खुद मोदी जी के मुख से एक सभा में ......
मेरे यहाँ कई आतंकवादी पकडे गए, कोई अबू बशीर पकड़ा गया, कोई सलीम पकड़ा गया, कोई कयामुद्दीन पकड़ा गया, ना जाने कितने आन,बान,खान पकड़े गए, मैंने भारत सरकार (कांग्रेसी ) को कहा कि आतंकवादियों को
मेरे यहाँ कई आतंकवादी पकडे गए, कोई अबू बशीर पकड़ा गया, कोई सलीम पकड़ा गया, कोई कयामुद्दीन पकड़ा गया, ना जाने कितने आन,बान,खान पकड़े गए, मैंने भारत सरकार (कांग्रेसी ) को कहा कि आतंकवादियों को
कठोर से कठोर सजा मिले इसके लिए मुझे ‘’ गुजकोक ‘’ का कानून लागू करने दो, तो मुझे क्या कहते हैं कि मोदी जी ये तो बड़ा ही पिशाची कानून है, इसे हम आपके हाथों में नहीं दे सकते। इसलिए इन आतंकवादियों पर इस कानून का उपयोग नहीं कर सकते।
लेकिन जब माले-गाँव में बम धमाके हुए, कोई सेना का जवान हिन्दू पकड़ा गया, कोई हिन्दू साधू-महात्मा पकड़ा गया ,कोई हिन्दू साध्वी पकड़ी गयी, तो वहाँ पर ‘’ मकोका ‘’ का कानून लगाते हैं ये उन पर ।
गुजरात का ''गुजकोक'' कानून कोमा, फुल स्टॉप लगाकर बिलकुल महाराष्ट्र के मकोका के कानून कि जेरोक्स कोपी है, कोई फर्क नहीं है। लेकिन फिर भी मुस्लिम वोट बैंक कि राजनीती के कारण उस कानून को लागू नहीं होने दे रहे गुजरात में।
आप मुझे बताइए, कोई अबू बशर पकड़ा जाए, कोई सलीम पकड़ा जाए, कोई कयामुद्दीन पकड़ा जाए, कोई उस्मान पकड़ा जाए तो उस पर कठोर कानून नहीं लगेगा लेकिन अगर कोई साध्वी पकड़ी जाए, कोई साधू पकड़ा जाये, कोई सेना का जवान पकड़ा जाए तो उस पर कठोर कानून लगेगा, आखिर ये भेद-भाव किसके लिए और क्यों ?? क्या ये कांग्रेस का आतंकवाद से लड़ने का तरीका है ??......क्या सभी आतंकवादियों को एक ही कानून से सजा नहीं होनी चाहिए ??और हमेशा मुस्लिम आदमी ही क्यों आतंकवादी के रूप में सामने आता हें ??
और एक बात और बताऊं, मेरी सरकार जब अबू बशर का रिमांड मांगती है, तो सिर्फ 14 दिन का रिमांड मिलता है, लेकिन महाराष्ट्र कि कोंग्रेस कि सरकार जब साध्वी का रिमांड मांगती है, तो 6 महीने का रिमांड मिलता है।
मेरे यहाँ अगर अबू बशीर भाग गया, तो मैं उसकी सम्पति जब्त नहीं कर सकता हूँ, लेकिन महाराष्ट्र में अगर साध्वी का कोई चेला भाग गया तो उसकी सम्पति जब्त हो जाती है।
मैंने अगर अबू बशर कि टेलीफोन पे बातचीत अपने आकाओं से करते हुए सुन ली, और उसे रिकॉर्ड करके कोर्ट में पेश कि तो भी मैं अबू बशर को सजा नहीं करवा सकता हूँ, लेकिन अगर साध्वी कि फोन कि बातचीत रिकॉर्ड करके कोर्ट में पेश कि गयी तो उसे फांसी तक कि सजा करवाई जा सकती है।
मेरे यहाँ अगर अबू बशर ने किसी के यहाँ रात को आराम किया हो ,किसी के यहाँ बारूद छुपाया हों , किसी के यहाँ खाना खाया हो तो भी मैं उसके उस शुभचितंक को सजा नहीं करवा सकता हूँ, लेकिन अगर साध्वी प्रज्ञा ने या आर्मी के किसी जवान ने किसी के घर में चाय भी पी ली हो तो चाय पिलाने वाले को फांसी कि सजा करवाई जा सकती है।
ये भेदभाव क्यों ............................क्यों ये भेद-भाव ??
