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सोमवार, 3 सितंबर 2012

चीनी रक्षा मंत्री ने किया अमर जवान ज्योति जाने से इन्कार, साबित किया की चीन कभी भारत को प्रगति को बर्दाश्त नही कर सकता


India, China to resume army exercises from next year भारत और चीन के बीच रक्षा संबंध सामान्य बनाने की कोशिशों को झटका देते हुए चीनी खेमे ने अपने रक्षा मंत्री की भारत यात्रा के दौरान अमर जवान ज्योति पर श्रद्धांजलि अर्पित करने से इन्कार कर दिया। चीनी खेमे के इन्कार के बाद चार दिनी दौरे पर रविवार को भारत पहुंचे चीनी रक्षा मंत्री जनरल लियांग गुआंगलेई के दौरा कार्यक्रम में इसे स्थान नहीं दिया गया।
अमर जवान ज्योति में श्रद्धासुमन अर्पित करने की सामान्य परंपरा को देखते हुए चीनी रक्षा मंत्री के यात्रा कार्यक्रम के बारे में चीनी पक्ष को बताया गया था, लेकिन चीन के अफसरों ने बीजिंग से मशविरे के बाद इस पर असमर्थता जता दी। सूत्रों के अनुसार भारतीय खेमे में राय यही थी कि सात साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही भारत यात्रा में सकारात्मक बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ऐसी किसी बात पर जोर देना मुनासिब नहीं है। लिहाजा मामले को आगे नहीं बढ़ाया गया।
उल्लेखनीय है कि भारत आने वाले अनेक विदेश व रक्षा मंत्री व सैन्य प्रमुख अपने दौरे की शुरुआत में अमर जवान ज्योति पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते रहे हैं। इस फेहरिस्त में तीन महीने पहले आए अमेरिकी रक्षा मंत्री लियोन पेनेटा से लेकर फरवरी 2011 में आए फ्रांसीसी सेना प्रमुख जनरल एलरिक इरेस्ट्रोजा व नवंबर 2009 में आए तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमत्री केविन रड समेत कई नाम शामिल हैं।
चीनी रक्षा मंत्री 23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए हैं। मुंबई से अपनी यात्रा शुरू करने वाले चीनी रक्षा मंत्री ने देश की आर्थिक राजधानी में गांधी मेमोरियल का दौरा किया। चीनी रक्षा मंत्री 4 सितंबर को दिल्ली में अपने भारतीय समकक्ष एके एंटनी से मुलाकात करेंगे। द्विपक्षीय वार्ता में बीते तीन साल से रुके संयुक्त सैन्य अभ्यास 'हैंड-इन-हैंड' को अगले वर्ष आयोजित करने के मुद्दे पर भी बात आगे बढ़ेगी।
वैसे लंबे अर्से से सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे दोनों मुल्कों के रक्षा संबंधों में तनाव नया नहीं है। जनवरी 2012 में चीन जाने वाले सैन्य प्रतिनिधिमंडल में अरुणाचल प्रदेश मूल के वायुसेना अधिकारी ग्रुप कैप्टन एम पेंगिंग को वीजा से इन्कार पर रक्षा मंत्रालय ने जहां 30 सदस्यीय दल का दौरा टालने की राय बनी थी। हालांकि बाद में तनाव टालने की पैरवी कर रहे विदेश मंत्रालय के कूटनीतिक खेमे की चली और प्रतिनिधिमंडल की संख्या तो घटी, लेकिन यात्रा नहीं रोकी गई।

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