनियों का मुख्य कार्य है।
कंपनी वित्त वर्ष मुनाफा
1. आइओसीएल 2006-07 7499 करोड़
2007-08 6963 करोड़
2008-09 2950 करोड़
2009-10 10,221 करोड़
2010-11 7445 करोड़
2. बीपीसीएल 2006-07 1805 करोड़
2007-08 1580 करोड़
2008-09 735 करोड़
2009-10 1537 करोड़
2010-11 1546 करोड़
3. एचपीसीएल 2009-10 8715 करोड़
2010-11 9373 करोड़
4. ओएनजीसी 2006-07 901 करोड़
2007-08 1663 करोड़
2008-09 2806 करोड़
2009-10 2089 करोड़
2010-11 2690 करोड़
5. गेल (इंडिया) 2006-07 2386 करोड़
2007-08 2601 करोड़
2008-09 2803 करोड़
2009-10 3139 करोड़
2010-11 3561 करोड़
(सारा शुद्ध लाभ करोड़ रुपये में )

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