और इसीलिए मित्रों मेरी लड़ाई बड़ी मुद्दों कि है और ये दिल्ली कि कोंग्रेस कि सल्तनत मुझे जवाब नहीं दे पा रही है ,मैं आतंकवाद का घौर दुश्मन हूँ और मैं आतंकवाद को हिंदुस्तान कि जड़ों से उखाड फैंकने के लिए बड़ी ताकत से मैदान में उतरा हुआ इंसान हूँ
आपके पास चाहे घर हो ,बंगला हो ,गाडी हो लेकिन जवान बेटा भी तो शाम को जिन्दा और सुरक्षित घर वापस लौटना चाहिए और तब जाकर के कहना पड़ता है मित्रों कि आज के समय में भारतीय जनता पार्टी के अलावा और दूसरा कोई चारा नहीं है।
गुजरात का ''गुजकोक'' कानून कोमा, फुल स्टॉप लगाकर बिलकुल महाराष्ट्र के मकोका के कानून कि जेरोक्स कोपी है, कोई फर्क नहीं है। लेकिन फिर भी मुस्लिम वोट बैंक कि राजनीती के कारण उस कानून को लागू नहीं होने दे रहे गुजरात में।
आप मुझे बताइए, कोई अबू बशर पकड़ा जाए, कोई सलीम पकड़ा जाए, कोई कयामुद्दीन पकड़ा जाए, कोई उस्मान पकड़ा जाए तो उस पर कठोर कानून नहीं लगेगा लेकिन अगर कोई साध्वी पकड़ी जाए, कोई साधू पकड़ा जाये, कोई सेना का जवान पकड़ा जाए तो उस पर कठोर कानून लगेगा, आखिर ये भेद-भाव किसके लिए और क्यों ?? क्या ये कांग्रेस का आतंकवाद से लड़ने का तरीका है ??......क्या सभी आतंकवादियों को एक ही कानून से सजा नहीं होनी चाहिए ??और हमेशा मुस्लिम आदमी ही क्यों आतंकवादी के रूप में सामने आता हें ??
और एक बात और बताऊं, मेरी सरकार जब अबू बशर का रिमांड मांगती है, तो सिर्फ 14 दिन का रिमांड मिलता है, लेकिन महाराष्ट्र कि कोंग्रेस कि सरकार जब साध्वी का रिमांड मांगती है, तो 6 महीने का रिमांड मिलता है।
मेरे यहाँ अगर अबू बशीर भाग गया, तो मैं उसकी सम्पति जब्त नहीं कर सकता हूँ, लेकिन महाराष्ट्र में अगर साध्वी का कोई चेला भाग गया तो उसकी सम्पति जब्त हो जाती है।
मैंने अगर अबू बशर कि टेलीफोन पे बातचीत अपने आकाओं से करते हुए सुन ली, और उसे रिकॉर्ड करके कोर्ट में पेश कि तो भी मैं अबू बशर को सजा नहीं करवा सकता हूँ, लेकिन अगर साध्वी कि फोन कि बातचीत रिकॉर्ड करके कोर्ट में पेश कि गयी तो उसे फांसी तक कि सजा करवाई जा सकती है।
मेरे यहाँ अगर अबू बशर ने किसी के यहाँ रात को आराम किया हो ,किसी के यहाँ बारूद छुपाया हों , किसी के यहाँ खाना खाया हो तो भी मैं उसके उस शुभचितंक को सजा नहीं करवा सकता हूँ, लेकिन अगर साध्वी प्रज्ञा ने या आर्मी के किसी जवान ने किसी के घर में चाय भी पी ली हो तो चाय पिलाने वाले को फांसी कि सजा करवाई जा सकती है।
ये भेदभाव क्यों ............................क्यों ये भेद-भाव ??
और इसीलिए मित्रों मेरी लड़ाई बड़ी मुद्दों कि है और ये दिल्ली कि कोंग्रेस कि सल्तनत मुझे जवाब नहीं दे पा रही है ,मैं आतंकवाद का घौर दुश्मन हूँ और मैं आतंकवाद को हिंदुस्तान कि जड़ों से उखाड फैंकने के लिए बड़ी ताकत से मैदान में उतरा हुआ इंसान हूँ
आपके पास चाहे घर हो ,बंगला हो ,गाडी हो लेकिन जवान बेटा भी तो शाम को जिन्दा और सुरक्षित घर वापस लौटना चाहिए और तब जाकर के कहना पड़ता है मित्रों कि आज के समय में भारतीय जनता पार्टी के अलावा और दूसरा कोई चारा नहीं है।

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