प्रतिबंध की घोषणा करते हुए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कहा है कि लश्कर-ए-तैयबा को वर्ष 2002 के जनवरी में एक विदेशी आतंकी संगठन कहा जाता था, इसके बावजूद इसका पाकिस्तान में और पूरे क्षेत्र में संचालन जारी है, और यह दुनियाभर में आतंकी गतिविधियों में लगा है। लश्कर ने पाकिस्तान, भारत, अफगानिस्तान और अमेरिकी हितों के खिलाफ बड़ी संख्या में आतंकी कार्य किए हैं। यह आतंकी 26/11 के मुंबई हमले के लिए भी जिम्मेदार है, जिसमें छह अमेरिकी सहित 160 से अधिक लोग मारे गए थे। इससे पहले जुलाई 2006 में हुए मुंबई ट्रेन विस्फोट भी इसी आतंकी संगठन ने किए थे, जिसमें 180 से अधिक लोग मारे गए थे।
मीर और ताल्हा के अलावा लश्कर के जिन नेताओं पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें अब्दुल्ला मुजाहिद, अहमद याकूब, हाफिज खालिद वालिद, कारी मुहम्मद याकूब शेख, आमिर हमजा, अब्दुल्ला मुंतजीर का नाम शामिल है। जिन लोगों पर गुरुवार को प्रतिबंध लगाया गया, वे पाकिस्तान में रहते हैं और लश्कर-ए-तैयबा का प्रचार अभियान, वित्तीय और ठहरने की सुविधा मुहैया कराते हैं।
इस बीच, भारत के विदेश सचिव रंजन मथाई ने संवाददाताओं को कहा कि आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष को बेहतर बनाने के लिए अंतराष्ट्रीय सहयोग के इस कदम का स्वागत करना चाहिए।( रात में सोनिया के मुजरे का भी इंतजाम किया गया होगा सवाददाता के लिए)
सईद के खिलाफ पर्याप्त सुबूत नहीं : मलिक
पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक ने गुरुवार को कहा कि उनका देश अब भी मुंबई हमले में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के खिलाफ पर्याप्त सुबूत का इंतजार कर रहा है। (उनके कहने का मतलब ये हे की आप हाफिज को ऑन द स्पोट पकड ले तभी हम मानेंगे की वो आतंकवादी गतिविधि करता हें)
हालांकि, भारत की ओर से बार-बार जोर देकर कहा गया है कि मुंबई हमले में सईद की संलिप्तता के पर्याप्त सुबूत दिए गए हैं। मलिक ने कहा कि मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया है लेकिन उसे दोषी साबित करने के लिए सुबूतों की जरूरत है।
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