लगता है ये सरदार अपनी ''ख़ामोशी का मियां मिट्टू'' को यह गलत फहमी हो गई है की वर्तमान में दुनियां में एक ही अर्थ शास्त्री जिन्दा बचा है ( खुद वो ) जो पुरे हिंदुस्तान को बेवकूफ बना सकता है ।
सरदार जी समझा रहें हैं की ...............
एफ डी आई की वजह से ''वितीय घाटा कम होगा "
सरदार जी समझा रहें हैं की ...............
एफ डी आई की वजह से ''वितीय घाटा कम होगा "
सरदार जी समझते हे की देश की जनता तो बेवकूफ है, जो इतना नहीं समझती कि -
जो विदेशी कम्पनी खुदरा बाज़ार( किराना ) में आयेंगी, वो हमारे खुदरा बाज़ार में सेंध लगाएंगी।
मतलब कुल बाजार का बड़ा हिस्सा उनके ( विदेशी वाल मार्ट ) हाथ और छोटा हिस्सा गुलाम हिन्दुस्तानी के हाथ, पर बाज़ार उतने का उतना ही रहेगा, इसका मतलब वित्तीय व्यपार तो उतना ही रहना है।
क्यों की विदेशी कम्पनी से आटा खरीदने से आप चार की जगह दस रोटी तो नहीं खाओगे।
बल्कि जो वो कमाएंगे उसमे से 30 % वे अपना पैसा देश के बाहर भेजेंगे।
जिसकी वजह से एक मुर्ख अर्थ शास्त्री भी बता देगा की हमारी वित्तीय घटा बढेगा |
सोचो जनता तुम्हें कितना......................" मुर्ख , गधा गवांर और गुलाम समझते हैं ये काले अंग्रेज "
मतलब कुल बाजार का बड़ा हिस्सा उनके ( विदेशी वाल मार्ट ) हाथ और छोटा हिस्सा गुलाम हिन्दुस्तानी के हाथ, पर बाज़ार उतने का उतना ही रहेगा, इसका मतलब वित्तीय व्यपार तो उतना ही रहना है।
क्यों की विदेशी कम्पनी से आटा खरीदने से आप चार की जगह दस रोटी तो नहीं खाओगे।
बल्कि जो वो कमाएंगे उसमे से 30 % वे अपना पैसा देश के बाहर भेजेंगे।
जिसकी वजह से एक मुर्ख अर्थ शास्त्री भी बता देगा की हमारी वित्तीय घटा बढेगा |
सोचो जनता तुम्हें कितना......................" मुर्ख , गधा गवांर और गुलाम समझते हैं ये काले अंग्रेज "

1 टिप्पणी:
अब नरेंद्र मोदी ने एफडीआय सब जगह लागु का फरमान किया है, अब तुम्हारी बोलती कहाँ गटर में जाके बंद हो गई क्या?
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